चर्चा में क्यों?
कोच्चि के वास्तुकला के छात्र राधाकृष्णन एम.एस. ने 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई की तार्क गैलरी में 28वां चार्ल्स कोरिया गोल्ड मेडल जीता। द हिंदू ने अगली सुबह इस पुरस्कार की खबर दी। उनके स्नातक शोध प्रबंध का शीर्षक एनर्जी कॉमन्स: रीइमेजिनिंग एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर ऐज अ प्लेस फॉर सिविक एंगेजमेंट है। यह विचार करता है कि कोच्चि के कलूर में एक मौजूदा सबस्टेशन स्थल व्यापक सार्वजनिक जीवन की सेवा कैसे कर सकता है। यह पदक किसी छात्र के वास्तुकला डिजाइन शोध प्रबंध को मान्यता देता है, न कि किसी नए बिजली संयंत्र के पूरा होने को। 2026 की थीम, डिजाइन के माध्यम से समानता (Equitability through Design), यह पूछती है कि वास्तुकला स्थानों और संसाधनों तक पहुंच को कैसे बेहतर बना सकती है। यह परियोजना उस प्रश्न को ठोस बनाती है: बुनियादी ढांचा एक सार्वजनिक आवश्यकता की पूर्ति करता है, लेकिन इसके आसपास के स्थान समुदाय के लिए भी कैसे उपयोगी बन सकते हैं?
सुविचारित डिजाइन प्रस्ताव के लिए एक पुरस्कार
चार्ल्स कोरिया ने 1998 में इस पदक की शुरुआत की थी। चार्ल्स कोरिया फाउंडेशन अब इसे प्रतिवर्ष प्रशासित करता है, और 2022 से पूरे भारत के वास्तुकला महाविद्यालयों को आमंत्रित कर रहा है। इसका उद्देश्य किसी छात्र की पहली पेशेवर वास्तुकला डिग्री के लिए किए गए कार्य को मान्यता देना है। फाउंडेशन दो-चरणीय प्रक्रिया का वर्णन करता है: एक कॉलेज पहले अपनी स्नातक कक्षा से एक शोध प्रबंध को नामांकित करता है, और फिर एक बाहरी जूरी प्रविष्टियों का आकलन करती है। इसलिए इसका केंद्र बिंदु केवल एक आकर्षक इमारत की छवि के बजाय किसी विशेष स्थल और समस्या पर आधारित एक डिजाइन तर्क होता है।
एक शोध प्रबंध जांच को प्रस्तावित प्रतिक्रिया से जोड़ता है। एक छात्र को यह समझना होता है कि किसी स्थान का उपयोग कौन कर सकता है, उसे किन गतिविधियों को समायोजित करने की आवश्यकता है और उसका परिवेश डिजाइन को कैसे प्रभावित करता है। रेखाचित्र और मॉडल फिर उन विचारों को परीक्षण के लिए खुला बनाते हैं। वास्तविक जीवन के मुद्दों में पुरस्कार की घोषित रुचि इस प्रक्रिया को एक व्यापक उद्देश्य देती है। यह छात्रों को यह समझाने के लिए प्रोत्साहित करती है कि कोई प्रस्ताव क्यों मायने रखता है और उसके स्थान एक साथ कैसे काम करते हैं। एक आकर्षक बाहरी रूप या महत्वाकांक्षी शीर्षक, अपने आप में, वह स्पष्टीकरण प्रदान नहीं कर सकता।
कौन प्रवेश कर सकता है, और कार्य का मूल्यांकन कैसे किया जाता है
2026 के दिशानिर्देशों के अनुसार कॉलेज का भारत में स्थित होना और वास्तुकला परिषद द्वारा अनुमोदित होना आवश्यक है। प्रविष्टि 2025–26 की स्नातक कक्षा के अंतिम वर्ष के छात्र का व्यक्तिगत शोध प्रबंध होना चाहिए; समूह कार्य की अनुमति नहीं है। प्रत्येक कॉलेज छात्र की सहमति से अपने संस्थागत प्रमुख के माध्यम से एक प्रविष्टि प्रस्तुत कर सकता है। प्रस्तावित स्थल भी भारत में होना चाहिए और थीम से संबंधित किसी समसामयिक मुद्दे को संबोधित करना चाहिए। यह एक संस्थागत नामांकन प्रक्रिया है, न कि कार्यरत वास्तुकारों के लिए कोई अप्रतिबंधित व्यक्तिगत प्रतियोगिता।
दिशानिर्देशों में अंतिम प्रस्तुति पर छात्र या कॉलेज के नाम की पहचान किए बिना कोडित प्रस्तुतियां देने की भी आवश्यकता होती है। यह समीक्षा के दौरान प्रस्तुत डिजाइन सामग्री को उसके लेखक की पहचान से अलग करता है। आवश्यक सामग्री में प्रस्तुति बोर्ड और एक संक्षिप्त व्याख्यात्मक वीडियो शामिल हैं। ऐसे प्रारूप किसी परियोजना को अपनी अवधारणा, स्थानिक संगठन और संदर्भ को एक से अधिक तरीकों से संप्रेषित करने की अनुमति देते हैं। फाउंडेशन के 2026 के आह्वान में पदक के साथ ₹25,000 के नकद पुरस्कार की घोषणा की गई थी। ये प्रतियोगिता के प्रावधान हैं, न कि निर्माण अनुदान या विजेता डिजाइन को लागू करने के लिए किसी सार्वजनिक प्राधिकरण की मंजूरी।
न्यायसंगत डिजाइन किसी स्थान के बारे में क्या पूछता है
यह थीम पहुंच की ओर ध्यान आकर्षित करती है: कौन किसी स्थान में प्रवेश कर सकता है, उसकी सुविधाओं का उपयोग कर सकता है, वहां आराम से रुक सकता है और उसकी गतिविधियों में भाग ले सकता है? सार्वजनिक दिखने वाली कोई इमारत अभी भी अपने लेआउट या परिचालन व्यवस्था के माध्यम से लोगों को बाहर रख सकती है। एक सरल डिजाइन उदाहरण के रूप में, केवल सीढ़ियों द्वारागम्य एक सभा स्थल निरंतर समतल पहुंच वाले स्थान की तुलना में पहुंच का एक अलग प्रश्न खड़ा करता है। सामर्थ्य, छाया, बैठने की व्यवस्था और आसपास की सड़कों के साथ संबंध भी उपयोग को प्रभावित कर सकते हैं। ये ऐसे प्रश्न हैं जिन्हें एक डिजाइन को संबोधित करना चाहिए, न कि ऐसे परिणाम जो केवल किसी स्थान को समावेशी कहने मात्र से स्थापित हो जाते हैं।
कॉमन्स (commons) का विचार साझा संसाधनों और उन स्थानों से संबंधित है जो सामूहिक जीवन का समर्थन करते हैं। एक वास्तुकला प्रस्ताव में, यह इस बात पर ध्यान देने के लिए आमंत्रित करता है कि लोग कैसे मिलते हैं, सीखते हैं, काम करते हैं या ज्ञान का आदान-प्रदान करते हैं। यह स्वतः ही कानूनी स्वामित्व तय नहीं करता या प्रबंधन की आवश्यकता को समाप्त नहीं करता। कोई स्थान भौतिक रूप से खुला हो सकता है फिर भी सीमित घंटों, रखरखाव की समस्याओं या अस्पष्ट जिम्मेदारी के कारण उपयोग करने में कठिन हो सकता है। इसलिए न्यायसंगत डिजाइन को स्थानिक व्यवस्था और उस तरीके के बीच संबंध की आवश्यकता होती है जिससे कोई स्थान वास्तव में कार्य करेगा।
एनर्जी कॉमन्स उस प्रश्न को कैसे विकसित करता है
फाउंडेशन के प्रोजेक्ट रिकॉर्ड में राधाकृष्णन के संस्थान की पहचान सीड एपीजे अब्दुल कलाम स्कूल ऑफ एनवायर्नमेंटल डिजाइन के रूप में की गई है। प्रस्तावित स्थल केरल के कोच्चि में कलूर में है। इसका विवरण डिजाइन को तीन जुड़े हुए हिस्सों के इर्द-गिर्द व्यवस्थित करता है: ऊर्जा बुनियादी ढांचा, जन जागरूकता और निर्माण। इनमें आवश्यक ऊर्जा प्रणालियां, उन्हें समझने के लिए स्थान, और इलेक्ट्रॉनिक सामानों के निर्माण, मरम्मत और आदान-प्रदान से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं। तीन प्रांगण घटकों को जोड़ते हैं, जिनका संपर्क पास के मेट्रो नेटवर्क और पड़ोस से है। डिजाइन के हिस्से के रूप में छत और अग्रभाग पर फोटोवोल्टिक भी प्रस्तावित हैं।
इसलिए यह प्रस्ताव बुनियादी ढांचे को एक प्रतिबंधित भूखंड पर रखे गए उपकरणों से कहीं अधिक मानता है। यह पड़ताल करता है कि क्या तकनीकी कार्यों, सीखने और रोजमर्रा की सामुदायिक गतिविधियों को अधिक जुड़े हुए तरीके से व्यवस्थित किया जा सकता है। यह शोध प्रबंध का प्रश्न है, न कि इस बात का प्रमाण कि स्थल का पहले ही पुनर्निर्माण किया जा चुका है या उसे खोला जा चुका है। एक वास्तविक कार्यान्वयन को विद्युत उपकरणों के नियंत्रित संचालन के साथ-साथ सुरक्षा, रखरखाव और जिम्मेदारी के साथ सार्वजनिक पहुंच का सामंजस्य बिठाना होगा। किसी वास्तुकला जूरी द्वारा दी गई मान्यता उन तकनीकी और प्रशासनिक आवश्यकताओं का स्थान नहीं लेती है।
कोरिया की विरासत किसी विशेष शैली से कहीं अधिक व्यापक है
चार्ल्स कोरिया का जीवनकाल 1930 से 2015 तक रहा और उन्होंने वास्तुकला, शहरी डिजाइन और नियोजन के क्षेत्र में काम किया। उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में अध्ययन किया। फाउंडेशन का सिंहावलोकन उनके काम को भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप आधुनिक वास्तुकला को ढालने के रूप में वर्णित करता है। उनके प्रभाव को किसी एक सजावटी रूपांकन तक सीमित करने की तुलना में यह एक अधिक उपयोगी शुरुआती बिंदु है। वास्तुकला को रूप और निर्माण के बारे में विकल्प चुनते समय जलवायु, गतिविधियों, आसपास की बस्तियों और इसका उपयोग करने वाले लोगों के प्रति प्रतिक्रिया देनी होती है।
उनके भारतीय सम्मानों में 1972 में पद्म श्री और 2006 में पद्म विभूषण शामिल थे। रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स ने उन्हें 1984 में अपने रॉयल गोल्ड मेडल से सम्मानित किया। ये उनके अपने पेशेवर योगदान को मान्यता देते हैं और उनके नाम पर दिए जाने वाले छात्र पदक से अलग हैं। एक डिजाइन प्रतियोगिता प्रत्येक प्रतिभागी से उनकी इमारतों की नकल करने के लिए कहे बिना उस विरासत को आगे बढ़ा सकती है। इसका शैक्षिक मूल्य नई पीढ़ी से वास्तुकला के विचारों को समकालीन परिस्थितियों और सामाजिक आवश्यकताओं के साथ जोड़ने के लिए कहने में निहित है।
एक निर्मित उदाहरण दिखाता है कि खुला स्थान किसी इमारत को कैसे व्यवस्थित कर सकता है
भोपाल में भारत भवन में, कोरिया का डिजाइन छतों और धंसे हुए प्रांगणों को बनाने के लिए झील के किनारे के ढलान वाले स्थल का उपयोग करता है। इन स्थानों के चारों ओर सांस्कृतिक सुविधाएं व्यवस्थित की गई हैं, जिनमें दीर्घाएं, कार्यशालाएं, एक कविता पुस्तकालय और प्रदर्शन क्षेत्र शामिल हैं। फाउंडेशन का प्रोजेक्ट रिकॉर्ड डिजाइन अवधि को 1975–81 के रूप में चिह्नित करता है। यह उदाहरण दिखाता है कि बंद कमरों के बीच के स्थान पूरे परिसर को व्यवस्थित करने में कैसे मदद कर सकते हैं। प्रांगण केवल इमारतों के बनने के बाद बची हुई भूमि नहीं हैं; वे आवाजाही, सभा और स्थल के साथ संबंध को संरचित कर सकते हैं।
वही रिकॉर्ड शीर्ष प्रकाश व्यवस्था और ऐसे खुले स्थानों के उपयोग की व्याख्या करता है जो प्रकाश और हवा का संचार प्रदान करते हैं। यह आंतरिक कांच वाले या संचालित किए जाने योग्य पैनलों और सुरक्षा के लिए उपयोग किए जाने वाले बाहरी लकड़ी के दरवाजों का भी वर्णन करता है। यह संयोजन शिक्षाप्रद है: खुलेपन और पर्यावरणीय प्रतिक्रिया के लिए अभी भी इस बात पर व्यावहारिक नियंत्रण की आवश्यकता होती है कि कोई इमारत कैसे संचालित होती है। यह इस बात का दावा नहीं है कि प्रत्येक प्रांगण स्वतः ही आराम, पहुंच या कम ऊर्जा उपयोग प्रदान करता है। महत्वपूर्ण वास्तुकला प्रश्न यह है कि डिजाइन के हिस्से अपनी वास्तविक सेटिंग में एक साथ कैसे काम करते हैं।
निष्कर्ष
2026 का पदक एक ऐसे प्रस्ताव को मान्यता देता है जो एक आवश्यक शहरी सेवा को साझा नागरिक स्थान की संभावना से जोड़ता है। इसका महत्व उस संबंध में निहित है जिसकी यह जांच करता है, न कि इस दावे में कि कोई नई सार्वजनिक सुविधा पहले से ही काम कर रही है। वास्तुकला शिक्षा के लिए व्यापक चुनौती समानता के विचारों को पहुंच, उपयोग, पर्यावरण और प्रबंधन के बारे में स्पष्ट निर्णयों में बदलना है। कोरिया की विरासत इस तरह की जुड़ी हुई सोच के उदाहरण पेश करती है; विजेता छात्र का कार्य इस प्रश्न को समकालीन बुनियादी ढांचे के परिवेश में लाता है।