चर्चा में क्यों?
गुजरात सरकार ने बरदा वन्यजीव अभयारण्य (Barda Wildlife Sanctuary) को एशियाई शेरों (Asiatic lions) के लिए दूसरे निवास स्थान के रूप में घोषित किया है। हाल के सर्वेक्षणों में अभयारण्य में कई शावकों (cubs) सहित 17 शेरों के रहने की पुष्टि हुई है, जिससे यह प्रोजेक्ट लायन (Project Lion) के तहत एक सैटेलाइट आबादी (satellite population) बन गया है।
पृष्ठभूमि
एशियाई शेर (Panthera leo persica) कभी पूरे भारत और पश्चिम एशिया में पाए जाते थे, लेकिन बीसवीं शताब्दी की शुरुआत तक उनकी संख्या घटकर पचास से भी कम रह गई थी। आज सभी जंगली एशियाई शेर गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) और उसके आसपास रहते हैं। यह एकाग्रता एक गंभीर जोखिम पैदा करती है: कोई बीमारी का प्रकोप, प्राकृतिक आपदा (natural disaster) या मानव-वन्यजीव संघर्ष (human‑wildlife conflict) पूरी प्रजाति का सफाया कर सकता है। 2018 में, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (canine distemper virus) के प्रकोप ने हफ्तों के भीतर गिर में 28 शेरों की जान ले ली थी, जो एक बैकअप निवास स्थान (backup habitat) की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
बरदा वन्यजीव अभयारण्य गिर से लगभग 100 किलोमीटर पश्चिम में पोरबंदर (Porbandar) के पास स्थित है। 1979 में अभयारण्य घोषित किए जाने से पहले यह एक निजी शिकार रिजर्व (hunting reserve) था। यहाँ के परिदृश्य में अर्ध-शुष्क पहाड़ियाँ (semi‑arid hills), शुष्क पर्णपाती जंगल (dry deciduous forests) और कांटेदार झाड़ियाँ (thorn scrub) शामिल हैं। ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र में शेर रहते थे लेकिन उन्नीसवीं सदी के अंत तक वे लुप्त हो गए।
शेरों की दूसरी आबादी का निर्माण (Building a Second Lion Population)
- प्राकृतिक पुनर्वास और स्थानांतरण (Natural recolonisation and translocation): वर्षों की आवास बहाली (habitat restoration) के बाद, 2023 में एक नर शेर भटकता हुआ बरदा में आ गया। इसके बाद वन्यजीव प्रबंधकों ने वैज्ञानिक देखरेख में गिर से पाँच शेरनियों को स्थानांतरित (translocated) किया। इस प्राइड (pride) ने स्वाभाविक रूप से प्रजनन किया, जिससे ग्यारह शावक पैदा हुए, और 2025 तक बरदा में 17 शेर हो गए।
- सैटेलाइट पॉपुलेशन 8 (Satellite Population 8): एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए 2020 में शुरू किए गए दस वर्षीय ₹2,927 करोड़ के कार्यक्रम, प्रोजेक्ट लायन के तहत बरदा को “सैटेलाइट पॉपुलेशन 8” नामित किया गया है। यह गुजरात के भीतर शेरों के लिए पहला पूरी तरह से संरक्षित सैटेलाइट आवास (protected satellite habitat) है।
- शिकार में वृद्धि (Prey augmentation): शुरुआती सर्वेक्षणों में अभयारण्य के 192 वर्ग किमी क्षेत्र में केवल 119 चित्तीदार हिरण (spotted deer - chital) पाए गए। शेरों को पशुधन (livestock) पर हमला करने से रोकने के लिए, वन विभाग ने अफ्रीकी बोमा तकनीक (African Boma technique) का उपयोग करके गिर से हिरणों को स्थानांतरित किया, जो जानवरों को धीरे-धीरे रिलोकेशन पेन (relocation pens) में डालता है। बढ़ती शेर आबादी को बनाए रखने के लिए शिकार के आधार (prey base) को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।
- आनुवंशिक विविधता (Genetic diversity): दशकों के अलगाव (isolation) के कारण एशियाई शेरों में आनुवंशिक विविधता कम हो गई है, जिससे वे बीमारियों के प्रति संवेदनशील (susceptible) हो गए हैं। वन्यजीव जीवविज्ञानी (Wildlife biologists) गिर और बरदा की आबादी के बीच आनुवंशिक मिश्रण (genetic mixing) को अधिकतम करने के लिए उपग्रह ट्रैकिंग (satellite tracking) और चयनात्मक स्थानांतरण (selective relocations) का उपयोग करते हैं।
- सामुदायिक जुड़ाव (Community engagement): प्रोजेक्ट लायन योजना में किसानों के लिए ऊंचे मचान (elevated platforms) बनाना, खुले कुओं के चारों ओर सुरक्षा दीवारें बनाना, बचाव दल (rescue teams) नियुक्त करना और इको-टूरिज्म (eco‑tourism) को बढ़ावा देना शामिल है। विश्व शेर दिवस (World Lion Day) 2025 पर, गुजरात ने बरदा के विकास के लिए ₹180 करोड़ की घोषणा की, जिसमें एक सफारी पार्क (safari park) भी शामिल है।
निष्कर्ष
बरदा वन्यजीव अभयारण्य एशियाई शेरों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा (vital lifeline) प्रदान करता है। एक दूसरी, आत्मनिर्भर (self‑sustaining) आबादी स्थापित करने से विनाशकारी नुकसान का जोखिम कम होता है और प्रजातियों को अपनी वर्तमान सीमा से बाहर विस्तार करने की अनुमति मिलती है। इसकी सफलता शिकार के आधार को बढ़ाने, मानव-वन्यजीव बातचीत के प्रबंधन और आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करने पर निर्भर करेगी। प्रोजेक्ट लायन दर्शाता है कि कैसे सावधानीपूर्वक योजना और सामुदायिक भागीदारी भारत की प्रतिष्ठित बड़ी बिल्ली (iconic big cat) का भविष्य सुरक्षित कर सकती है।