पर्यावरण

गिरनार वन्यजीव अभयारण्य: इको-सेंसिटिव जोन पर बहस

गिरनार वन्यजीव अभयारण्य: इको-सेंसिटिव जोन पर बहस

खबरों में क्यों?

गिरनार पहाड़ी (Girnar hill) मंदिरों के भिक्षुओं (monks) के एक समूह ने अप्रैल 2026 में मांग की कि गुजरात में गिरनार वन्यजीव अभयारण्य के आसपास के इको-सेंसिटिव ज़ोन (eco‑sensitive zone - ESZ) को समाप्त कर दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि ईएसजेड (ESZ) प्रतिबंध धार्मिक गतिविधियों में बाधा डालते हैं और सड़कों, बिजली कनेक्शन और बड़े त्योहारों को आयोजित करने की अनुमति देने का आह्वान किया। संरक्षणवादियों (Conservationists) और वन अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ईएसजेड (ESZ) को हटाने से अभयारण्य के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (fragile ecosystem) को नुकसान हो सकता है और मानव-वन्यजीव संघर्ष (human–wildlife conflict) बढ़ सकता है।

गिरनार वन्यजीव अभयारण्य के बारे में

गिरनार वन्यजीव अभयारण्य (Girnar Wildlife Sanctuary) गुजरात के जूनागढ़ जिले (Junagadh district) में स्थित है, और गिरनार पहाड़ियों के आसपास लगभग 179 वर्ग किलोमीटर में फैला है। 2008 में स्थापित, यह एशियाई शेरों (Asiatic lions) के लिए निवास स्थान प्रदान करता है जो मुख्य गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) के बाहर घूमते हैं। यह अभयारण्य गिर से लगभग 50 किलोमीटर दूर है और इसमें माउंट गिरनार (Mount Girnar) पर कई हिंदू और जैन तीर्थ स्थल (pilgrimage sites) शामिल हैं।

वनस्पति और जीव

  • प्रमुख स्तनधारी (Major mammals): अभयारण्य में लगभग 50 एशियाई शेर रहते हैं। अन्य प्रजातियों में तेंदुए (leopards), चित्तीदार हिरण (spotted deer - चीतल), सांभर (sambar), नीलगाय (nilgai), चौसिंघा (chousingha - चार सींग वाला मृग), चिंकारा (chinkara - भारतीय गज़ेल), जंगली सूअर और भारतीय सुनहरे सियार (Indian golden jackals) शामिल हैं।
  • पक्षी जीवन (Birdlife): रैप्टर (raptors), मोर (peafowl) और प्रवासी जलपक्षी (migratory waterfowl) सहित 300 से अधिक पक्षी प्रजातियों को दर्ज किया गया है।
  • वनस्पति: पहाड़ियों पर सागौन (teak), धावदो (dhavdo - Anogeissus latifolia), जामुन (jamun), कड़ाया (kadaya) और बबूल (acacia) प्रजातियों के वर्चस्व वाले शुष्क पर्णपाती जंगलों (dry deciduous forests) का समर्थन है। ये पेड़ गर्म गर्मी के महीनों में छाया और चारा (fodder) प्रदान करते हैं।

इको-सेंसिटिव जोन और भिक्षुओं की मांगें

पर्यावरण मंत्रालय (Ministry of Environment) ने निर्माण को विनियमित करने और गड़बड़ी को सीमित करने के लिए 2016 में अभयारण्य के आसपास एक बफर क्षेत्र (buffer area) को एक पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) के रूप में अधिसूचित किया था। गिरनार संरक्षण समिति (Girnar Sanrakshan Samiti) - भिक्षुओं और पुजारियों की एक समिति - अब चाहती है कि यह सुरक्षा हटा दी जाए। उनके ज्ञापन (memorandum) में 60 मांगें शामिल हैं जैसे कि दत्तात्रेय (Dattatreya) चोटी तक पक्की सड़कें और बिजली की लाइनें बनाना, रात में ठहरने और त्योहारों की अनुमति देना और धार्मिक स्थलों को वन नियमों से छूट (exempting) देना। वे वार्षिक महा शिवरात्रि (Maha Shivratri) मेले की मेजबानी के लिए 200-250 एकड़ जमीन भी मांगते हैं।

संरक्षण संबंधी चिंताएँ

  • वन अधिकारियों का ध्यान है कि संरक्षण प्रयासों के कारण गिरनार पर शेरों की संख्या 1999 में केवल चार से बढ़कर 50 से अधिक हो गई है। नियमों में ढील देने से निवास स्थान (habitat) खराब हो सकता है और शेरों और तीर्थयात्रियों (pilgrims) के बीच मुठभेड़ का खतरा बढ़ सकता है।
  • पर्यावरणविदों (Environmentalists) का इस बात पर जोर है कि सड़कों और बिजली की लाइनों से जंगल विखंडित (fragment) हो सकते हैं, वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है और अवैध चराई (illegal grazing) तथा संसाधनों की निकासी (resource extraction) के द्वार खुल सकते हैं।
  • भारतीय कानून के तहत, ईएसजेड (ESZ) सीमाओं में किसी भी बदलाव के लिए राज्य और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (state and national wildlife boards) दोनों से अनुमोदन की आवश्यकता होती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि पारिस्थितिक प्रभावों (ecological impacts) का पूरी तरह से आकलन किया गया है।

स्रोत

TOI

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