चर्चा में क्यों?
वैज्ञानिकों ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि कुछ अफ्रीकी डंग बीटल (African dung beetles) मिल्की वे (Milky Way) के प्रकाश बैंड का उपयोग करके नेविगेट कर सकते हैं। यह खोज दर्शाती है कि कैसे कीड़े (insects) पूरी तरह से अंधेरे वातावरण में भी सीधे यात्रा करने के लिए खगोलीय संकेतों (celestial cues) का फायदा उठाते हैं।
पृष्ठभूमि
डंग बीटल्स (Dung beetles) (परिवार स्कारैबाइडे - Scarabaeidae) गोबर इकट्ठा करते हैं और उसे गोलियों (balls) में लपेटते हैं, जिसका वे भोजन या प्रजनन कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं। एक गेंद बनाने के बाद, एक बीटल को प्रतिस्पर्धियों से दूर उसे जल्दी से लुढ़काना चाहिए। गोबर के ढेर पर लौटने से बचने के लिए सीधी रेखा में लुढ़कना महत्वपूर्ण है।
वे मिल्की वे का उपयोग कैसे करते हैं?
- ध्रुवीकृत प्रकाश (Polarised light): दिन के उजाले में, डंग बीटल्स खुद को उन्मुख (orient) करने के लिए ध्रुवीकृत सूर्य के प्रकाश (polarised sunlight) के पैटर्न का उपयोग करते हैं।
- स्टारलाइट नेविगेशन (Starlight navigation): रात में वे मिल्की वे की फैली हुई चमक पर निर्भर करते हैं। एक तारामंडल (planetarium) में किए गए प्रयोगों से पता चला कि जब मिल्की वे का बैंड दिखाई देता है, तो बीटल्स अपनी गेंदों को सीधी रेखाओं में लुढ़काते हैं; जब बैंड छिपा होता है, तो वे लक्ष्यहीन रूप से भटकते हैं।
- मानव प्रौद्योगिकी के साथ तुलना: नेविगेशन के लिए खगोलीय संकेतों को एकीकृत करने की बीटल्स की क्षमता प्राकृतिक जीपीएस (natural GPS) के अनुरूप है। यह कीड़ों में परिष्कृत संवेदी अनुकूलन (sensory adaptations) को दर्शाता है।
यह व्यवहार निशाचर वन्यजीवों (nocturnal wildlife) के लिए अंधेरे आसमान के महत्व को रेखांकित करता है। प्रकाश प्रदूषण (Light pollution) ऐसी प्राकृतिक नेविगेशन प्रणालियों को बाधित कर सकता है।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस