विज्ञान और प्रौद्योगिकी

Direct-Seeded Rice: DRR Dhan 92, CR Dhan 217 और जल बचत

Direct-Seeded Rice: DRR Dhan 92, CR Dhan 217 और जल बचत

समाचार में क्यों?

भारत की फसल अनुसंधान एजेंसियों ने रिलीज के लिए धान की दो किस्मों, DRR Dhan 92 और CR Dhan 217 की पहचान की है, जिन्हें विशेष रूप से सीधी-बिजाई खेती (direct-seeded cultivation) के लिए विकसित किया गया है। इन किस्मों को मई 2026 में रिलीज के लिए पहचाना गया था (भारत सरकार की औपचारिक अधिसूचना लंबित है) और इनका उद्देश्य धान के खेतों में पानी बचाने वाली तकनीकों को अपनाने वाले किसानों का समर्थन करना है।

पृष्ठभूमि

पारंपरिक धान की खेती में बाढ़ वाले खेतों (paddies) में पौधों की रोपाई शामिल होती है। इस पद्धति में बड़ी मात्रा में पानी और श्रम की आवश्यकता होती है तथा मीथेन (methane) का उत्सर्जन होता है। Direct-seeded rice (DSR) का तात्पर्य कम से कम बाढ़ के साथ बीजों को सीधे मिट्टी में बोना या ड्रिल करना है। DSR पानी के उपयोग को 20 से 30 प्रतिशत तक कम कर सकता है और ग्रीनहाउस गैस (greenhouse gas) उत्सर्जन को कम कर सकता है, लेकिन इसके लिए ऐसी किस्मों की आवश्यकता होती है जो खरपतवारों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें और शुरुआती मौसम के तनाव को सहन कर सकें।

प्रमुख विकास

  • DRR Dhan 92: Indian Institute of Rice Research द्वारा विकसित, यह किस्म सीधी-बिजाई (direct-seeded) स्थितियों के तहत प्रति हेक्टेयर लगभग 5.8 टन उपज देती है, जो लोकप्रिय किस्मों की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। यह लगभग 135 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है और पूर्वोत्तर भारत के वर्षा-पोषित (rain-fed) ऊंचे इलाकों के लिए लक्षित है।
  • CR Dhan 217: National Rice Research Institute और International Rice Research Institute द्वारा विकसित, यह किस्म लगभग 5.9 टन प्रति हेक्टेयर और अनुकूल परिस्थितियों में 8.7 टन तक उपज देती है। यह 118 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है और पूर्वी व मध्य भारत के लिए उपयुक्त है।
  • इन दोनों किस्मों में शुरुआती ओज (early vigour), मजबूत तने और सूखे, खरपतवार तथा फसल गिरने (lodging) के प्रति सहनशीलता के जीन मौजूद हैं। वे प्रमुख कीटों और बीमारियों का भी प्रतिरोध करती हैं।
  • DSR को अपनाने से श्रम लागत कम हो सकती है, सिंचाई का पानी बच सकता है और मीथेन उत्सर्जन में कमी आ सकती है, जिससे जलवायु-स्मार्ट (climate-smart) कृषि में योगदान मिलेगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां और भारत का कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture) Punjab में GEF-7 Food Systems, Land-Use and Restoration (FOLUR) कार्यक्रम जैसी परियोजनाओं के तहत DSR को बढ़ावा दे रहे हैं।

निष्कर्ष

DRR Dhan 92 और CR Dhan 217 जैसी नई DSR-विशिष्ट किस्में direct-seeded rice को कई किसानों के लिए एक व्यावहारिक विकल्प बना सकती हैं। व्यापक रूप से अपनाने से जल संरक्षण और उत्सर्जन में कमी आ सकती है, लेकिन सफलता खरपतवार प्रबंधन समर्थन, विस्तार सेवाओं (extension services) और सुनिश्चित खरीद मूल्य पर निर्भर करेगी।

स्रोत

The Hindu

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