समाचार में क्यों?
भारत ने एक वैश्विक बैठक में अपनाए गए सात खाद्य-मानक ग्रंथों (food-standard texts) को विकसित करने में मदद की। यह बैठक 6-10 July 2026 के दौरान जेनेवा (Geneva) में हुई। अंतर्राष्ट्रीय काजू-कर्नेल (cashew-kernel) मानक पर नए काम को भी मंजूरी मिली। भारत ने उभरते खाद्य पदार्थों पर काम में नेतृत्व की भूमिका हासिल की।
पृष्ठभूमि
Codex Alimentarius Commission अंतर्राष्ट्रीय खाद्य मानकों (food standards) के लिए वैश्विक निकाय है, और इसे 1963 में स्थापित किया गया था।
Food and Agriculture Organization और World Health Organization संयुक्त रूप से इसे चलाते हैं, और दोनों विशेष United Nations एजेंसियां हैं।
Commission उपभोक्ता स्वास्थ्य की रक्षा करता है और निष्पक्ष खाद्य व्यापार को बढ़ावा देता है। इसका सचिवालय रोम (Rome) में Food and Agriculture Organization के मुख्यालय से संचालित होता है।
"Codex Alimentarius" नाम का अर्थ है "food code." यह मानकों, दिशानिर्देशों और संहिताओं के परिणामी संग्रह को संदर्भित करता है।
भ्रमित न हों: Commission निर्णय लेने वाली संस्था है, और Codex Alimentarius सहमत खाद्य ग्रंथों का संग्रह है।
Commission से कौन संबंधित है?
Commission के 189 सदस्य हैं, और इनमें 188 देश और European Union शामिल हैं।
भारत 1964 में सदस्य बना, और राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल (national delegations) विशेषज्ञ समितियों और अंतर्राष्ट्रीय सत्रों के माध्यम से भाग लेते हैं।
सरकारें वैज्ञानिक सलाह का उपयोग करके ग्रंथों पर बातचीत करती हैं, और उपभोक्ता, उद्योग और नागरिक-समाज संगठन पर्यवेक्षकों (observers) के रूप में भाग ले सकते हैं।
Codex ग्रंथ किन विषयों को कवर करते हैं?
- खाद्य स्वच्छता ग्रंथ संदूषण (contamination) और खाद्य जनित बीमारी को कम करते हैं।
- अवशेष सीमाएं कीटनाशकों (pesticides) और पशु चिकित्सा दवाओं को कवर करती हैं।
- संदूषक (Contaminant) सीमाएं विषाक्त पदार्थों और भारी धातुओं जैसे पदार्थों को संबोधित करती हैं।
- लेबलिंग मानक उपभोक्ताओं को पैकेज्ड खाद्य पदार्थों को समझने में मदद करते हैं।
- कमोडिटी (Commodity) मानक गुणवत्ता और सुरक्षा आवश्यकताओं को परिभाषित करते हैं।
- नमूनाकरण (Sampling) और विश्लेषण के तरीके तुलनीय प्रयोगशाला परिणामों का समर्थन करते हैं।
अलग विशेषज्ञ समितियां तकनीकी ड्राफ्ट तैयार करती हैं, और पूर्ण Commission तब उन्हें अपनाने के लिए विचार करता है।
क्या Codex मानक कानूनी रूप से बाध्यकारी (legally binding) हैं?
Codex ग्रंथ अंतर्राष्ट्रीय सिफारिशें हैं, लेकिन गोद लेने के बाद वे स्वचालित रूप से राष्ट्रीय कानून नहीं बन जाते हैं।
प्रत्येक सरकार तय करती है कि उन्हें घरेलू नियमों में कैसे शामिल किया जाए, और राष्ट्रीय प्राधिकरण (authorities) स्थानीय जोखिमों के लिए मानकों को अनुकूलित कर सकते हैं।
हालाँकि, World Trade Organization के भीतर Codex का विशेष महत्व है, और इसके खाद्य-सुरक्षा मानक मान्यता प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय संदर्भों के रूप में काम करते हैं।
एक देश मजबूत उपायों का चयन कर सकता है जब विज्ञान उनका समर्थन करता है, और इस तरह के उपाय व्यापार पर प्रच्छन्न प्रतिबंध (disguised restrictions) नहीं बनने चाहिए।
Prelims तथ्य: Codex Food and Agriculture Organization और World Health Organization के एक संयुक्त खाद्य-मानक कार्यक्रम के तहत काम करता है।
2026 सत्र में क्या हुआ?
Commission ने जिनेवा में अपना उनचासवां (forty-ninth) सत्र आयोजित किया, और भारत ने अपनाए गए सात ग्रंथों के पीछे काम की अध्यक्षता या सह-अध्यक्षता की।
भारत ने सूखे धनिया के बीजों (coriander seeds) के मानकों पर काम की अध्यक्षता की, और इसने ताजे करी पत्तों (curry leaves) से संबंधित काम की भी अध्यक्षता की।
भारत ने पांच अतिरिक्त क्षेत्रों की सह-अध्यक्षता (co-chair) की:
- एक कमोडिटी मानक ने वेनिला (vanilla) को कवर किया।
- एक अन्य कमोडिटी मानक ने बड़ी इलायची (large cardamom) को कवर किया।
- खाद्य उत्पादन में सुरक्षित पानी के पुन: उपयोग को नए अनुलग्नकों (annexes) द्वारा संबोधित किया गया।
- दिशानिर्देशों ने चिकन मांस में Campylobacter और Salmonella को संबोधित किया।
- लेबलिंग प्रावधानों ने संयुक्त प्रस्तुतियों और मल्टीपैक (multipacks) को कवर किया।
Campylobacter और Salmonella खाद्य जनित बीमारी के महत्वपूर्ण कारण हैं, और नियंत्रण को खेती, प्रसंस्करण, भंडारण और खाना पकाने को कवर करना चाहिए।
भारत के काजू प्रस्ताव का क्या हुआ?
Commission ने काजू की गिरी (cashew kernels) पर नए काम के लिए भारत के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। एक विशेष समिति अब प्रस्तावित मानक विकसित करेगी।
Codex Committee on Processed Fruits and Vegetables इस कार्य को संभालेगी। वार्ता सुरक्षा, गुणवत्ता और व्यापार आवश्यकताओं पर विचार करेगी।
स्थिति सावधानी: "नए काम" का अनुमोदन मानक-निर्माण शुरू करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक अंतिम काजू मानक पहले से मौजूद है।
भारत एक प्रमुख काजू उत्पादक और प्रोसेसर है, और एक स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय मानक निर्यात बाजारों में स्थिरता में सुधार कर सकता है।
भारत को कौन सी नई नेतृत्व भूमिका मिली?
भारत एक इलेक्ट्रॉनिक कार्य समूह (electronic working group) का सह-अध्यक्ष बना, और यह समूह नए खाद्य स्रोतों और उत्पादन प्रणालियों (New Food Sources and Production Systems) की जांच करता है।
इस व्यापक विषय में उभरते खाद्य पदार्थ और नई उत्पादन प्रौद्योगिकियां शामिल हैं, और उदाहरणों में सेल-आधारित खाद्य पदार्थ और सटीक किण्वन (precision fermentation) उत्पाद शामिल हो सकते हैं।
समूह मौजूदा ढांचे (frameworks) और जोखिम विश्लेषण में अंतराल की समीक्षा करेगा, और यह भविष्य के अंतर्राष्ट्रीय मार्गदर्शन की सिफारिश कर सकता है।
एक सह-अध्यक्ष चर्चा आयोजित करने और सामग्री का मसौदा (draft) तैयार करने में मदद करता है, लेकिन यह अकेले वैश्विक मानक तय नहीं कर सकता है।
भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?
रजित पुन्हानी (Rajit Punhani) ने भारत के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, और वह Food Safety and Standards Authority of India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं।
उस प्राधिकरण (authority) और Spices Board के विशेषज्ञ प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुए, और उनकी भागीदारी ने घरेलू अनुभव को अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं से जोड़ा।
Food Safety and Standards Authority of India भारतीय कानून के तहत खाद्य सुरक्षा को नियंत्रित करता है। यह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) के अधीन काम करता है।
परिणाम भारत के लिए मायने क्यों रखता है?
- सामान्य मानक अनावश्यक निर्यात बाधाओं को कम कर सकते हैं।
- मसाला मानक भारतीय उत्पादन ज्ञान को प्रतिबिंबित कर सकते हैं।
- सुरक्षित पानी का पुन: उपयोग मीठे पानी की आपूर्ति पर दबाव कम कर सकता है।
- पोल्ट्री (Poultry) मार्गदर्शन खाद्य जनित बीमारी के जोखिमों को कम कर सकता है।
- स्पष्ट मल्टीपैक (multipack) लेबल उपभोक्ता जानकारी में सुधार कर सकते हैं।
- प्रारंभिक भागीदारी नई खाद्य प्रौद्योगिकियों के लिए नियमों को आकार दे सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव घरेलू जिम्मेदारी भी लाता है, और भारत को स्वीकृत सुरक्षा सिद्धांतों के साथ परीक्षण, प्रवर्तन (enforcement) और उत्पादक प्रशिक्षण को संरेखित (align) करना चाहिए।
निष्कर्ष
भारत की 2026 की भूमिका ने वैश्विक खाद्य नियमों में इसकी आवाज़ को मजबूत किया, और प्रभावी घरेलू कार्यान्वयन (implementation) व्यावहारिक लाभों का निर्धारण करेगा।