खबरों में क्यों?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (Union Ministry of Health and Family Welfare) ने 2022-23 के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (National Health Accounts - NHA) अनुमान जारी किए। यह रिपोर्ट ट्रैक करती है कि देश स्वास्थ्य सेवा पर कितना खर्च करता है और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के सापेक्ष सरकारी व्यय में लगातार वृद्धि तथा परिवारों द्वारा आउट-ऑफ-पॉकेट (out-of-pocket) खर्च में गिरावट को दर्शाती है।
पृष्ठभूमि
NHA स्वास्थ्य के लिए समर्पित संसाधनों को मापने के लिए विश्व स्तर पर स्वीकृत ढांचा है। भारत की पहली NHA रिपोर्ट 2017-18 में 2013-14 तक के पूर्वव्यापी अनुमानों (retrospective estimates) के साथ प्रकाशित की गई थी। इन खातों में केंद्र और राज्य सरकारों, परिवारों, बीमा प्रदाताओं (insurance providers) और दाताओं (donors) द्वारा किए गए खर्च को शामिल किया गया है। नियमित प्रकाशन नीति निर्माताओं (policymakers) को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (universal health coverage) की दिशा में प्रगति का मूल्यांकन करने और बजट प्राथमिकताओं को समायोजित करने में मदद करता है।
2022-23 अनुमानों के मुख्य निष्कर्ष
- बढ़ता सार्वजनिक निवेश (Rising public investment): सरकारी स्वास्थ्य व्यय 2022-23 में GDP के लगभग 1.43 प्रतिशत तक बढ़ गया, जो 2013-14 में 1.15 प्रतिशत था। नई GDP श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) का उपयोग करते हुए, यह अनुपात 1.48 प्रतिशत है।
- कुल व्यय का हिस्सा: पिछले एक दशक में कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकार की हिस्सेदारी 28.6 प्रतिशत से बढ़कर 43.7 प्रतिशत हो गई है, जो स्वास्थ्य सेवाओं के अधिक सार्वजनिक वित्तपोषण (public financing) को दर्शाता है।
- प्रति व्यक्ति खर्च (Per-capita spending): प्रति व्यक्ति सरकारी स्वास्थ्य व्यय 2013-14 में ₹1,042 से बढ़कर 2022-23 में लगभग ₹2,786 हो गया, जो लगभग 2.7 गुना वृद्धि है। यह इंगित करता है कि प्रत्येक नागरिक की स्वास्थ्य सेवा के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च में कमी: स्वास्थ्य खर्च में परिवारों की हिस्सेदारी गिरकर 39.4 प्रतिशत हो गई क्योंकि सरकारी कार्यक्रमों ने लागत का एक बड़ा हिस्सा कवर किया। COVID-19 महामारी के दौरान, उपचार और टीकाकरण के लिए 2021-22 में सार्वजनिक खर्च बढ़कर GDP का 1.84 प्रतिशत हो गया, जिससे व्यक्तिगत खर्च अस्थायी रूप से कम हो गया।
- सरकारी बजट में स्वास्थ्य: कुल सरकारी व्यय में स्वास्थ्य की हिस्सेदारी 2013-14 के 3.78 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 4.89 प्रतिशत हो गई, जो इस क्षेत्र के लिए अधिक प्राथमिकता को दर्शाता है।
निहितार्थ (Implications)
- सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की ओर बढ़ना (Moving toward universal health coverage): बढ़ा हुआ सार्वजनिक वित्तपोषण विनाशकारी स्वास्थ्य खर्च (catastrophic health spending) को कम करने में मदद करता है और देश को सभी के लिए सस्ती स्वास्थ्य सेवा के लक्ष्य के करीब लाता है।
- प्राथमिक देखभाल पर ध्यान: उच्च बजट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat) जैसी बीमा योजनाओं और टीकाकरण कार्यक्रमों (immunisation programmes) के विस्तार को सक्षम बनाता है।
- दक्षता की आवश्यकता: जैसे-जैसे खर्च बढ़ता है, सेवाओं की गुणवत्ता, दवाओं की समय पर खरीद और प्रभावी निगरानी पर ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि धन बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में तब्दील हो।
निष्कर्ष
नवीनतम NHA आंकड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय को बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं। निरंतर निवेश, सेवा वितरण में सुधार और वित्तीय जोखिम संरक्षण (financial risk protection) के साथ मिलकर, बीमारी के बोझ को कम कर सकता है और नागरिकों की भलाई में सुधार कर सकता है।