चर्चा में क्यों?
Bombay Natural History Society (BNHS) ने हाल ही में महाराष्ट्र के Melghat Tiger Reserve में लंबी चोंच वाले गिद्धों (जिन्हें भारतीय गिद्ध भी कहा जाता है) के एक समूह को छोड़ा। पिंजौर संरक्षण केंद्र में पैदा हुए पंद्रह पक्षियों को सैटेलाइट टैग लगाए गए और धीरे-धीरे उन्हें जंगल में फिर से छोड़ दिया गया। बाद में दो गिद्ध 1,000 किलोमीटर से अधिक की उड़ान भरकर भोपाल चले गए, जो इस प्रजाति की लंबी दूरी तय करने की क्षमता को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
भारतीय गिद्ध (Gyps indicus) Accipitridae परिवार का एक पुरानी दुनिया का (Old World) गिद्ध है। कभी भारत, पाकिस्तान और नेपाल में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले इस गिद्ध की आबादी 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में 97% से अधिक कम हो गई। मुख्य कारण पशु चिकित्सा दवा डिक्लोफेनाक (diclofenac) का उपयोग था, जिसने पशुओं के शव खाने वाले गिद्धों को जहर दे दिया। केवल लगभग 30,000 परिपक्व व्यक्तियों के शेष रहने के साथ, यह प्रजाति अब गंभीर रूप से संकटग्रस्त (critically endangered) के रूप में सूचीबद्ध है। इसलिए कैप्टिव-ब्रीडिंग और पुनरुत्पादन (reintroduction) कार्यक्रम इसके सुधार के लिए आवश्यक हैं।
पहचान और व्यवहार
- रूप-रंग: लंबी चोंच वाला गिद्ध एक मध्यम आकार का मेहतर (scavenger) पक्षी है जिसके चौड़े पंख और भारी शरीर होता है। इसके पंख गहरे रंग के उड़ान पंखों के साथ हल्के भूरे-भूरे रंग के होते हैं। सड़े हुए मांस (carrion) को खाते समय पंखों को गंदा होने से बचाने के लिए सिर और गर्दन काफी हद तक नंगे होते हैं। मादाएं नर की तुलना में थोड़ी छोटी होती हैं।
- आदतें: ये गिद्ध सामाजिक होते हैं और आमतौर पर समूहों में भोजन करते हैं। वे गैर-प्रवासी हैं लेकिन शवों की तलाश में हर दिन 100 किलोमीटर तक की यात्रा कर सकते हैं। वे चट्टानों या ऊंचे पेड़ों पर घोंसले बनाते हैं और प्रति वर्ष केवल एक अंडा देते हैं, जिससे जनसंख्या सुधार धीमा होता है।
- पारिस्थितिक भूमिका: प्रकृति के सफाई दल (clean‑up crew) के रूप में, गिद्ध जानवरों के शवों को हटा देते हैं जो अन्यथा बीमारी को आश्रय दे सकते हैं। सड़े हुए मांस को जमा होने से रोककर, वे आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने और रेबीज (rabies) व अन्य बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं।
Melghat Tiger Reserve
Melghat Tiger Reserve मध्य भारत की सतपुड़ा पर्वतमाला में स्थित है। 1974 में स्थापित, यह Project Tiger के तहत पहले नौ बाघ अभ्यारण्यों में से एक था। यह रिजर्व महाराष्ट्र के अमरावती जिले में लगभग 2,768 वर्ग किलोमीटर को कवर करता है। परिदृश्य में खड़ी घाटियां और पठार हैं और यह ताप्ती नदी (Tapti River) और इसकी सहायक नदियों द्वारा सींचा जाता है। जंगलों में ऐन, हल्दू और बांस जैसी प्रजातियों के साथ सागौन (teak) का प्रभुत्व है। यह रिजर्व बाघ, तेंदुआ, गौर, स्लॉथ भालू, सांभर, नीलगाय, चीतल और गंभीर रूप से लुप्तप्राय वन उल्लू (forest owlet) को आश्रय देता है।
महत्व
इन गिद्धों का सफल विमोचन भारत के गिद्ध संरक्षण प्रयासों की प्रगति को दर्शाता है। मेलघाट में एक व्यवहार्य गिद्ध आबादी की स्थापना पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने और कुछ पशु चिकित्सा दवाओं के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगी। यह मेहतर पक्षियों (scavenging birds) के लिए सुरक्षित खाद्य स्रोतों और अबाधित आवासों को बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित करता है।