ख़बरों में क्यों?
पर्यावरण समूहों ने मार्च 2026 में एक रिपोर्ट जारी की जिसमें दुनिया के सबसे बड़े कोबाल्ट उत्पादक पर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में अपनी तेंके फुंगुरुमे (Tenke Fungurume) खदान के पास गंभीर प्रदूषण (severe pollution) और मानव विस्थापन (human displacement) का आरोप लगाया गया। कार्यकर्ताओं के अनुसार, सुविधा से सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन (sulphur dioxide emissions) और अपशिष्ट डंपिंग (waste dumping) समुदायों और वन्यजीवों को खतरे में डालते हैं। यह विवाद कोबाल्ट की वैश्विक मांग की छिपी लागतों (hidden costs) पर प्रकाश डालता है।
पृष्ठभूमि
कोबाल्ट (Cobalt) रासायनिक प्रतीक Co और परमाणु क्रमांक 27 वाली एक नीले-भूरे रंग की, फेरोमैग्नेटिक (ferromagnetic) धातु है। यह मुख्य रूप से तांबे (copper) और निकल खनन (nickel mining) के उप-उत्पाद (by-product) के रूप में पाया जाता है और उच्च शक्ति (high-strength), गर्मी प्रतिरोधी मिश्र धातु (heat-resistant alloys) बनाने की क्षमता के लिए बेशकीमती है। इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण (renewable energy storage) के उदय के साथ कोबाल्ट का रणनीतिक मूल्य नाटकीय रूप से बढ़ गया है, जहां इसका उपयोग ऊर्जा घनत्व (energy density) और दीर्घायु (longevity) में सुधार के लिए लिथियम-आयन बैटरी कैथोड (lithium-ion battery cathodes) में किया जाता है।
वैश्विक आपूर्ति और उपयोग
- उत्पादन की सांद्रता (Concentration of production): दुनिया के कोबाल्ट का 70% से अधिक DRC से आता है, अक्सर अंतर्राष्ट्रीय समूहों द्वारा संचालित खदानों से। चीन अधिकांश शोधन क्षमता (refining capacity) को नियंत्रित करता है, जिससे आपूर्ति-श्रृंखला कमजोरियां (supply-chain vulnerabilities) पैदा होती हैं।
- अनुप्रयोग (Applications): कोबाल्ट मिश्र धातुओं का उपयोग जेट इंजन (jet engines), गैस टर्बाइन (gas turbines), सुपरअलॉय (superalloys) और काटने के उपकरणों (cutting tools) में किया जाता है। रासायनिक उद्योग में यह एक उत्प्रेरक (catalyst) के रूप में कार्य करता है। इसके चुंबकीय गुण (magnetic properties) इसे स्थायी चुंबक (permanent magnets) और इलेक्ट्रॉनिक्स में मूल्यवान बनाते हैं। हालांकि, अधिकांश आधुनिक मांग लैपटॉप, स्मार्टफोन और EV के लिए रिचार्जेबल बैटरी (rechargeable batteries) से आती है।
- भारतीय संदर्भ (Indian context): भारत में झारखंड, ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों में तांबे और निकल अयस्कों (copper and nickel ores) से जुड़े कोबाल्ट के मामूली भंडार हैं। हालांकि, यह कोई प्राथमिक कोबाल्ट का उत्पादन नहीं करता है और अपनी जरूरतों के लिए आयात (imports) पर निर्भर करता है।
पर्यावरणीय और सामाजिक मुद्दे
- प्रदूषण और स्वास्थ्य प्रभाव (Pollution and health impacts): तेंके फुंगुरुमे की रिपोर्टों का आरोप है कि सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन और अम्लीय अपशिष्टों (acidic effluents) ने हवा और पानी को दूषित कर दिया है, जिससे श्वसन संबंधी समस्याएं (respiratory problems) और आसपास के निवासियों के लिए फसल को नुकसान (crop damage) पहुंचा है।
- विस्थापन (Displacement): खनन कार्यों के विस्तार ने अपर्याप्त मुआवजे (inadequate compensation) के साथ हजारों लोगों को उनकी भूमि से मजबूर किया है, जिससे आजीविका (livelihoods) कमजोर हुई है।
- बाल श्रम और मानवाधिकार (Child labour and human rights): DRC में छोटी कारीगर खदानों (artisanal mines) को असुरक्षित काम करने की स्थिति और बाल श्रम के शोषण (exploitation) के लिए वैश्विक आलोचना का सामना करना पड़ा है।
आगे की राह
- जिम्मेदार सोर्सिंग की आवश्यकता (Need for responsible sourcing): कंपनियों और सरकारों से यह सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी आपूर्ति श्रृंखला (transparent supply chains), पर्यावरण ऑडिट (environmental audits) और निष्पक्ष श्रम मानकों (fair labour standards) को अपनाने का आग्रह किया जा रहा है कि कोबाल्ट निष्कर्षण समुदायों की कीमत पर नहीं आए।
- पुनर्चक्रण और विकल्प (Recycling and alternatives): उपयोग की गई बैटरियों से कोबाल्ट को रीसायकल करने और नई बैटरी रसायन विकसित करने के लिए शोध चल रहा है जो कम या बिल्कुल कोबाल्ट का उपयोग नहीं करते हैं।
- ऊर्जा संक्रमण के निहितार्थ (Energy transition implications): जैसे-जैसे दुनिया इलेक्ट्रिक गतिशीलता (electric mobility) की ओर तेजी से बढ़ रही है, स्थायी प्रथाओं (sustainable practices) के साथ महत्वपूर्ण खनिजों की मांग को संतुलित करना महत्वपूर्ण होगा।
स्रोत: DTE