चर्चा में क्यों?
असम-मेघालय सीमा पर स्थानीय समुदाय कुलसी नदी (Kulsi River) पर प्रस्तावित 55 मेगावाट की जलविद्युत-सह-सिंचाई (hydropower‑cum‑irrigation) परियोजना का विरोध कर रहे हैं। दशकों पहले परिकल्पित इस परियोजना ने संभावित विस्थापन, पारिस्थितिक क्षति और लुप्तप्राय रिवर डॉल्फ़िन (river dolphins) के लिए खतरे के कारण विरोध आकर्षित किया है。
पृष्ठभूमि
कुलसी ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी है। यह मेघालय की पश्चिम खासी पहाड़ियों से निकलती है और उत्तर की ओर असम में बहती है। अपने स्वच्छ पानी और दुर्लभ गंगा नदी डॉल्फ़िन (Gangetic river dolphin) के आवास के रूप में जानी जाने वाली यह नदी स्थानीय मत्स्य पालन और कृषि का समर्थन करती है।
जलविद्युत प्रस्ताव पहली बार 1990 के दशक में असम और मेघालय के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में लाया गया था। उकियाम (Ukiam) गांव के पास नियोजित बांध स्थल सूखे मौसम के लिए मानसून के पानी का भंडारण करके सिंचाई की जरूरतों को भी पूरा करेगा।
निवासियों द्वारा उठाई गई चिंताएं
- समुदायों का विस्थापन: यह बांध निचले इलाकों को जलमग्न कर देगा और राभा (Rabha), गारो (Garo) और खासी (Khasi) समुदायों द्वारा बसाई गई लगभग दो दर्जन गांवों को डुबा सकता है।
- पारिस्थितिक प्रभाव: यह नदी लगभग बीस लुप्तप्राय गंगा नदी डॉल्फ़िन और विभिन्न मछली प्रजातियों का समर्थन करती है। एक बड़ा जलाशय आवास और पानी की गुणवत्ता को बदल सकता है, जिससे जैव विविधता (biodiversity) प्रभावित हो सकती है।
- आर्द्रभूमि (wetlands) पर प्रभाव: कार्यकर्ताओं को डर है कि परियोजना से दर्शनीय चांडूबी झील (Chandubi Lake) सहित आस-पास की आर्द्रभूमि को नुकसान पहुंचेगा, जो एक पर्यटन स्थल और पक्षी आवास दोनों है।
- परामर्श का अभाव: कई स्थानीय लोगों का तर्क है कि जन सुनवाई (public hearings) अपर्याप्त रही है और परियोजना योजनाकारों ने समुदाय की चिंताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया है।
वर्तमान स्थिति
2025 में विरोध तेज हो गया जब छात्र संघों और नागरिक समाज समूहों के एक गठबंधन ने रैलियां आयोजित कीं, जिससे असम के मुख्यमंत्री को यह कहने के लिए प्रेरित किया गया कि परियोजना जनता की सहमति के बिना आगे नहीं बढ़ेगी। अप्रैल 2026 तक परियोजना रुकी हुई है, और आगे की व्यवहार्यता अध्ययन और परामर्श अपेक्षित हैं।
स्रोत: ETV भारत