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कैबिनेट ने दिव्यांगता पेंशन की पात्रता बढ़ाई और केंद्रीय सहायता में वृद्धि की

First brief 23 Oct, 5:15 pm IST Updated 23 Oct, 5:15 pm IST 0 developments 1 min read
Fictional disability-support help desk.
Clarity · Illustration

Where it stands

14 अक्टूबर 2026 को मंज़ूर किए गए बदलावों के तहत गरीब परिवारों के और अधिक लोग केंद्रीय दिव्यांगता पेंशन सहायता के पात्र होंगे। कैबिनेट ने ज़रूरी दिव्यांगता स्तर को 80% से घटाकर 40% कर दिया और 18 वर्ष की न्यूनतम आयु हटा दी। इसलिए योजना की अन्य शर्तों के अधीन, बच्चे जन्म से ही पात्र होंगे। यह प्रतिशत दिव्यांगता आकलन की सीमा है, आय का हिस्सा या पेंशन में कटौती नहीं। इसे घटाने से 40% से 79% के बीच आकलित दिव्यांगता वाले लोग पात्र हो जाते हैं। उदाहरण के लिए, 60% प्रमाणित दिव्यांगता वाला कोई वयस्क, जो अन्यथा पात्र हो, पहले ज़रूरी सीमा से नीचे रह जाता था। वह व्यक्ति संशोधित दिव्यांगता शर्त पूरी करता है। कम आयु वर्ग के लिए, जिसमें अब 0–79 वर्ष के लोग आते हैं, केंद्रीय मासिक सहायता भी ₹300 से बढ़कर ₹375 हो जाती है। 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए यह ₹500 से बढ़कर ₹625 हो जाती है। राज्य अपनी ओर से सहायता जोड़ सकते हैं, इसलिए ज़रूरी नहीं कि केंद्रीय राशि किसी व्यक्ति को मिलने वाली कुल पेंशन के बराबर हो। यह योजना पात्र गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों तक सीमित रहती है। मंज़ूरी इस बात का प्रमाण नहीं कि नए भुगतान बैंक खातों तक पहुँच चुके हैं। सरकार ने कहा कि कैबिनेट के फ़ैसले के तीन महीने के भीतर संशोधित दिशानिर्देश जारी करके लागू किए जाएँगे।

Background

दिव्यांगता अतिरिक्त खर्च पैदा कर सकती है और नियमित आय कमाना कठिन बना सकती है। सामाजिक सहायता पेंशन, पाने वाले से अंशदान पर आधारित सेवानिवृत्ति कोष बनवाए बिना, कुछ सार्वजनिक सहायता देती है। पात्रता के नियम तय करते हैं कि यह सहायता किसे मिल सकती है। पहले की केंद्रीय दिव्यांगता पेंशन योजना में परिवार को गरीबी की शर्त पूरी करनी होती थी। आवेदक की आयु भी कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए थी और उसे 80% दिव्यांगता की सीमा पूरी करनी होती थी। इसलिए किसी गरीब परिवार में काफी प्रमाणित दिव्यांगता वाला ऐसा सदस्य हो सकता था, जो फिर भी पात्र नहीं होता था। नया फ़ैसला प्रवेश की इन दो शर्तों को बदलता है। कम दिव्यांगता सीमा एक बड़े समूह को शामिल करती है, जबकि आयु की निचली सीमा हटने से पात्र बच्चे योजना के दायरे में आ जाते हैं। परिवार की गरीबी की शर्त बनी रहती है, इसलिए केवल 40% दिव्यांगता प्रमाणपत्र से हर कोई पात्र नहीं हो जाता। भुगतान में वृद्धि एक अलग बदलाव है। यह किसी पात्र व्यक्ति की पेंशन में केंद्र का योगदान बढ़ाती है; इसके लिए उस व्यक्ति को अधिक अंशदान नहीं देना पड़ता। राज्यों की ओर से जोड़ी जाने वाली राशि अलग-अलग हो सकती है, इसीलिए केंद्रीय दरों को पूरे भारत में एक समान अंतिम भुगतान के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए। कैबिनेट ने व्यापक राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को 2030–31 तक जारी रखने और उसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना करने को भी मंज़ूरी दी। इसके वृद्धावस्था, विधवा और पारिवारिक लाभ वाले घटक अपने मौजूदा रूप में जारी रहेंगे। दिव्यांगता से जुड़े बदलावों को हर पेंशन योजना के लिए एक समान वृद्धि के रूप में नहीं बताया जाना चाहिए।

How it developed

  1. 14 October 2026; implementation guidelines pending
    How it started

    संशोधित योजना में पात्र बच्चे और अधिक दिव्यांग वयस्क शामिल

    कैबिनेट ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम को 2026–27 से 2030–31 तक जारी रखने को मंज़ूरी दी। इसका दिव्यांगता घटक प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना बन जाता है। इसकी संशोधित पात्रता में 40% दिव्यांगता सीमा का उपयोग होता है और जन्म से सहायता की अनुमति दी जाती है। केंद्रीय मासिक राशि 0–79 वर्ष के लिए ₹375 और 80 वर्ष तथा उससे अधिक के लिए ₹625 हो जाती है। अन्य पात्रता शर्तें अब भी लागू हैं। सरकार ने दिशानिर्देशों और क्रियान्वयन के लिए तीन महीने की अवधि दी है; उसने यह पुष्टि नहीं की कि सभी नए पात्र परिवारों का नामांकन हो चुका है।

Why it matters for UPSC

GS2 · Welfare and disability rights

दिव्यांगता पात्रता की सीमा और पेंशन राशि में अंतर बताइए। समझाइए कि गरीबी की शर्त बने रहने के बावजूद कम सीमा और आयु की निचली सीमा हटने से पहुँच कैसे बढ़ती है। सामाजिक सहायता को दिव्यांगजनों के अधिकारों से जोड़िए और कैबिनेट की मंज़ूरी को वास्तव में पहुँचाए गए भुगतानों से अलग रखिए।

Key terms

सामाजिक सहायता पेंशन (Social-assistance pension)तय शर्तें पूरी करने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक आर्थिक सहायता, न कि उनके अपने नियमित अंशदान से बनी पेंशन। यह योजना पात्र गरीब परिवारों की सहायता करती है। यह रोज़गार से जुड़े सेवानिवृत्ति कोष से अलग है।
दिव्यांगता सीमा (Disability threshold)किसी नियम के तहत पात्रता के लिए ज़रूरी आकलित दिव्यांगता का स्तर। सीमा को 80% से घटाकर 40% करने से पात्र समूह बड़ा होता है। इसका अर्थ यह नहीं कि पेंशन 40% घटा दी गई है या दिव्यांगता को परिवार की आय के हिस्से के रूप में मापा जाता है।
गरीबी रेखा से नीचे का परिवार (Below-poverty-line household)ऐसा परिवार, जिसे कार्यक्रम की लागू गरीबी शर्त पूरी करने वाला माना गया हो। यह शर्त इस पेंशन की पात्रता का हिस्सा बनी रहती है। दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिव्यांगता की शर्त को पूरा करता है; वह अपने आप यह स्थापित नहीं करता कि परिवार गरीबी की शर्त पूरी करता है।
केंद्रीय सहायता और राज्य की अतिरिक्त राशि (Central assistance and state addition)केंद्र कार्यक्रम के तहत एक तय राशि देता है, और कोई राज्य अपने संसाधनों से पैसा जोड़ सकता है। इसलिए मिलने वाली कुल राशि केंद्रीय दर से अलग हो सकती है। नई केंद्रीय राशियों को हर राज्य की पूरी पेंशन के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (National Social Assistance Programme)वह छत्र कार्यक्रम, जो वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांगता पेंशनों तथा एक पारिवारिक लाभ के ज़रिए पात्र गरीब परिवारों की सहायता करता है। कैबिनेट ने इसे जारी रखने और इसका नाम बदलने को मंज़ूरी दी। दिव्यांगता सहायता में बदलाव अपने आप हर दूसरे घटक का लाभ नहीं बदलते।
क्रियान्वयन दिशानिर्देश (Implementation guidelines)ऐसे निर्देश, जो बताते हैं कि मंज़ूर की गई नीति कैसे लागू होगी, जिनमें पात्रता और प्रशासन भी शामिल हैं। ये कैबिनेट के फ़ैसले को नामांकन और भुगतान की प्रक्रियाओं में बदलने में मदद करते हैं। मंज़ूरी, दिशानिर्देश और लाभार्थी के खाते में जमा पैसा अलग-अलग चरण हैं।
Sources (3)
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