विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

IATA Feedstock Assessment: सतत विमानन ईंधन, SAF क्षमता और बायो-रिफाइनरी

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समाचार में क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (International Air Transport Association - IATA) ने स्थायी विमानन ईंधन (sustainable aviation fuel - SAF) के उत्पादन की क्षमता पर एक व्यापक ग्लोबल फीडस्टॉक असेसमेंट (Global Feedstock Assessment) प्रकाशित किया है। वोर्ले कंसल्टिंग (Worley Consulting) के साथ तैयार किए गए अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि उपलब्ध बायोमास और पावर-टू-लिक्विड (power-to-liquid) प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके 2050 तक सालाना लगभग 400 मिलियन टन (Mt) SAF का उत्पादन किया जा सकता है - फिर भी वैश्विक विमानन को शुद्ध-शून्य (net-zero) कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए लगभग 500 Mt की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट भारत को SAF फीडस्टॉक के भविष्य के प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में पहचानती है, इसके विविध बायोमास संसाधनों और विस्तारित इथेनॉल (ethanol) उद्योग पर प्रकाश डालती है।

IATA की पृष्ठभूमि

IATA दुनिया की एयरलाइंस के लिए व्यापार संघ है। अप्रैल 1945 में हवाना, क्यूबा में अंतर्राष्ट्रीय वायु यातायात संघ (International Air Traffic Association) के उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित, शुरुआत में इसमें 31 देशों के 57 सदस्य एयरलाइंस थे। आज, यह अंतरराष्ट्रीय अनुसूचित हवाई यातायात का लगभग 94% ले जाने वाली लगभग 300 एयरलाइनों का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन एयरलाइन संचालन को मानकीकृत करने, सुरक्षा में सुधार करने और उद्योग के लिए वकालत करने का काम करता है। हाल के वर्षों में, पर्यावरणीय स्थिरता एक मुख्य फोकस बन गया है, जिसमें "फ्लाई नेट जीरो (Fly Net Zero)" जैसी पहल कार्बन-तटस्थ (carbon-neutral) विकास का लक्ष्य रखती हैं।

फीडस्टॉक मूल्यांकन के प्रमुख निष्कर्ष

  • वैश्विक क्षमता: अध्ययन का अनुमान है कि, 2050 तक, सालाना लगभग 400 Mt SAF का उत्पादन किया जा सकता है। यह विमानन की अनुमानित ईंधन मांग के लगभग 80% को कवर करेगा, जिससे 100 Mt के अंतर को आगे के तकनीकी नवाचार और ऊर्जा दक्षता के माध्यम से भरा जा सकेगा।
  • नीति की भूमिका: इस क्षमता को प्राप्त करना सहायक नीतियों, बायो-रिफाइनरियों (bio-refineries) के तेजी से विस्तार और पावर-टू-लिक्विड (PtL) प्रौद्योगिकियों के विकास पर निर्भर करता है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि फीडस्टॉक की उपलब्धता के बजाय प्रौद्योगिकी रोलआउट मुख्य बाधा है।
  • क्षेत्रीय हॉटस्पॉट: उत्तरी अमेरिका, ब्राजील, चीन, यूरोप के कुछ हिस्सों और भारत को फीडस्टॉक उपलब्धता के लिए हॉटस्पॉट के रूप में पहचाना जाता है। इन क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में कृषि अवशेष, अपशिष्ट तेल और नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन हैं।

दक्षिण एशिया और भारत

  • विविध फीडस्टॉक आधार: दक्षिण एशिया, विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान में चावल के पुआल, मकई के डंठल और गन्ने की खोई जैसे भरपूर कृषि अवशेष हैं। अकेले भारत में, ये 2030 तक SAF के लिए लगभग 150 Mt और 2050 तक 220 Mt फीडस्टॉक प्रदान कर सकते हैं।
  • भारत की क्षमता: भारत के पास दक्षिण एशिया के 80% से अधिक बायोमास संसाधन हैं और वह एक प्रमुख SAF उत्पादक बनने के लिए तैयार है। रिपोर्ट में इथेनॉल सम्मिश्रण (ethanol blending) के साथ भारत के अनुभव, दुनिया के तीसरे सबसे बड़े इथेनॉल उत्पादक के रूप में इसकी स्थिति और इसकी मजबूत शोधन क्षमता (refining capacity) का उल्लेख है। सरकार की PM JI-VAN योजना कृषि कचरे से बायो-इथेनॉल (bio-ethanol) उत्पादन का समर्थन करती है।
  • नीति लक्ष्य: भारत ने 2027 तक 1%, 2028 तक 2% और 2030 तक 5% के SAF सम्मिश्रण जनादेश की घोषणा की है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कर छूट, भूमि सब्सिडी और पूंजी सहायता जैसे प्रोत्साहन दिए जाते हैं।
  • फीडस्टॉक प्रकार: संभावित फीडस्टॉक्स में चीनी और स्टार्च-आधारित इथेनॉल, प्रयुक्त खाना पकाने का तेल और पशु वसा (animal tallow), कृषि और वानिकी अवशेष, और नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (municipal solid waste) शामिल हैं। रिपोर्ट का सुझाव है कि भारत 2030 तक लगभग 100 Mt और 2050 तक 150 Mt SAF फीडस्टॉक का उत्पादन कर सकता है।

विमानन के लिए SAF का महत्व

  • डीकार्बोनाइजेशन (Decarbonisation): सस्टेनेबल एविएशन ईंधन (Sustainable aviation fuels) पारंपरिक जेट ईंधन की तुलना में जीवन-चक्र ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन को 80% तक कम कर सकते हैं। 2050 तक शुद्ध-शून्य (net-zero) कार्बन उत्सर्जन के लिए विमानन उद्योग की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए वे महत्वपूर्ण हैं।
  • आर्थिक अवसर: SAF का विकास किसानों, अपशिष्ट प्रबंधन कंपनियों और रिफाइनरियों के लिए नए बाजार प्रदान करता है। भारत जैसे प्रचुर बायोमास वाले देश रोजगार पैदा कर सकते हैं और निवेश आकर्षित कर सकते हैं।
  • चुनौतियां: उच्च उत्पादन लागत, बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे की आवश्यकता और भूमि और फीडस्टॉक के लिए खाद्य फसलों के साथ प्रतिस्पर्धा बाधा बनी हुई है। रिपोर्ट स्पष्ट नीतियों, वित्तपोषण तंत्र और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान करती है।

स्रोत: The Hindu

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