चर्चा में क्यों?
आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) और तेलंगाना (Telangana) की एक पारंपरिक कला, कलमकारी (Kalamkari) ने नए सिरे से रुचि प्राप्त की है क्योंकि विरासत एजेंसियां (heritage agencies) भौगोलिक संकेत टैग (Geographical Indication tags) के साथ शिल्प (crafts) को बढ़ावा देती हैं। कला रूप को इसके प्राकृतिक रंगों (natural dyes) और कहानी कहने के रूपांकनों (storytelling motifs) के लिए मनाया जाता है। इसकी दो अलग-अलग शैलियों (styles) को समझने से उपभोक्ताओं (consumers) को प्रामाणिक टुकड़ों (authentic pieces) की सराहना करने और कारीगरों (artisans) का समर्थन करने में मदद मिलती है।
पृष्ठभूमि
कलमकारी (kalamkari) शब्द फारसी शब्दों कलम (kalam) (पेन) और कारी (kari) (काम) से आया है, जिसका अर्थ है "पेन से चित्र बनाना" (drawing with a pen)। कला की उत्पत्ति 3,000 साल पहले श्रीकालहस्ती (Srikalahasti) और मछलीपट्टनम (Machilipatnam) के मंदिर कस्बों में मंदिर के भित्तिचित्रों (temple murals) और पवित्र स्क्रॉल (sacred scrolls) के रूप में हुई थी। सूती कपड़े (cotton cloth) पर रामायण और महाभारत (Ramayana and Mahabharata) जैसे महाकाव्यों के दृश्यों को चित्रित करने के लिए कलाकारों ने पौधों, जड़ों और खनिजों से बने प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया। मुगल काल (Mughal era) के दौरान भारत के कोरोमंडल तट (Coromandel Coast) से निर्यात कला (export art) के रूप में शिल्प (craft) का विकास हुआ।
दो मुख्य शैलियाँ
- श्रीकालहस्ती शैली (Srikalahasti style): यह शैली प्राकृतिक रंगों (natural dyes) में डूबा हुआ बांस या खजूर के पेड़ (date-palm) के पेन का उपयोग करके पूरी तरह से हाथ से खींची (hand-drawn) गई है। कलाकार हिंदू पौराणिक कथाओं (Hindu mythology) के देवी-देवताओं और नायकों की कहानियां (stories) चित्रित करते हैं। मंदिर के पर्दे (Temple hangings), कथा स्क्रॉल (narrative scrolls) और औपचारिक वस्त्र (ceremonial textiles) आम उत्पाद हैं। प्रक्रिया धीमी और अत्यधिक विस्तृत (highly detailed) है; एक टुकड़े (piece) में 20 से अधिक चरणों की आवश्यकता हो सकती है, जिसमें रंगों को ठीक करने के लिए कपड़े का गाय के गोबर (cow dung) और दूध (milk) से उपचार करना शामिल है।
- मछलीपट्टनम (पेड़ाना) शैली (Machilipatnam (Pedana) style): इसे ब्लॉक-मुद्रित कलमकारी (block-printed kalamkari) भी कहा जाता है, यह शैली कपड़े पर डिज़ाइन (designs) को मोहर लगाने के लिए हाथ से नक्काशीदार लकड़ी के ब्लॉक (hand-carved wooden blocks) का उपयोग करती है। रूपांकनों (Motifs) में फ़ारसी पुष्प पैटर्न (Persian floral patterns), बेलें (vines), पक्षी और इस्लामी स्थापत्य तत्व (Islamic architectural elements) शामिल हैं। डिजाइन को कपड़े के साथ बार-बार मुद्रित (printed) किया जाता है, जिससे यह साड़ियों, दुपट्टों, बेड कवर और पर्दों के लिए उपयुक्त हो जाता है। मुद्रण (printing) और मोर्डेंटिंग चरणों (mordanting stages) के बीच इंडिगो (indigo), अनार के छिलके (pomegranate rind) और लोहे की जंग (iron rust) से प्राप्त प्राकृतिक रंग (Natural dyes) लगाए जाते हैं।
सुरक्षा और मान्यता
- भौगोलिक संकेत टैग (Geographical Indication tags): श्रीकालहस्ती (Srikalahasti) और मछलीपट्टनम (Machilipatnam) कलमकारी दोनों भारत की भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री (Geographical Indications registry) के तहत सुरक्षित हैं। श्रीकालहस्ती को 2005 में अपना जीआई टैग (GI tag) मिला, और मछलीपट्टनम ने 2008 में इसका अनुसरण किया। जीआई टैग प्रमाणित करता है कि केवल निर्दिष्ट क्षेत्र (designated area) के कारीगर ही प्रलेखित प्रक्रियाओं (documented processes) का उपयोग करके अपने उत्पादों (products) का उस नाम से विपणन (market) कर सकते हैं।
- प्राकृतिक रंग और स्थिरता (Natural dyes and sustainability): प्रामाणिक कलमकारी वनस्पति रंगों (vegetable dyes) का उपयोग करती है और सिंथेटिक रसायनों (synthetic chemicals) से बचाती है। मैडर रूट (madder root), इंडिगो और अनार (pomegranate) से पैदा होने वाले रंग मिट्टी के लाल, नीले, पीले और हरे (earthy reds, blues, yellows and greens) होते हैं। प्रत्येक रंग अलग-अलग लगाया जाता है, और प्रत्येक चरण के बाद कपड़े को धोया जाता है।
- रूपांकन और प्रतीकवाद (Motifs and symbolism): ट्री ऑफ़ लाइफ (Tree of Life) एक लोकप्रिय रूपांकन है जो स्वर्ग और पृथ्वी (heaven and earth) के बीच संबंध का प्रतीक है। कलमकारी डिज़ाइनों (kalamkari designs) में मोर, बाघ, हिरण और दिव्य आकृतियाँ (divine figures) अक्सर दिखाई देती हैं।
निष्कर्ष
कलमकारी (Kalamkari) कला, संस्कृति और पारिस्थितिकी (art, culture and ecology) के तालमेल को दर्शाती है। इसकी दो शैलियाँ दिखाती हैं कि प्रामाणिकता (authenticity) बनाए रखते हुए एक एकल शिल्प हाथ से तैयार किए गए भक्ति पैनल (devotional panels) से लेकर ब्लॉक-मुद्रित वस्त्रों (block-printed textiles) तक कैसे विकसित हो सकता है। भौगोलिक संकेत टैग (Geographical Indication tags) कारीगरों की रक्षा करते हैं और खरीदारों को वास्तविक, टिकाऊ उत्पादों (sustainable products) का आश्वासन देते हैं। कलमकारी का समर्थन भारत की सबसे पुरानी कहानी कहने की परंपराओं (storytelling traditions) में से एक के अस्तित्व को प्रोत्साहित करता है।