समाचार में क्यों?
13 जून 2026 को Indian Air Force (IAF) का एक An-32 टर्बोप्रॉप परिवहन विमान एक प्रशिक्षण उड़ान के दौरान असम के जोरहाट (Jorhat) के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। चालक दल के पांच सदस्यों की जान चली गई। इस घटना ने पुराने बेड़े की सुरक्षा पर सवाल उठाए और रक्षा मंत्रालय द्वारा जांच को प्रेरित किया।
पृष्ठभूमि
एंटोनोव An-32 (Antonov An-32) को 1970 के दशक में एक उच्च-विंग कार्गो विमान के रूप में विकसित किया गया था, जो छोटे और गर्म रनवे से संचालन करने में सक्षम था। इसके इंजन पंखों के ऊपर लगे होते हैं, जिससे उबड़-खाबड़ इलाकों में निकासी में सुधार होता है। भारत ने 1980 के दशक में सोवियत संघ से 100 से अधिक An-32s हासिल किए थे और परिवहन, खोज और बचाव तथा चिकित्सा निकासी के लिए इनका उपयोग करना जारी रखा है।
पिछली दुर्घटनाएँ
- जुलाई 2016 में 29 लोगों को ले जा रहा एक An-32 बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गायब हो गया था; इसका मलबा केवल जनवरी 2024 में मिला था।
- जून 2019 में एक और IAF An-32 अरुणाचल प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 13 लोग मारे गए।
- यह विमान 9,500 मीटर तक की ऊंचाई और 55 °C के तापमान पर उड़ान भर सकता है, लेकिन इसके लिए सावधानीपूर्वक रखरखाव की आवश्यकता होती है।
निष्कर्ष
जोरहाट दुर्घटना IAF के परिवहन बेड़े को आधुनिक बनाने और सख्त रखरखाव प्रोटोकॉल लागू करने की आवश्यकता को उजागर करती है। एक चरणबद्ध प्रतिस्थापन कार्यक्रम और बेहतर प्रशिक्षण इसी तरह की त्रासदियों को रोक सकता है।
स्रोत: NDTV