विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

जियोसेल तकनीक (Geocell Technology): प्लास्टिक कचरे से सड़कों का निर्माण

जियोसेल तकनीक (Geocell Technology): प्लास्टिक कचरे से सड़कों का निर्माण
Study next

Convert reading into recall

Read once, then use one quick app action while the topic is fresh. Links open in a new tab.

1 Start True/False practice 2-min recall check Open
Read for
Exam hook Prelims fact Mains angle
Other useful actions
N Save key points Build a revision note S Watch related Shorts Quick visual recap App Open News in Web App Browse related current affairs

चर्चा में क्यों?

प्रसंस्कृत (processed) प्लास्टिक कचरे से बने जियोसेल सुदृढीकरण (geocell reinforcement) का उपयोग करके केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा निर्मित एक सड़क खंड को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा मान्यता दी गई है। यह परियोजना दर्शाती है कि कैसे पुराने प्लास्टिक को ऐसी सामग्रियों में बदला जा सकता है जो सड़क की ताकत में सुधार करती हैं और एक परिपत्र अर्थव्यवस्था (circular economy) को बढ़ावा देती हैं।

पृष्ठभूमि

जियोसेल उच्च घनत्व वाले पॉलीथीन (HDPE) जैसे पॉलिमर से बनी त्रि-आयामी (three-dimensional) मधुकोश (honeycomb) जैसी संरचनाएं हैं। जब उनका विस्तार किया जाता है और मिट्टी, गिट्टी (aggregate) या पुनर्नवीनीकरण (recycled) सामग्री से भर दिया जाता है, तो वे एक सेलुलर कारावास प्रणाली (cellular confinement system) बनाते हैं जो भार (loads) फैलाता है और कमजोर सबग्रेड को स्थिर करता है। जियोसेल को मूल रूप से अमेरिकी सेना के लिए नरम जमीन पर अस्थायी सड़कें बनाने के लिए विकसित किया गया था। आज इनका उपयोग दुनिया भर में सड़क की नींव, ढलान और चैनल संरक्षण, रिटेनिंग वॉल (retaining walls) और रेल बेड के लिए किया जाता है। प्रसंस्कृत अपशिष्ट प्लास्टिक के साथ वर्जिन पॉलिमर को बदलने से लैंडफिल से कचरे को मोड़ने में मदद मिलती है और कार्बन फुटप्रिंट कम होता है।

CRRI-BPCL परियोजना की मुख्य विशेषताएं

  • अपशिष्ट-प्लास्टिक जियोसेल: इंजीनियरों ने पुनः प्राप्त प्लास्टिक पैकेजिंग से जियोसेल पैनल का उत्पादन किया, जो सड़क निर्माण के लिए एक टिकाऊ लेकिन लचीला ग्रिड प्रदान करता है।
  • बेहतर भार सहनशीलता: जब मिट्टी और गिट्टी से भर दिया जाता है, तो जियोसेल ट्रैफ़िक भार वितरित करते हैं, रटिंग (rutting - पहियों के निशान पड़ना) को कम करते हैं और फुटपाथ के जीवन का विस्तार करते हैं। वे सीमांत मिट्टी (marginal soils) के उपयोग की भी अनुमति देते हैं, जिससे ताजी खदान सामग्री की आवश्यकता कम हो जाती है।
  • स्थिरता और मान्यता: यह परियोजना कचरे को बुनियादी ढांचे (infrastructure) में बदलकर परिपत्र अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों का समर्थन करती है। भारत और एशिया दोनों रिकॉर्ड बुक ने सड़क को इस तरह से प्लास्टिक-आधारित जियोसेल का उपयोग करने वाली पहली सड़क के रूप में मान्यता दी।
  • भविष्य की संभावनाएं: प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने, निर्माण लागत में कटौती करने और सड़क के प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए भारत के राजमार्ग नेटवर्क में जियोसेल को बढ़ाया जा सकता है। शोधकर्ता दीर्घकालिक स्थायित्व (durability) का अध्ययन कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए मानक विकसित कर रहे हैं।

स्रोत

PIB

Finished reading?

Do one recall action now

Practice first while the topic is fresh. Save the key points or use Shorts when you want a quick recap.

1 Start True/False practice 2-min recall check N Save key points Build a revision note S Watch related Shorts Quick visual recap App Open News in Web App Browse related current affairs
Home Current Affairs 📰 Daily News 🎬 Watch Shorts 📊 Economic Survey 2025-26 Subjects 📚 All Subjects ⚖️ Indian Polity 💹 Economy 🌍 Geography 🌿 Environment 📜 History Exam Info 📋 Syllabus 2026 📝 Prelims Syllabus ✍️ Mains Syllabus ✅ Eligibility Resources 📖 Booklist 📊 Exam Pattern 📄 Previous Year Papers ▶️ YouTube Channel
Sign In / Open Web App