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हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप: हानले वेधशाला के 25 वर्ष

हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप: हानले वेधशाला के 25 वर्ष

चर्चा में क्यों?

भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (Indian Institute of Astrophysics) ने हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप के लिए एक रजत-जयंती बैठक आयोजित की। वैज्ञानिक 29 से 31 जुलाई 2026 तक बेंगलुरु में मिले। टेलीस्कोप ने 26 सितंबर 2000 को अपनी फर्स्ट-लाइट (first-light) छवि प्राप्त की थी। बैठक में पच्चीस वर्षों के अवलोकन, उपकरणों और शोधकर्ता प्रशिक्षण की समीक्षा की गई।

पृष्ठभूमि

हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप संस्थान की प्रमुख ऑप्टिकल और निकट-अवरक्त (near-infrared) अवलोकन सुविधा है।

पूर्ण शीर्षक पहली बार आने के बाद इसका संक्षिप्त नाम HCT है।

यह टेलीस्कोप लद्दाख में हानले के पास भारतीय खगोलीय वेधशाला (Indian Astronomical Observatory) में स्थित है।

भारतीय ताराभौतिकी संस्थान वेधशाला और टेलीस्कोप दोनों का संचालन करता है।

वेधशाला स्थल सरस्वती पर्वत (Mount Saraswati) पर समुद्र तल से लगभग 4,500 मीटर ऊपर स्थित है।

हानले को क्यों चुना गया?

हानले एक ठंडे, शुष्क और कम आबादी वाले उच्च ऊंचाई वाले रेगिस्तान के भीतर स्थित है।

कम वायुमंडलीय नमी ऑप्टिकल और निकट-अवरक्त विकिरण के संचरण में सुधार करती है।

अंधेरा आसमान संवेदनशील खगोलीय उपकरणों तक पहुंचने वाले अवांछित कृत्रिम प्रकाश को कम करता है।

कई बादल रहित रातें एक लंबी वार्षिक अवलोकन विंडो प्रदान करती हैं।

पतली हवा और कठिन सर्दियां इसके बावजूद इंजीनियरिंग और रखरखाव की मांग की स्थिति पैदा करती हैं।

रैंकिंग सुधार: हानले दुनिया के सबसे ऊंचे खगोलीय स्थलों में से एक है। कोई भी आधिकारिक वर्तमान सूची एचसीटी के लिए सटीक "दसवें-सर्वोच्च" रैंक का समर्थन नहीं करती है।

टेलीस्कोप डिजाइन और मील के पत्थर

एचसीटी में एक प्राथमिक दर्पण है जिसकी चौड़ाई 2.01 मीटर है।

इसके प्रकाशिकी (optics) धुंधले प्रकाश को इकट्ठा करते हैं और इसे विनिमेय (interchangeable) वैज्ञानिक उपकरणों की ओर केंद्रित करते हैं।

टेलीस्कोप ने 26 सितंबर 2000 को फर्स्ट लाइट (first light) प्राप्त की।

फर्स्ट लाइट का मतलब एक नए टेलीस्कोप द्वारा निर्मित पहली सफल खगोलीय छवि है।

यह सुविधा मई 2003 के दौरान नियमित वैज्ञानिक अवलोकनों के लिए उपलब्ध हो गई।

दो मीटर का यह टेलीस्कोप 29 अगस्त 2001 को राष्ट्र को समर्पित किया गया था।

तिथि अंतर: एचसीटी की फर्स्ट लाइट 2000 में हुई, जबकि नियमित वैज्ञानिक पहुंच बाद में शुरू हुई।

दूरस्थ संचालन

एक समर्पित उपग्रह लिंक हानले को बेंगलुरु के पास एक नियंत्रण केंद्र (control centre) से जोड़ता है।

यह केंद्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और शिक्षा केंद्र (Centre for Research and Education in Science and Technology) है।

संपूर्ण संस्थागत शीर्षक के पहली बार आने के बाद इसे CREST कहा जाता है।

खगोलविद पूरी सर्दियों के दौरान उच्च ऊंचाई वाले टेलीस्कोप पर रुके बिना अवलोकनों को दूरस्थ रूप से नियंत्रित कर सकते हैं।

दूरस्थ संचालन पूरे भारत में अनुसंधान टीमों के लिए शेड्यूलिंग, सुरक्षा और पहुंच में भी सुधार करता है।

मुख्य वैज्ञानिक उपकरण

उपकरण मुख्य उपयोग
हिमालयन फेंट ऑब्जेक्ट स्पेक्ट्रोग्राफ कैमरा (Himalayan Faint Object Spectrograph Camera) धुंधले खगोलीय स्रोतों की ऑप्टिकल इमेजिंग और स्पेक्ट्रोस्कोपी
टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च नियर इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर एंड इमेजर निकट-अवरक्त इमेजिंग और वर्णक्रमीय अवलोकन (spectral observations)
हानले एशेल स्पेक्ट्रोग्राफ (Hanle Echelle Spectrograph) तारकीय स्पेक्ट्रा (stellar spectra) और वेग (velocities) का उच्च-रिज़ॉल्यूशन मापन

उनके संक्षिप्त नाम क्रमशः HFOSC, TIRSPEC और HESP हैं।

स्पेक्ट्रोस्कोपी तरंग दैर्ध्य (wavelength) द्वारा प्रकाश को अलग करती है, जो संरचना, तापमान, गति और अन्य भौतिक गुणों को प्रकट करती है।

वैज्ञानिक योगदान

एचसीटी तारों, आकाशगंगाओं, सुपरनोवा, सक्रिय गैलेक्टिक नाभिक (active galactic nuclei) और तेजी से बदलती क्षणिक घटनाओं का निरीक्षण करता है।

इसकी लचीली शेड्यूलिंग उपग्रहों द्वारा गामा-रे बर्स्ट (gamma-ray bursts) का पता लगाने के बाद अनुवर्ती (follow-up) कार्यों का समर्थन करती है।

बार-बार चमक माप (brightness measurements) शोधकर्ताओं को परिवर्तनशील तारों और संभावित एक्सोप्लैनेट पारगमन (exoplanet transits) की जांच करने में भी मदद करते हैं।

ट्रांसिटिंग प्लैनेट्स एंड प्लैनेटेसिमल्स स्मॉल टेलीस्कोप (Transiting Planets and Planetesimals Small Telescope) ने TRAPPIST-1 प्रणाली को अपना नाम दिया।

एचसीटी ने अनुवर्ती अवलोकनों में योगदान दिया लेकिन इसके पहले रिपोर्ट किए गए ग्रह की खोज अकेले नहीं की।

आसपास की सुविधाओं को भ्रमित न करें

एचसीटी अपने दर्पण द्वारा एकत्र किए गए साधारण ऑप्टिकल और निकट-अवरक्त प्रकाश का पता लगाता है।

पास का मेजर एटमॉस्फेरिक चेरेनकोव एक्सपेरिमेंट (Major Atmospheric Cherenkov Experiment) बहुत उच्च ऊर्जा वाली गामा किरणों द्वारा बनाई गई वायुमंडलीय चमक का पता लगाता है।

ये उपकरण हानले क्षेत्र को साझा करते हैं लेकिन विभिन्न तकनीकों और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करते हैं।

निष्कर्ष

एचसीटी की लंबी उम्र दर्शाती है कि स्थान, दूरस्थ इंजीनियरिंग और निरंतर इंस्ट्रूमेंटेशन भारतीय खगोल विज्ञान का कैसे विस्तार कर सकते हैं।

स्रोत

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