समाचार में क्यों?
केंद्र सरकार ने Great Nicobar Island पर Indian Navy के INS Baaz वायु स्टेशन (air station) के रनवे (runway) का विस्तार नहीं करने का निर्णय लिया है। इसके बजाय, यह Great Nicobar Island विकास परियोजना के तहत छिंगन (Chingen) गांव के पास एक नया नागरिक-सैन्य हवाई अड्डा (civil-military airport) बनाएगी। जून 2026 की शुरुआत में इस घोषणा ने द्वीप की रणनीतिक भूमिका और इसकी नाजुक पारिस्थितिकी (ecology) के बारे में बहस छेड़ दी है。
पृष्ठभूमि
INS Baaz दक्षिणी निकोबार समूह के कैम्पबेल बे (Campbell Bay) में एक नौसैनिक वायु स्टेशन है। इसे 31 जुलाई 2012 को चालू किया गया था और यह भारतीय सशस्त्र बलों का सबसे दक्षिणी हवाई अड्डा बन गया। इस बेस में लगभग 1.37 किलोमीटर (4,500 फीट) का एक छोटा रनवे है और यह समुद्री गश्ती विमानों और मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) का समर्थन करता है। Six Degree Channel और Strait of Malacca के पास इसकी स्थिति भारत को दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग लेन में से एक पर निगरानी रखने की सुविधा देती है। अधिकारियों ने पहले रनवे को लगभग 3 किलोमीटर (10,000 फीट) तक बढ़ाने की योजना बनाई थी ताकि बड़े विमान संचालित हो सकें, लेकिन इंजीनियरों ने पाया कि इलाके और मौजूदा बुनियादी ढांचे ने विस्तार को अव्यावहारिक बना दिया。
नया हवाई अड्डा प्रस्ताव
सरकार अब Galathea Bay में एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा (greenfield airport) बनाएगी। इस परियोजना की लागत लगभग ₹13,000 करोड़ होगी और यह ₹81,000 करोड़ की Great Nicobar Island विकास योजना का हिस्सा होगी। नई सुविधा में एक लंबा रनवे होगा जो वाइड-बॉडी वाणिज्यिक विमानों और सैन्य विमानों को संभालने में सक्षम होगा। इसे पूरा होने में पांच साल लगने की उम्मीद है। हवाई अड्डा नौसेना के नियंत्रण में रहेगा लेकिन यह नागरिक उड़ानों (civilian flights) को भी संभालेगा। अधिकारियों का कहना है कि दोहरे उपयोग (dual-use) वाला हवाई अड्डा Great Nicobar से कनेक्टिविटी में सुधार करेगा और भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देगा। आलोचकों की चेतावनी है कि बड़े बुनियादी ढांचे से वर्षावनों (rainforests) को नुकसान पहुंच सकता है और Shompen तथा Nicobarese आदिवासी समुदायों के लिए व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। पर्यावरण कार्यकर्ता इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि Great Nicobar परियोजना में एक बंदरगाह, टाउनशिप और बिजली संयंत्र शामिल हैं जो दुर्लभ प्रजातियों और प्रवाल भित्तियों (coral reefs) के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं。
रणनीतिक महत्व
- Malacca Strait का प्रवेश द्वार: Great Nicobar, Malacca Strait के मुहाने के करीब स्थित है। एक लंबा रनवे Indian Navy और Air Force की शिपिंग की निगरानी करने और आपात स्थितियों का जवाब देने की क्षमता में सुधार करता है।
- दोहरे उपयोग (Dual-use) वाला बुनियादी ढांचा: एक नागरिक-सैन्य हवाई अड्डा नौसैनिक उपस्थिति बनाए रखते हुए पर्यटन और रसद (logistics) का समर्थन करेगा। यह INS Baaz में भविष्य के भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता को कम कर सकता है।
- विकास और पारिस्थितिकी में संतुलन: एक सुदूर द्वीप पर बुनियादी ढांचे के बारे में निर्णयों में नाजुक पारिस्थितिक तंत्र और स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर विचार करना चाहिए। परियोजना योजनाकारों को राष्ट्रीय सुरक्षा को सतत विकास के साथ जोड़ने की चुनौती का सामना करना पड़ता है।
निष्कर्ष
INS Baaz का विस्तार करने के बजाय एक नया हवाई अड्डा बनाने का कदम व्यावहारिक इंजीनियरिंग बाधाओं और रणनीतिक सोच को दर्शाता है। यदि परियोजना पर्यावरण के प्रति संवेदनशील डिजाइन का उपयोग करती है और स्थानीय समुदायों को शामिल करती है, तो Great Nicobar को कनेक्टिविटी और मजबूत रक्षा स्थिति दोनों मिल सकते हैं। निर्माण आगे बढ़ने के साथ-साथ पारिस्थितिक प्रभावों की निगरानी महत्वपूर्ण होगी。