रक्षा

K9 Vajra-T होवित्जर: मारक क्षमता, विशेषताएँ और रणनीतिक महत्व

K9 Vajra-T होवित्जर: मारक क्षमता, विशेषताएँ और रणनीतिक महत्व

समाचार में क्यों?

मध्य जून 2026 में रक्षा मीडिया ने बताया कि Indian Army की योजना लगभग 300 अतिरिक्त K9 Vajra‑T स्व-चालित होवित्जर (self-propelled howitzers) प्राप्त करने की है। ₹23,000 crore से अधिक के अनुमानित इस प्रस्तावित ऑर्डर से सेना के बेड़े में लगभग 500 तोपें हो जाएंगी और चीन तथा पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर इसकी लंबी दूरी की मारक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

पृष्ठभूमि

K9 Vajra‑T, दक्षिण कोरियाई K9 Thunder स्व-चालित होवित्जर का भारतीय-विशिष्ट संस्करण (Indian-specific variant) है। रूसी और यूरोपीय प्रणालियों के खिलाफ व्यापक फील्ड परीक्षणों के बाद, Ministry of Defence ने 2015 में K9 प्लेटफॉर्म का चयन किया था। Larsen & Toubro (L&T) ने दक्षिण कोरिया की Hanwha Aerospace के साथ प्रौद्योगिकी-हस्तांतरण (technology-transfer) समझौते पर हस्ताक्षर किए और अपनी हजीरा (Hazira) फैसिलिटी में 50-ton ट्रैक किए गए होवित्जर का उत्पादन शुरू किया। पहली 100 Vajra-T तोपें 2018 और 2021 के बीच वितरित की गई थीं। 2024 में L&T को अन्य 100 तोपों के लिए अनुवर्ती ऑर्डर (follow-on order) मिला और सेना अब बड़े विस्तार पर विचार कर रही है।

विशेषताएं और क्षमताएं

  • कैलिबर और रेंज (Calibre and range): Vajra-T में 155 mm/52-calibre की तोप लगी है जो उच्च-विस्फोटक (high-explosive), स्मोक और सटीक-निर्देशित प्रोजेक्टाइल फायर कर सकती है। इसकी अधिकतम रेंज लगभग 50 km है और यह 15 सेकंड में तीन राउंड या शॉर्ट बर्स्ट (short bursts) के लिए प्रति मिनट छह से आठ राउंड दाग सकती है।
  • फायर कंट्रोल: एक डिजिटल फायर-कंट्रोल सिस्टम तोप को सटीकता से लक्ष्यों को भेदने और एक साथ कई राउंड इम्पैक्ट (multiple rounds-simultaneous impact) मिशन निष्पादित करने की अनुमति देता है, जहां अलग-अलग ट्रैजेक्टरी (trajectories) पर दागे गए कई गोले एक ही समय पर लक्ष्य पर पहुंचते हैं।
  • गतिशीलता (Mobility): इस होवित्जर को एक 1,000-hp MTU MT-881 Ka-500 डीजल इंजन से ऊर्जा मिलती है जो ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन से जुड़ा है। यह सड़कों पर लगभग 67 km/h की गति तक पहुंच सकता है और इसकी परिचालन सीमा 360 km से अधिक है। ट्रैक्ड चेसिस (tracked chassis) ऑफ-रोड गतिशीलता को सक्षम बनाता है और वाहन अपनी जगह पर घूम सकता है।
  • सुरक्षा और चालक दल: 50-ton का स्टील पतवार (steel hull) छोटे हथियारों और शेल स्प्लिंटर्स (shell splinters) के खिलाफ बैलिस्टिक सुरक्षा प्रदान करता है। पांच लोगों का चालक दल तोप को संचालित करता है, जिसमें कमांडर, ड्राइवर, गनर और दो लोडर शामिल हैं। बुर्ज (turret) में ऑटोमैटिक लोडिंग एड्स हैं जो चालक दल की थकान को कम करते हैं।
  • Make in India: पतवार (hull) और प्रमुख सब-सिस्टम (major sub-systems) सहित आधे से अधिक घटकों (components) का निर्माण भारत में किया जाता है। यह कार्यक्रम रक्षा में आत्मनिर्भरता (self-reliance) का समर्थन करता है और भारतीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए अवसर प्रदान करता है।

रणनीतिक महत्व

  • उच्च-ऊंचाई की तैयारी (High-altitude readiness): Indian Army ने पूर्वी लद्दाख में Vajra-T तोपें तैनात की हैं, जो दर्शाता है कि यह प्लेटफॉर्म रेगिस्तान और मैदानी इलाकों के साथ-साथ उच्च ऊंचाई वाले इलाकों में भी काम कर सकता है।
  • डिटरेंस (Deterrence): आधुनिक स्व-चालित होवित्जर का विस्तारित बेड़ा भारत की निवारक क्षमता (deterrence) को बढ़ाता है और बख्तरबंद फॉर्मेशन्स के लिए त्वरित फायर सपोर्ट प्रदान करता है।
  • स्वदेशीकरण (Indigenisation): स्वदेशी उत्पादन और भविष्य के अपग्रेड आयात पर निर्भरता को कम करने तथा जटिल हथियार प्रणालियों में घरेलू औद्योगिक क्षमता विकसित करने में मदद करते हैं।

निष्कर्ष

K9 Vajra‑T लंबी रेंज, फायर की उच्च दर (high rate of fire) और अच्छी गतिशीलता का संयोजन है। प्रौद्योगिकी साझेदारी के तहत विकसित और भारत में निर्मित, यह सेवा में अपनी उपयोगिता साबित कर चुका है। यदि नई खरीद आगे बढ़ती है, तो आर्टिलरी शाखा को विभिन्न भूभागों (terrain) में तेजी से प्रतिक्रिया करने के लिए एक शक्तिशाली क्षमता प्राप्त होगी, साथ ही रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा।

स्रोत: TW

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