Defence

MH-60R सीहॉक: अमेरिका ने भारत को और हेलीकॉप्टर सौंपे

MH-60R सीहॉक: अमेरिका ने भारत को और हेलीकॉप्टर सौंपे
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खबरों में क्यों?

संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत को एक और MH-60R सीहॉक (MH-60R Seahawk) की डिलीवरी की पुष्टि की। यह हेलीकॉप्टर कोच्चि में भारतीय नौसेना तक पहुंचा। उसी सप्ताह के दौरान दो और विमान आने की उम्मीद थी। यह डिलीवरी भारत के 24 हेलीकॉप्टरों के ऑर्डर को पूरा होने के करीब ले जाती है।

पृष्ठभूमि

समुद्र के नीचे छिपा रहने वाला एक पनडुब्बी जहाजों के लिए खतरा हो सकता है।

इसलिए युद्धपोतों (Warships) को ऐसे सेंसर की आवश्यकता होती है जो पानी के नीचे खोज कर सकें।

जहाज पर ले जाया जाने वाला (shipborne) हेलीकॉप्टर अपने मूल जहाज (parent ship) की तुलना में बहुत बड़े क्षेत्र को कवर कर सकता है।

यह मूल जहाज से बहुत दूर सेंसर और हथियार ले जा सकता है; MH-60R सीहॉक को इसी नौसैनिक भूमिका के लिए डिज़ाइन किया गया था।

MH-60R सीहॉक क्या है?

MH-60R एक ट्विन-इंजन (twin-engine), सभी मौसम (all-weather) में काम करने वाला नौसैनिक हेलीकॉप्टर है जो लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) कंपनी सिकोरस्की (Sikorsky) द्वारा निर्मित है।

लॉकहीड मार्टिन महत्वपूर्ण मिशन सिस्टम (mission systems) की भी आपूर्ति करता है; यह विमान व्यापक H-60 हेलीकॉप्टर परिवार (H-60 helicopter family) से संबंधित है।

यह ब्लैक हॉक (Black Hawk) डिजाइन का एक समुद्री विकास है।

नौसैनिक उपकरण (Naval equipment) इसे जहाजों और तटीय हवाई स्टेशनों (coastal air stations) से संचालित करने की अनुमति देते हैं।

संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना इसका उपयोग प्राथमिक पनडुब्बी (submarine) और सतह युद्ध (surface warfare) हेलीकॉप्टर के रूप में करती है।

मॉडल नाम का क्या अर्थ है?

"MH" अमेरिकी पदनाम प्रणाली (American designation system) में बहु-मिशन (multi-mission) हेलीकॉप्टर को दर्शाता है; संख्या 60 इसे H-60 परिवार से जोड़ती है।

अक्षर R इस मॉडल की पहचान करता है; "रोमियो" (Romeo) R के लिए उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization) का ध्वन्यात्मक शब्द (phonetic word) है।

कोई आविष्कारित विस्तार नहीं (No invented expansion): "रोमियो" R के लिए एक ध्वन्यात्मक शब्द (phonetic word) है; यह कोई संक्षिप्त नाम (acronym) नहीं है।

"सीहॉक" (Seahawk) वह नाम है जिसका उपयोग समुद्री H-60 परिवार के लिए किया जाता है।

भारत ने हेलीकॉप्टर कैसे प्राप्त किए?

  1. भारत ने आधुनिक शिपबोर्न (shipborne) हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता की पहचान की और फरवरी 2020 में एक अमेरिकी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
  2. इस समझौते में संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेशी सैन्य बिक्री मार्ग (Foreign Military Sales route) के माध्यम से 24 विमान शामिल थे, जिसे संक्षेप में FMS कहा जाता है।
  3. भारतीय चालक दल (crew) के प्रशिक्षण के लिए 2021 के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका में पहले तीन सौंपे गए थे।
  4. पहला स्क्वाड्रन (squadron) मार्च 2024 में कोच्चि में आया; दूसरा दिसंबर 2025 में गोवा में आया।
  5. नवीनतम विमान जुलाई 2026 के दौरान कोच्चि पहुंचा।

विदेशी सैन्य बिक्री (Foreign Military Sales) एक सरकार से सरकार (government-to-government) के बीच अमेरिकी रक्षा हस्तांतरण कार्यक्रम (defence transfer programme) है।

अमेरिकी सरकार बिक्री का प्रबंधन करती है जबकि कंपनियाँ उपकरण और सहायता प्रदान करती हैं।

कौन से भारतीय स्क्वाड्रन प्रकार का संचालन करते हैं?

भारतीय नौसेना वायु स्क्वाड्रन 334 (Indian Naval Air Squadron 334) पहला भारतीय MH-60R स्क्वाड्रन था।

नौसेना ने 6 मार्च 2024 को INAS 334, जिसे "सीहॉक्स" (Seahawks) कहा जाता है, को कमीशन किया।

यह कोच्चि में भारतीय नौसेना जहाज गरुड़ (Indian Naval Ship Garuda) पर आधारित है; इंडियन नेवल शिप (Indian Naval Ship) को संक्षेप में INS कहा जाता है।

INAS 335, जिसे "ओस्प्रे" (Ospreys) कहा जाता है, दूसरा स्क्वाड्रन बना।

नौसेना ने इसे 17 दिसंबर 2025 को आईएनएस हंसा (INS Hansa), गोवा में कमीशन किया।

दोनों स्थान भारत के पश्चिमी समुद्र तट (western seaboard) पर संचालन का समर्थन करते हैं।

नवीनतम घोषणा तक कितने आ चुके थे?

संयुक्त राज्य अमेरिका के दूतावास ने पिछले सप्ताह कोच्चि में एक डिलीवरी की पुष्टि की।

इसने यह भी कहा कि उसी सप्ताह के दौरान दो और विमान पहुंचेंगे।

दूतावास ने नवीनतम विमान के लिए कोई क्रमसूचक संख्या (ordinal number) नहीं दी; प्रेस रिपोर्टों ने अलग-अलग रनिंग डिलीवरी काउंट का इस्तेमाल किया।

प्रशिक्षण हैंडओवर और भारतीय आगमन को अलग तरह से गिना जाने पर मतभेद (Differences) उत्पन्न हो सकते हैं।

विश्वसनीय निष्कर्ष (reliable conclusion) यह है कि 24 विमानों का ऑर्डर पूरा होने वाला था।

गिनती में सावधानी (Count caution): आधिकारिक शब्दावली (official wording) का उपयोग करें: एक और आ गया, दो आने वाले हैं (imminent), और कुल ऑर्डर 24 बना हुआ है।

पनडुब्बी रोधी युद्ध (anti-submarine warfare) क्या है?

एंटी-सबमरीन वारफेयर (Anti-Submarine Warfare) को संक्षेप में ASW कहा जाता है; इसमें शत्रुतापूर्ण पनडुब्बियों को खोजना, ट्रैक करना, रोकना या उन पर हमला करना शामिल है।

समुद्र का पानी इस काम को मुश्किल बना देता है क्योंकि पनडुब्बियां सतह के नीचे छिपी रहती हैं।

MH-60R कई प्रणालियां (systems) वहन करता है जो खोज के दौरान एक साथ काम करती हैं।

यह पनडुब्बी की खोज कैसे करता है?

  1. हेलीकॉप्टर आगे उड़ता है जबकि इसका चालक दल (crew) खुफिया (intelligence) जानकारी और अपेक्षित पनडुब्बी स्थान का अध्ययन करता है।
  2. सोनोबुय (Sonobuoys) को चयनित जल क्षेत्रों में गिराया जा सकता है।
  3. ये तैरते सेंसर (floating sensors) पानी के नीचे की आवाज को सुनते हैं।
  4. मंडराते (hovering) हेलीकॉप्टर से सीधे डिपिंग सोनार (dipping sonar) को नीचे उतारा जा सकता है।
  5. मिशन प्रणाली ध्वनिक जानकारी (acoustic information) को अन्य सेंसर डेटा के साथ जोड़ती है।
  6. फिर चालक दल संभावित संपर्क (possible contact) को वर्गीकृत और ट्रैक करता है।
  7. उचित प्राधिकरण (proper authorisation) के बाद हल्का टॉरपीडो (lightweight torpedo) लॉन्च किया जा सकता है।

सोनार पानी के नीचे की वस्तुओं का पता लगाने के लिए ध्वनि का उपयोग करता है; सोनोबुय कई बिंदुओं पर खोज फैलाते हैं।

डिपिंग सोनार हेलीकॉप्टर को एक चुने हुए क्षेत्र की अधिक बारीकी से जांच करने देता है।

यह सतह के खतरों (surface threats) को कैसे खोजता है?

एंटी-सरफेस वारफेयर (Anti-Surface Warfare) को संक्षेप में ASuW कहा जाता है; यह शत्रुतापूर्ण जहाजों, नौकाओं और अन्य सतह लक्ष्यों (surface targets) से संबंधित है।

एक मल्टी-मोड रडार (multi-mode radar) एक बड़े क्षेत्र की खोज करता है और सतह संपर्कों (surface contacts) को ट्रैक करता है।

एक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (electro-optical) और इन्फ्रारेड (infrared) सेंसर दृश्य (visual) और हीट इमेजरी (heat imagery) प्रदान करता है; संयुक्त शब्द को संक्षेप में EO/IR कहा जाता है।

इलेक्ट्रॉनिक सहायता उपकरण (Electronic support equipment) विद्युत चुम्बकीय उत्सर्जन (electromagnetic emissions) की पहचान करता है; सुरक्षित डेटा लिंक (secure data links) जहाजों और विमानों के साथ सामरिक तस्वीर (tactical picture) साझा करते हैं.

प्लेटफ़ॉर्म कौन से हथियार ले जा सकता है?

  • मार्क 54 टॉरपीडो (Mark 54 torpedoes) पनडुब्बियों को निशाना बना सकते हैं, जबकि एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलें (AGM-114 Hellfire missiles) उपयुक्त सतह खतरों को लक्षित करती हैं।
  • रॉकेट (Rockets) चयनित सतह मिशनों (selected surface missions) का समर्थन कर सकते हैं।
  • चालक दल द्वारा संचालित बंदूकें (Crew-served guns) निकट-दूरी की सुरक्षा (close-range protection) और आग समर्थन (fire support) प्रदान कर सकती हैं।

AGM-114 एक हथियार का पदनाम (weapon designation) है, कोई ऐसा संक्षिप्त नाम (abbreviation) नहीं जिसके लिए वाक्यांश विस्तार (phrase expansion) की आवश्यकता हो।

सटीक भारतीय हथियार ले जाने की क्षमता कॉन्फ़िगरेशन (configuration), मिशन और स्वीकृत एकीकरण (approved integration) पर निर्भर करती है।

सेंसर अक्सर हथियारों की तरह ही मायने रखते हैं क्योंकि एक अदृश्य लक्ष्य (unseen target) को निशाना नहीं बनाया जा सकता है।

यह अन्य कौन से मिशन (missions) कर सकता है?

  • निगरानी (Surveillance): सेंसर समुद्री गतिविधि (maritime activity) की एक विस्तृत तस्वीर बना सकते हैं।
  • खोज और बचाव (Search and rescue): चालक दल खतरे में पड़े लोगों का पता लगा सकते हैं और उन्हें वापस ला सकते हैं।
  • चिकित्सा निकासी (Medical evacuation): मरीजों को जहाजों या दूरदराज के स्थानों से ले जाया जा सकता है।
  • रसद (Logistics): हेलीकॉप्टर कर्मियों और तत्काल आवश्यक सामग्री (urgent stores) ले जा सकता है।
  • ऊर्ध्वाधर पुनःपूर्ति (Vertical replenishment): डॉकिंग (docking) के बिना जहाजों के बीच लोड (Loads) को स्थानांतरित किया जा सकता है।
  • विशेष अभियान (Special operations): प्रशिक्षित कर्मियों को अंदर डाला या निकाला (inserted or recovered) जा सकता है।
  • कमांड समर्थन (Command support): जटिल मिशनों (complex missions) के दौरान डेटा लिंक इकाइयों को जोड़ सकते हैं।

यह मिशन रेंज (mission range) इसके पदनाम (designation) के "मल्टी-मिशन" (multi-mission) हिस्से की व्याख्या करती है।

इसकी बुनियादी विशेषताएं (basic characteristics) क्या हैं?

  • हेलीकॉप्टर में दो जनरल इलेक्ट्रिक T700 टर्बोशाफ्ट इंजन (General Electric T700 turboshaft engines) हैं।
  • इसकी प्रकाशित कुल लंबाई लगभग 19.8 मीटर है।
  • इसकी ऊंचाई लगभग 5.2 मीटर है।
  • इसका अधिकतम सकल वजन (maximum gross weight) लगभग 10.7 टन है।
  • एक मानक यूनाइटेड स्टेट्स नेवी क्रू (United States Navy crew) में तीन लोग होते हैं।

मिशन उपकरण (Mission equipment), मौसम और ईंधन प्रदर्शन (performance) को प्रभावित करते हैं; इसलिए रेंज (range) और पेलोड (payload) के आंकड़ों को परिचालन संदर्भ (operating context) की आवश्यकता होती है।

यह सामान्य ब्लैक हॉक (Black Hawk) से कैसे अलग है?

ब्लैक हॉक (Black Hawk) परिवार को मुख्य रूप से भूमि संचालन (land operations) के लिए विकसित किया गया था; MH-60R अपनी H-60 डिजाइन नींव (design foundation) साझा करता है।

हालांकि, यह विशेष नौसैनिक सेंसर (specialised naval sensors), सॉफ्टवेयर (software) और हथियारों (weapons) को वहन करता है।

इसमें जहाजों पर रख-रखाव (shipboard handling) और कठोर समुद्री परिस्थितियों (harsh maritime conditions) के लिए आवश्यक विशेषताएं भी शामिल हैं।

इसे केवल ट्रांसपोर्ट ब्लैक हॉक (transport Black Hawk) कहना इसके मुख्य नौसैनिक उद्देश्य (main naval purpose) को नजरअंदाज करना होगा।

सस्टेनमेंट सपोर्ट (sustainment support) क्या है?

एक विमान खरीदना दीर्घकालिक संचालन (long-term operation) का केवल पहला हिस्सा है।

बेड़े को स्पेयर पार्ट्स (spare parts), मरम्मत (repairs), प्रशिक्षण, तकनीकी प्रकाशनों (technical publications) और आपूर्ति समर्थन (supply support) की आवश्यकता होती है।

28 नवंबर 2025 को, भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ पांच वर्षीय सस्टेनमेंट व्यवस्था (sustainment arrangements) पर हस्ताक्षर किए, जिसकी कीमत लगभग ₹7,995 करोड़ बताई गई है।

यह राशि बेड़े के लिए समर्थन (support for the fleet) से संबंधित है, न कि 24 हेलीकॉप्टरों के नए ऑर्डर से।

प्रारंभिक परीक्षा भेद (Prelims distinction): फरवरी 2020 के समझौते ने 24 विमानों की खरीद की; नवंबर 2025 की व्यवस्थाएं उनके संचालन (operation) का समर्थन करती हैं।

भारत के लिए विमान क्यों मायने रखता है?

  • यह जहाजों से दूर पनडुब्बियों का पता लगाने की नौसेना की क्षमता (ability to detect submarines) को मजबूत करता है।
  • यह कैरियर समूहों (carrier groups) और अन्य महत्वपूर्ण नौसैनिक संरचनाओं (naval formations) की रक्षा करता है।
  • यह पुराने हो रहे सी किंग (Sea King) हेलीकॉप्टरों द्वारा बनाए गए क्षमता अंतराल (capability gaps) को दूर करने में मदद करता है।
  • यह उपयुक्त भारतीय युद्धपोतों (warships) और तटीय ठिकानों (shore bases) से काम कर सकता है।
  • इसके डेटा सिस्टम अन्य नौसैनिक प्लेटफार्मों के साथ सहयोग में सुधार करते हैं।
  • इसकी द्वितीयक भूमिकाएं बचाव (rescue), रसद (logistics) और चिकित्सा आपात स्थिति (medical emergencies) का समर्थन करती हैं।

हिंद महासागर (Indian Ocean) में प्रमुख व्यापार और ऊर्जा मार्ग (energy routes) हैं; इसलिए बेहतर हवाई निगरानी (airborne surveillance) रक्षा और समुद्री स्थिरता (maritime stability) का समर्थन करती है।

निष्कर्ष

नवीनतम डिलीवरी भारत के 24-विमान कार्यक्रम को पूरा होने के करीब लाती है; प्रशिक्षण, रखरखाव और जहाज एकीकरण (ship integration) परिचालन मूल्य (operational value) निर्धारित करेंगे।

स्रोत

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