चर्चा में क्यों?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highways Authority of India - NHAI) और राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (National Remote Sensing Centre - NRSC) ने संयुक्त रूप से एक राष्ट्रीय राजमार्ग ग्रीन कवर इंडेक्स (National Highways Green Cover Index - NH‑GCI) लॉन्च किया है। सूचकांक (index) पूरे भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों (national highways) के किनारे वनस्पति (vegetation) की सीमा और गुणवत्ता (quality) का मूल्यांकन करने के लिए उपग्रह इमेजरी (satellite imagery) का उपयोग करता है। 24 राज्यों में लगभग 30,000 किलोमीटर को कवर करने वाला प्रारंभिक मूल्यांकन, वार्षिक निगरानी (annual monitoring) के लिए आधार रेखा (baseline) के रूप में काम करेगा।
पृष्ठभूमि
NHAI देश के राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क के निर्माण और रखरखाव के लिए जिम्मेदार है। सड़क निर्माण के पर्यावरणीय प्रभाव (environmental impact) को कम करने के लिए, NHAI ग्रीन और स्वच्छ परिवहन के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highways for Green and Clean Transportation) जैसी योजनाओं के तहत वृक्षारोपण अभियान (plantation drives) चलाता है। राजमार्गों की रैखिक (linear) और बिखरी हुई प्रकृति (dispersed nature) के कारण इस वनस्पति के अस्तित्व (survival) और स्वास्थ्य (health) को मापना चुनौतीपूर्ण रहा है।
नया सूचकांक उच्च-रिज़ॉल्यूशन उपग्रह सेंसर (high‑resolution satellite sensors) और सामान्यीकृत अंतर वनस्पति सूचकांक (Normalized Difference Vegetation Index - NDVI) का उपयोग करके इस चुनौती को संबोधित करता है। उपग्रहों द्वारा कैप्चर की गई क्लोरोफिल सामग्री (Chlorophyll content) का उपयोग राजमार्ग राइट-ऑफ-वे क्षेत्रों (right‑of‑way areas) के लिए NDVI मानों की गणना करने के लिए किया जाता है। विश्लेषण वनस्पति (vegetation) को घने (dense), मध्यम (moderate), विरल (sparse) और गैर-वनस्पति (non‑vegetated) श्रेणियों में वर्गीकृत (classifies) करता है। वार्षिक आकलन NHAI को अंतराल (gaps) की पहचान करने, रखरखाव की योजना बनाने और राजमार्गों के किनारे हरित आवरण (green cover) को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
मुख्य बिंदु और महत्व
- मानकीकृत मीट्रिक (Standardised metric): NH‑GCI सड़क के किनारे हरियाली (roadside greenery) का आकलन करने के लिए एक समान कार्यप्रणाली (uniform methodology) प्रदान करता है, जिससे राज्यों और गलियारों (corridors) में तुलना सक्षम होती है।
- डेटा-संचालित योजना (Data‑driven planning): खराब वनस्पति (poor vegetation) वाले हिस्सों (stretches) को उजागर करके, सूचकांक वृक्षारोपण (plantation) और रखरखाव के लिए संसाधनों को अधिक प्रभावी ढंग से आवंटित करने में मदद करेगा।
- पर्यावरणीय लाभ (Environmental benefits): राजमार्गों के किनारे पेड़ और झाड़ियाँ वायु प्रदूषण (air pollution) को कम करती हैं, छाया प्रदान करती हैं और मिट्टी के कटाव (soil erosion) के खिलाफ बफर (buffer) के रूप में कार्य करती हैं। उनके स्वास्थ्य की निगरानी जलवायु कार्रवाई (climate action) के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं (commitments) के साथ मेल खाती है।
- रिमोट सेंसिंग का उपयोग: NRSC/ISRO के साथ सहयोग विश्वसनीय वैज्ञानिक विश्लेषण (credible scientific analysis) सुनिश्चित करता है और हजारों किलोमीटर तक श्रमसाध्य (laborious) क्षेत्र सर्वेक्षण की आवश्यकता को रोकता है।
स्रोत: Press Information Bureau