चर्चा में क्यों?
भारत के पश्चिमी तट पर दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (कांदला बंदरगाह) ने अपनी मेथनॉल बंकरिंग क्षमताओं (methanol bunkering capabilities) को उन्नत किया है, और उभरते हुए ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर (green shipping corridors) में खुद को एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया है। बंदरगाह ने एक परीक्षण (trial) किनारे-से-जहाज (shore-to-ship) बंकरिंग ऑपरेशन पूरा किया और इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ पोर्ट्स एंड हार्बर (International Association of Ports and Harbors) के पोर्ट रेडीनेस स्केल पर इसे लेवल 6 रेटिंग दी गई। ये कदम समुद्री परिवहन (maritime transport) को डीकार्बोनाइज (decarbonise) करने और कम कार्बन वाले ईंधन (low-carbon fuels) में संक्रमण (transition) की भारत की महत्वाकांक्षा का समर्थन करते हैं।
पृष्ठभूमि
मेथनॉल (CH3OH), जिसे मिथाइल अल्कोहल (methyl alcohol) या वुड अल्कोहल (wood alcohol) के रूप में भी जाना जाता है, सबसे सरल अल्कोहल है। ऐतिहासिक रूप से लकड़ी को डिस्टिलिंग (distilling wood) करके उत्पादित किया जाता है, अब यह उत्प्रेरक (catalyst) पर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन (सिंगैस - syngas) की प्रतिक्रिया करके निर्मित होता है। सिंगैस प्राकृतिक गैस, कोयले या बायोमास से प्राप्त किया जा सकता है, जो मेथनॉल को एक संभावित नवीकरणीय ईंधन (renewable fuel) बनाता है।
गुण और अनुप्रयोग (Properties and applications)
- भौतिक विशेषताएं (Physical characteristics): मेथनॉल एक रंगहीन, वाष्पशील (volatile) तरल है जिसमें हल्की मीठी गंध होती है। यह पानी के साथ पूरी तरह से मिल जाता है और लगभग अदृश्य लौ (invisible flame) के साथ जलता है। एक ईंधन के रूप में उपयोगी होने पर, अगर इसे निगल लिया जाए तो यह जहरीला (toxic) होता है।
- रासायनिक फीडस्टॉक (Chemical feedstock): बड़ी मात्रा में मेथनॉल को रेजिन (resins), प्लास्टिक और कपड़ा के लिए फॉर्मलाडेहाइड (formaldehyde) में परिवर्तित किया जाता है, और एयरोसोल प्रोपेलेंट (aerosol propellants) और डीजल विकल्प के रूप में उपयोग किए जाने वाले डाइमिथाइल ईथर (dimethyl ether) में परिवर्तित किया जाता है। इसका उपयोग विलायक (solvent) के रूप में और फार्मास्यूटिकल्स और इत्र के उत्पादन में भी किया जाता है।
- ईंधन क्षमता (Fuel potential): मेथनॉल में उच्च ऑक्टेन रेटिंग (octane rating) होती है और इसे गैसोलीन के साथ मिश्रित किया जा सकता है या विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए इंजन (designed engines) में सीधे उपयोग किया जा सकता है। इसे तेजी से समुद्री ईंधन (marine fuel) के लिए माना जाता है क्योंकि यह पारंपरिक बंकर ईंधन की तुलना में कम पार्टिकुलेट (particulates) और सल्फर ऑक्साइड (sulphur oxides) पैदा करता है।
दीनदयाल बंदरगाह की पहल (Deendayal Port’s initiative)
- मौजूदा बुनियादी ढांचा (Existing infrastructure): कांदला बंदरगाह ने लंबे समय से मेथनॉल को कार्गो (cargo) के रूप में संभाला है और इसमें स्टोरेज टैंक, पाइपलाइन और जेटी (jetties) ईंधन के अनुकूल हैं। बंकरिंग के लिए इन सुविधाओं को अपग्रेड करने से बंदरगाह दोहरे-ईंधन वाले जहाजों (dual-fuel ships) को ईंधन भरने के लिए तैयार होता है।
- परीक्षण बंकरिंग (Trial bunkering): अप्रैल 2026 में बंदरगाह ने स्टोल्ट टैंकर (Stolt Tankers) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) जैसे भागीदारों के साथ मिलकर सुरक्षा प्रोटोकॉल (safety protocols) और स्थानांतरण प्रक्रियाओं को मान्य करने के लिए एक किनारे-से-जहाज बंकरिंग परीक्षण किया।
- ग्रीन शिपिंग कॉरिडोर: बंदरगाह का लक्ष्य एशिया और यूरोप के बीच चलने वाले जहाजों के लिए 2028-29 तक प्रति वर्ष लगभग 500,000 टन नवीकरणीय ई-मेथनॉल (renewable e-methanol) की आपूर्ति करना है। मेथनॉल और अमोनिया जैसे स्वच्छ ईंधन को अपनाकर, भारत 2050 तक शिपिंग में शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (net-zero emissions) प्राप्त करने के वैश्विक प्रयासों के साथ संरेखित (aligns) होता है।
समुद्री ईंधन के रूप में मेथनॉल के लाभ
- कम उत्सर्जन (Lower emissions): भारी ईंधन तेल (heavy fuel oil) की तुलना में, मेथनॉल कम ग्रीनहाउस गैसों, पार्टिकुलेट और नाइट्रोजन ऑक्साइड (nitrogen oxides) का उत्पादन करता है। जब अक्षय फीडस्टॉक (renewable feedstocks) से बनाया जाता है, तो यह जहाज के कार्बन पदचिह्न (carbon footprint) को काफी कम कर सकता है।
- सुरक्षा लाभ (Safety advantages): गैसोलीन या डीजल की तुलना में मेथनॉल में विनाशकारी आग या रिसाव (spills) का जोखिम कम होता है क्योंकि यह पानी में घुल जाता है और जल्दी से वाष्पित हो जाता है।
- विविध फीडस्टॉक (Diverse feedstocks): प्राकृतिक गैस, बायोमास या कैप्चर किए गए कार्बन से मेथनॉल का उत्पादन करने की क्षमता ऊर्जा सुरक्षा (energy security) और लचीलापन (flexibility) प्रदान करती है।
निष्कर्ष
मेथनॉल बंकरिंग का बीड़ा उठाकर (pioneering), कांदला बंदरगाह भारत को स्थायी समुद्री परिवहन (sustainable maritime transport) में सबसे आगे रख रहा है। मेथनॉल और अन्य कम-कार्बन ईंधन को व्यापक रूप से अपनाना वैश्विक शिपिंग उद्योग के लिए व्यापार को चालू रखते हुए जलवायु लक्ष्यों (climate goals) को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
स्रोत: पीआईबी (PIB)