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विकसित ग्राम स्वराज: पंचायत प्रशिक्षण, योजना और वित्तीय जवाबदेही

विकसित ग्राम स्वराज: पंचायत प्रशिक्षण, योजना और वित्तीय जवाबदेही

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को वित्तीय वर्ष 2026–27 से 2030–31 के लिए प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंज़ूरी दी। इस केंद्र प्रायोजित योजना का अनुमोदित परिव्यय ₹7,395.55 करोड़ है। इसका उद्देश्य सहभागी योजना, डिजिटल जानकारी, प्रशिक्षण और वित्तीय जवाबदेही के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय शासन को सुदृढ़ करना है। पंचायतें ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने वाली स्थानीय स्वशासन संस्थाएँ हैं। यह कार्यक्रम सामुदायिक प्राथमिकताओं को उपलब्ध संसाधनों के साथ जोड़ने की उनकी क्षमता का समर्थन करता है। इसकी मंज़ूरी एक वित्तपोषण और कार्यान्वयन रूपरेखा स्थापित करती है; यह स्थापित नहीं करती कि पूरी राशि खर्च की जा चुकी है या हर अपेक्षित सुधार हासिल कर लिया गया है।

स्थानीय संस्थाओं और सामुदायिक भागीदारी की अलग-अलग भूमिकाएँ हैं

ग्राम पंचायत, पंचायत ढाँचे के भीतर ग्राम-स्तरीय संस्था है। ग्राम सभा में संबंधित ग्राम क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत लोग शामिल होते हैं। यह अंतर प्रतिनिधि सरकार को व्यापक जन भागीदारी से जोड़ता है। संविधान ग्राम, मध्यवर्ती और ज़िला स्तरों पर पंचायतों का प्रावधान करता है, जिसमें छोटे राज्यों को मध्यवर्ती स्तर को छोड़ने की अनुमति देने वाला एक अपवाद शामिल है।

अनुच्छेद 243G राज्य विधानमंडलों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए पंचायतों को शक्तियाँ देने की अनुमति देता है। इसी प्रकार अनुच्छेद 243A ग्राम सभा के कार्यों को राज्य के कानून के अंतर्गत रखता है। ये प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि व्यावहारिक अधिकार किसी राज्य में कार्यरत कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर क्यों निर्भर करता है। एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण योजना सभी विभागीय कार्यों को स्वतः ही संस्थाओं को हस्तांतरित किए बिना उनकी क्षमताओं का समर्थन कर सकती है।

यह नया वित्तपोषण एक अनुमोदित कार्यक्रम परिव्यय है

अनुमोदित वित्तपोषण में केंद्र और राज्य के अंश शामिल हैं, जैसा कि नीचे दिखाया गया है। परिव्यय (outlay) अनुमोदित अवधि के दौरान कार्यक्रम के वित्तीय पैमाने को दर्शाता है। इसे किसी विशेष वर्ष में जारी की गई राशि, किसी स्थानीय निकाय द्वारा दर्ज व्यय या किसी पूर्ण हो चुकी सार्वजनिक परिसंपत्ति से अलग समझा जाना चाहिए। वे सार्वजनिक धन के उपयोग के बाद के चरण हैं। इस अंतर को समझने से किसी बड़ी घोषणा को परिणाम देने के लिए आवश्यक व्यावहारिक कार्य से जोड़ने में मदद मिलती है।

वित्तपोषण घटकअनुमोदित राशि
केंद्रीय अंश₹4,869.48 करोड़
राज्य का अंश₹2,526.07 करोड़
कुल₹7,395.55 करोड़

योजना की शुरुआत आवश्यकताओं, प्राथमिकताओं और संसाधनों से होती है

एक ग्राम पंचायत विकास योजना (Gram Panchayat Development Plan) स्थानीय प्राथमिकताओं को उन्हें पूरा करने के लिए उपलब्ध संसाधनों के साथ जोड़ती है। पूर्व का जन योजना अभियान इसे निवासियों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को शामिल करने वाली एक सहभागी प्रक्रिया के रूप में स्पष्ट करता है। भागीदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय चर्चा के बिना तैयार की गई सूची में महत्वपूर्ण आवश्यकताएँ छूट सकती हैं। एक व्यावहारिक योजना को सीमाओं को भी पहचानना चाहिए: किसी समस्या की पहचान करना अपने आप में ज़िम्मेदार संस्था, वित्तपोषण स्रोत या कार्य के क्रम की पहचान नहीं करता है।

इस अभियान के दृष्टिकोण में योजना और वित्तीय जानकारी के प्रकटीकरण के साथ-साथ फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और सामुदायिक संगठनों के साथ चर्चा शामिल है। ये योगदान अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं। निवासी रोज़मर्रा की कठिनाइयों को बता सकते हैं, जबकि विभागीय कर्मचारी मौजूदा हस्तक्षेपों और संसाधनों के बारे में जानकारी दे सकते हैं। सार्वजनिक जानकारी परिणामी विकल्पों की जाँच करना आसान बनाती है। समन्वय का व्यावहारिक उद्देश्य प्रस्तावित गतिविधियों की कई असंबद्ध सूचियाँ एकत्र करने के बजाय उन दृष्टिकोणों को आपस में जोड़ना है।

डिजिटल रिकॉर्ड योजनाओं को आगे के कार्य से जोड़ते हैं

ई-ग्रामस्वराज (eGramSwaraj) पंचायती राज मंत्रालय का एक मौजूदा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म है। इसके कार्यों में योजना बनाना, प्रगति की रिपोर्टिंग करना, लेखांकन और परिसंपत्तियों की जानकारी रखना शामिल है। मंत्रालय तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृतियों के लिए अलग-अलग रिकॉर्ड का वर्णन करता है। तकनीकी रिकॉर्ड अनुमोदित कार्य लागतों को ट्रैक करते हैं, जबकि प्रशासनिक रिकॉर्ड एजेंसियों और स्वीकृत राशियों की पहचान करते हैं। इन रिकॉर्डों को जोड़ने से किसी गतिविधि को योजना में शामिल किए जाने से लेकर उसके कार्यान्वयन और वित्तीय रिपोर्टिंग तक ट्रैक करना आसान हो सकता है।

राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र विशिष्ट संस्थागत कोडों के माध्यम से ई-ग्रामस्वराज और लोकल गवर्नमेंट डायरेक्टरी के बीच के संबंधों का भी वर्णन करता है। ऐसे कोड विभिन्न प्रणालियों को एक ही स्थानीय निकाय को संदर्भित करने में मदद करते हैं। जब विभिन्न अनुप्रयोगों के बीच जानकारी का आदान-प्रदान किया जाता है तो यह एक बुनियादी आवश्यकता होती है। डिजिटल रिकॉर्ड अब भी सटीक, समयबद्ध प्रविष्टियों और ज़िम्मेदार उपयोग पर निर्भर करते हैं। एक दर्ज की गई स्वीकृति, भुगतान या प्रगति अपडेट किसी चरण को दर्शाता है; इसे वास्तव में किए गए कार्य के साक्ष्य के साथ पढ़ा जाना चाहिए।

प्रशिक्षण मौजूदा क्षमता-निर्माण प्रयास को आगे बढ़ाता है

स्थानीय प्रतिनिधियों के लिए सहायता इस नई घोषणा से पहले से मौजूद है। पुनर्गठित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान को 2022–23 से 2025–26 के लिए अनुमोदित किया गया था। इसके पूर्व आधिकारिक विवरण में मंत्रालयों, राज्य विभागों और अन्य भागीदारों के बीच क्षमता-निर्माण तथा समन्वय पर बल दिया गया था। यह निरंतर बनी रहने वाली शासन संबंधी समस्या की पृष्ठभूमि प्रदान करता है: संस्थाओं को जानकारी की व्याख्या करने, अन्य एजेंसियों के साथ काम करने और प्राथमिकताओं को कार्रवाई में बदलने की क्षमता की आवश्यकता होती है। कोई पाठ्यक्रम या डिजिटल उपकरण तभी उपयोगी होता है जब वह क्षमता रोज़मर्रा के काम में उतरती है।

लेखापरीक्षा में उसके निष्कर्षों पर प्रतिक्रिया देना शामिल है

ऑडिटऑनलाइन का कार्रवाई-संबंधी मार्गदर्शन स्पष्ट करता है कि वित्तीय जवाबदेही के लिए केवल लेखे अपलोड करने से अधिक की आवश्यकता क्यों होती है। लेखापरीक्षक रिकॉर्ड की जाँच करते हैं और आपत्तियाँ या टिप्पणियाँ उठाते हैं; जिस निकाय की लेखापरीक्षा की जा रही है वह जवाब देता है। जहाँ स्पष्टीकरण अपर्याप्त हो, वहाँ यह प्रक्रिया आगे के प्रश्नों की अनुमति देती है। इसका मूल उद्देश्य पहचाने गए किसी मुद्दे को एक ऐसे जवाब से जोड़ना है जिसकी जाँच की जा सके। किसी प्रणाली में टिप्पणी का दर्ज होना और उसका संतोषजनक समाधान होना अलग-अलग चरण हैं।

मंत्रालय का मार्गदर्शन लेखापरीक्षा कार्य को वाउचर, परिसंपत्ति सूचियों, स्वीकृतियों और विकास योजनाओं सहित सहायक सामग्री से भी जोड़ता है। ये रिकॉर्ड वित्तीय लेनदेन की संदर्भ सहित जाँच करने की अनुमति देते हैं। सार्वजनिक प्रस्तुति और प्रकटीकरण जानकारी को उसे संभालने वाले अधिकारियों से परे उपलब्ध कराकर जवाबदेही का एक और आयाम जोड़ते हैं। इसलिए प्रक्रिया की गुणवत्ता का संबंध साक्ष्य, जवाबों और अनुवर्ती कार्रवाई से है। केवल एक पूर्ण की गई ऑनलाइन प्रविष्टि यह नहीं दिखा सकती कि हर मुद्दे का समाधान कर दिया गया है।

कार्यान्वयन में राज्य और स्थानीय व्यवस्थाओं का उपयोग किया जाएगा

नई योजना में सामान्य पंचायत ढाँचे से बाहर के पात्र पारंपरिक ग्रामीण स्थानीय निकायों सहित सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कार्य योजनाओं के लिए केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति द्वारा मूल्यांकन आवश्यक होगा। मौजूदा विभागीय वितरण व्यवस्थाएँ जारी रहेंगी। कोई स्थायी पद सृजित नहीं किया गया है, हालाँकि आवश्यकता-आधारित संविदात्मक सहायता की अनुमति है। वार्षिक लक्ष्यों में 2.55 लाख विकास योजनाएँ और कम-से-कम 2.55 लाख ऑनलाइन ऑडिट योजनाएँ शामिल हैं।

स्थानीय वित्तीय मज़बूती राजस्व व्यवस्थाओं पर भी निर्भर करती है। अनुच्छेद 243H राज्य के कानूनों को पंचायत करों, शुल्कों, पथकरों और फ़ीस को अधिकृत करने, राजस्व सौंपने तथा अनुदान प्रदान करने की अनुमति देता है। वे शक्तियाँ संबंधित कानून की प्रक्रियाओं और सीमाओं के भीतर कार्य करती हैं। इसलिए स्थानीय राजस्व संग्रह में सुधार में अनुदानों और अन्य उपलब्ध निधियों के प्रभावी उपयोग के साथ-साथ मौजूदा कानूनी ढाँचे के भीतर प्रशासन शामिल है।

निष्कर्ष

इस योजना की प्रमुख चुनौती जानकारी और भागीदारी को ऐसे निर्णयों में बदलना है जिन्हें संस्थाएँ क्रियान्वित कर सकें और सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर सकें। योजना प्राथमिकताओं की पहचान करती है; सक्षम प्रतिनिधि और अधिकारी उन्हें संसाधनों और ज़िम्मेदारियों से जोड़ते हैं। रिकॉर्ड और ऑडिट उन संसाधनों के उपयोग को जाँच के लिए खुला बनाते हैं। प्रगति व्यावहारिक योजनाओं, विश्वसनीय कार्यान्वयन तथा सार्वजनिक और लेखापरीक्षा जाँच के प्रति सार्थक प्रतिक्रियाओं में सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।

स्रोत

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