ख़बरों में क्यों?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सामाजिक स्टॉक एक्सचेंजों (social stock exchanges) पर जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल (ZCZP) उपकरण जारी करने वाले गैर-लाभकारी संगठनों (Not‑for‑Profit Organisations - NPOs) के लिए नियमों में संशोधन किया है। इस बीच, नए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (corporate social responsibility - CSR) नियम कंपनियों को अपने CSR बजट का एक हिस्सा इन उपकरणों (instruments) में निवेश करने की अनुमति देते हैं। इन परिवर्तनों का उद्देश्य सोशल फाइनेंस (social finance) को अधिक आकर्षक और सुलभ बनाना है।
पृष्ठभूमि
एक ZCZP उपकरण एक सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से एक NPO द्वारा जारी किया गया एक परोपकारी बांड (philanthropic bond) है। पारंपरिक बांडों (conventional bonds) के विपरीत इसमें कोई कूपन नहीं होता है और मूलधन (principal) वापस नहीं मिलता है; निवेशकों को वित्तीय लाभ के बजाय मापने योग्य प्रभाव (measurable impact) के रूप में "सामाजिक प्रतिफल (social return)" प्राप्त होता है। केवल एक्सचेंज में पंजीकृत NPO ही विशिष्ट परियोजनाओं को निधि (fund) देने के लिए ये उपकरण जारी कर सकते हैं। मुद्दे डीमटेरियलाइज्ड (dematerialised) होने चाहिए, न्यूनतम आकार ₹50 लाख होना चाहिए और कम से कम ₹10,000 के आवेदन की आवश्यकता होती है।
हाल के विनियामक परिवर्तन (Recent regulatory changes)
- अप्रैल 2026 का SEBI परिपत्र: नियामक (regulator) ने सामाजिक स्टॉक एक्सचेंज में NPO के पंजीकृत रहने की अवधि को दो से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया। इसने ZCZP मुद्दों के लिए न्यूनतम सदस्यता आवश्यकता (minimum subscription requirement) को 75 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया। यदि कम से कम आधे मुद्दे की सदस्यता ली गई है और उचित परिश्रम (due diligence) से पुष्टि होती है कि धन को सार्थक रूप से तैनात किया जा सकता है, तो कम-सदस्यता (under‑subscription) के कारण मुद्दे को रद्द करने की आवश्यकता नहीं है।
- CSR निवेश विंडो: CSR नियमों में संशोधन अब कंपनियों को अपने वार्षिक CSR व्यय (annual CSR expenditure) का 10 प्रतिशत तक ZCZP उपकरणों में निवेश करने की अनुमति देता है। इस तरह के निवेश को तीन वित्तीय वर्षों से अधिक की परियोजनाओं को निधि देनी चाहिए; अप्रयुक्त (unused) राशि को एक निर्दिष्ट सरकारी कोष में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। कंपनियों को इन निवेशों के लिए प्रभाव आकलन (impact assessments) से छूट दी गई है, जिससे अनुपालन (compliance) सरल हो गया है।
- उद्देश्य और लाभ: NPO को वित्तीय रिटर्न (financial returns) का वादा किए बिना धन जुटाने की अनुमति देकर, ZCZP उपकरण सामाजिक रूप से प्रभावशाली परियोजनाओं (socially impactful projects) में परोपकारी पूंजी (philanthropic capital) का चैनल बनाते हैं। कम सदस्यता सीमा और CSR भागीदारी से जारीकर्ताओं और निवेशकों के समूह (pool) का विस्तार होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
विनियामक बदलाव (regulatory tweaks) सामाजिक विकास (social development) के लिए अभिनव वित्तपोषण (innovative financing) के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं। ढीले निर्गम मानदंडों (issuance norms) और नए CSR चैनलों के साथ, ZCZP उपकरण निवेशकों को सामाजिक प्रभाव का एक पारदर्शी उपाय (transparent measure) प्रदान करते हुए स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यावरण और अन्य सामुदायिक परियोजनाओं के लिए अधिक संसाधन जुटा सकते हैं।