चर्चा में क्यों? शोधकर्ताओं ने बताया कि जीवाणु (bacterium) डाइनोकोकस रेडियोड्यूरान्स (Deinococcus radiodurans) अत्यधिक दबाव से बच गया, जो कि उल्का प्रभावों (meteor impacts) द्वारा ग्रह से चट्टानों के उड़ जाने पर अनुभव किए गए दबाव के समान था। प्रयोगों से पता चलता है कि 3 गीगापास्कल (वायुमंडलीय दबाव का लगभग 30 000 गुना) तक के दबाव में लगभग 60% कोशिकाएं व्यवहार्य रहीं, जो यह सुझाव देती हैं कि रोगाणु (microbes) ग्रहों के बीच यात्रा सह सकते हैं।
पृष्ठभूमि
डाइनोकोकस रेडियोड्यूरान्स को अक्सर "दुनिया का सबसे सख्त जीवाणु" कहा जाता है। पहली बार 1950 के दशक में अलग किया गया, यह आयनकारी विकिरण (ionising radiation), शुष्कीकरण (desiccation), ठंड और निर्वात (vacuum) की उच्च खुराक का सामना कर सकता है। इसका लचीलापन (resilience) कुशल डीएनए मरम्मत प्रणालियों (DNA repair systems) और सुरक्षात्मक प्रोटीन से आता है। वैज्ञानिक जीवन की सीमाओं और पैन्सपर्मिया (panspermia) की संभावना को समझने के लिए इसका अध्ययन करते हैं- ग्रहों के बीच जीवन का हस्तांतरण।
प्रमुख निष्कर्ष
- सिम्युलेटेड प्रभाव (Simulated impacts): प्रयोगशाला परीक्षणों में, बैक्टीरिया युक्त छर्रों को 3 गीगापास्कल तक दबाव तक पहुंचने वाले तीव्र संपीड़न (compression) के अधीन किया गया था। इन विषम परिस्थितियों में भी लगभग 60% कोशिकाएँ जीवित रहीं।
- जीन अभिव्यक्ति (Gene expression): बचे हुए लोगों ने झिल्ली की मरम्मत और डीएनए संरक्षण से संबंधित जीन को सक्रिय किया, यह दर्शाता है कि रोगाणुओं ने विकास (growth) पर मरम्मत को प्राथमिकता देकर प्रतिक्रिया दी।
- पैन्सपर्मिया के लिए निहितार्थ: परिणाम इस विचार का समर्थन करते हैं कि चट्टानों में एम्बेडेड रोगाणु क्षुद्रग्रह प्रभावों (asteroid impacts) के दौरान मंगल या अन्य ग्रहों से निष्कासन से बच सकते हैं। ऐसी चट्टानें अंतरिक्ष में यात्रा कर सकती हैं और कहीं और जीवन के बीज बो सकती हैं।
- अत्यधिक लचीलापन: दबाव के अलावा, D. radiodurans शुष्कीकरण, विकिरण और ऑक्सीडेटिव तनाव (oxidative stress) को सहन करता है। ये क्षमताएं इसे जैव प्रौद्योगिकी (biotechnology) और खगोल विज्ञान (astrobiology) के लिए एक मॉडल जीव बनाती हैं।
अध्ययन इस बात को रेखांकित करता है कि सरल जीवन रूप उन स्थितियों को सहन कर सकते हैं जिन्हें कभी घातक माना जाता था। यह इस बहस को जोड़ता है कि क्या जीवन ग्रहों के बीच स्वाभाविक रूप से यात्रा कर सकता था।
स्रोत: Science Daily article on microbial survival under extreme pressure