विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

CAR-T Cell Therapy: ऑटोइम्यून रोग, काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर और टी-सेल

CAR-T Cell Therapy: ऑटोइम्यून रोग, काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर और टी-सेल

खबरों में क्यों?

एक जर्मन मेडिकल टीम ने बताया कि तीन गंभीर ऑटोइम्यून विकारों (autoimmune disorders) वाले एक रोगी को CAR‑T सेल थेरेपी प्राप्त करने के बाद लंबी अवधि की छूट (remission) प्राप्त हुई। यह मामला बताता है कि इस कैंसर उपचार को अतिसक्रिय प्रतिरक्षा प्रणालियों (overactive immune systems) को शांत करने के लिए अनुकूलित किया जा सकता है और यह जानलेवा ऑटोइम्यून बीमारियों वाले लोगों के लिए आशा प्रदान करता है।

पृष्ठभूमि

काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल (CAR‑T) थेरेपी में रोगी की अपनी टी कोशिकाओं (T cells) को इकट्ठा करना, उन्हें रोगग्रस्त कोशिकाओं पर एक विशिष्ट लक्ष्य को पहचानने के लिए आनुवंशिक रूप से इंजीनियर (genetically engineering) करना और उन्हें वापस शरीर में डालना शामिल है। 2017 के बाद से इस व्यक्तिगत थेरेपी ने कुछ रक्त कैंसर (blood cancers) के उपचार में क्रांति ला दी है। शोधकर्ता अब ऑटोइम्यून बीमारियों के खिलाफ इसकी क्षमता की खोज कर रहे हैं, जहां प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से स्वस्थ ऊतकों (healthy tissues) पर हमला करती है।

थेरेपी कैसे काम करती है

  • टी-सेल संग्रह (T‑cell collection): डॉक्टर रोगी से रक्त लेते हैं और प्रतिरक्षा के लिए जिम्मेदार एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका (white blood cell), टी कोशिकाओं को अलग करते हैं।
  • आनुवंशिक संशोधन (Genetic modification): प्रयोगशाला में कोशिकाओं को एक रिसेप्टर ले जाने के लिए संशोधित किया जाता है जो CD19 को पहचानता है, जो B कोशिकाओं पर पाया जाने वाला एक प्रोटीन है। B कोशिकाएं एंटीबॉडी (antibodies) का उत्पादन करती हैं और ऑटोइम्यून प्रतिक्रियाओं को चला सकती हैं।
  • विस्तार और जलसेक (Expansion and infusion): इंजीनियर कोशिकाओं को गुणा किया जाता है और फिर रोगी में वापस डाला जाता है। शरीर के अंदर जाने के बाद, वे बीमारी को ट्रिगर करने वाली B कोशिकाओं को ढूंढते और नष्ट करते हैं।
  • परिणाम: रिपोर्ट किए गए मामले में ऑटोइम्यून हेमोलिटिक एनीमिया, इम्यून थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम (autoimmune haemolytic anaemia, immune thrombocytopenia and antiphospholipid syndrome) से पीड़ित रोगी पूर्ण छूट में चला गया। उपचार के बाद उसे रक्त आधान (blood transfusions) की आवश्यकता बंद हो गई और जीवन की गुणवत्ता में नाटकीय रूप से सुधार हुआ।

महत्व

  • नया चिकित्सीय मार्ग: यह सफलता गंभीर, उपचार-प्रतिरोधी ऑटोइम्यून विकारों में प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए "रीसेट बटन" के रूप में CAR-T कोशिकाओं का उपयोग करने की ओर इशारा करती है।
  • जोखिमों को संतुलित करना: CAR-T थेरेपी साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम (cytokine release syndrome), संक्रमण और बीमारी के दोबारा होने (relapse) जैसे गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकती है। इसलिए सावधानीपूर्वक रोगी का चयन और निगरानी आवश्यक है।
  • भविष्य के शोध: सुरक्षा और प्रभावशीलता की पुष्टि करने, खुराक को अनुकूलित करने और यह पहचानने के लिए बड़े परीक्षणों (trials) की आवश्यकता है कि कौन सी ऑटोइम्यून स्थितियां इस दृष्टिकोण के लिए सबसे उपयुक्त हैं।
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