खबरों में क्यों?
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने हाल ही में लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना (Lakhwar multipurpose project) की प्रगति की समीक्षा की और कार्यान्वयन एजेंसी (executing agency) को समयसीमा पर टिके रहने का आग्रह किया। उत्तराखंड में निर्माणाधीन 300 मेगावाट का यह बांध छह राज्यों को विनियमित जल आपूर्ति (regulated water supply) प्रदान करने और नवीकरणीय ऊर्जा (renewable energy) उत्पन्न करने की उम्मीद है। यह समीक्षा यमुना बेसिन में जल बंटवारे के लिए परियोजना के महत्व को रेखांकित करती है।
पृष्ठभूमि
देहरादून जिले के लोहारी गांव (Lohari village) के पास यमुना नदी पर लखवाड़ बांध (Lakhwar dam) बनाया जा रहा है। इस परियोजना की कल्पना 1970 के दशक में की गई थी लेकिन यह दशकों तक रुकी रही। 2018 में केंद्र और उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश की सरकारों ने इसे पुनर्जीवित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड द्वारा विकसित, यह बांध लगभग 204 मीटर ऊंचा होगा, जिससे लगभग 330 मिलियन क्यूबिक मीटर की लाइव स्टोरेज क्षमता वाला जलाशय (reservoir) बनेगा।
प्रमुख विशेषताऐं
- विद्युत उत्पादन: इस परियोजना में 300-मेगावाट का पावर स्टेशन (प्रत्येक 100 मेगावाट की तीन इकाइयां) होगा जो प्रति वर्ष लगभग 572 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करने में सक्षम होगा।
- जल आपूर्ति: इसका जलाशय मानसून के दौरान पानी जमा करेगा और साझेदार राज्यों को लगभग 78.8 मिलियन क्यूबिक मीटर आपूर्ति करने के लिए शुष्क मौसम (dry season) के दौरान इसे छोड़ेगा।
- सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण: विनियमित प्रवाह लगभग 33,780 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई करेगा और नीचे की ओर बाढ़ को नियंत्रित करने (moderate floods) में मदद करेगा।
- लागत साझाकरण (Cost sharing): परियोजना से लाभान्वित होने वाले राज्य निर्माण लागत और पानी के अधिकारों को साझा करते हैं, जो यमुना बेसिन के प्रबंधन में सहकारी संघवाद (cooperative federalism) को दर्शाता है।
महत्व
- जलविद्युत को बढ़ावा (Hydropower boost): परियोजना से उत्पन्न नवीकरणीय बिजली भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान देगी और जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) पर निर्भरता कम करेगी।
- जल सुरक्षा: मानसून के पानी का भंडारण कम पानी वाले महीनों के दौरान दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में पानी की कमी को कम करेगा और शहरी और कृषि मांग का समर्थन करेगा।
- क्षेत्रीय सहयोग: यह परियोजना नदी बेसिन प्रबंधन पर अंतर-राज्यीय सहयोग का उदाहरण देती है, जो भविष्य की जल-बंटवारा पहलों (water‑sharing initiatives) के लिए एक मिसाल कायम करती है।
स्रोत: NIE