राज्य व्यवस्था

Public Accounts Committee: पीएसी के कार्य, संसद और राजनीति

Public Accounts Committee: पीएसी के कार्य, संसद और राजनीति

खबरों में क्यों?

22 मई 2026 को संसद की पुनर्गठित (reconstituted) लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee - PAC) ने अपनी पहली बैठक आयोजित की। सत्तारूढ़ दल (ruling party) के सदस्यों ने तब आपत्तियां (objections) उठाईं जब अध्यक्ष के. सी. वेणुगोपाल (K. C. Venugopal) ने अपनी पहल (suo motu) पर कुछ विषयों को लेने का प्रस्ताव रखा। समिति ने ऑडिट टिप्पणियों (audit observations) पर मंत्रालयों द्वारा एक्शन टेकन नोट्स (Action Taken Notes) जमा करने में देरी पर भी चिंता व्यक्त की।

पृष्ठभूमि

PAC भारत में सबसे पुरानी संसदीय समिति है, जिसे सरकारी खर्च की जांच करने के लिए औपनिवेशिक युग (colonial era) के दौरान 1921 में बनाया गया था। स्वतंत्रता के बाद यह लोकसभा (Lok Sabha) के नियम 308 के तहत स्पीकर द्वारा प्रतिवर्ष नियुक्त की जाने वाली एक संसदीय समिति (parliamentary committee) बन गई। समिति में अब 22 सदस्य हैं - लोकसभा से 15 और राज्यसभा (Rajya Sabha) से 7। मंत्री सदस्य नहीं हो सकते; यदि किसी सदस्य को मंत्री नियुक्त किया जाता है, तो उन्हें समिति से इस्तीफा देना होगा। 1967 के बाद से अध्यक्ष पारंपरिक रूप से विपक्ष (opposition) से रहा है। PAC का प्राथमिक काम विनियोग खातों (appropriation accounts), वित्त खातों (finance accounts) और नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General - CAG) की रिपोर्टों की जांच करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धन कानूनी रूप से खर्च किया गया है, संसद द्वारा मतदान किए गए अनुदानों (grants) के भीतर और इच्छित उद्देश्य के लिए। यह राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों, स्वायत्त निकायों (autonomous bodies) और अतिरिक्त व्यय (excess expenditure) या वित्तीय अनियमितताओं (financial irregularities) के मामलों के खातों की भी समीक्षा करता है। समिति सरकारी नीति पर सवाल नहीं उठाती है; इसका ध्यान वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही (accountability) पर है।

हाल के मुद्दे

  • एक्शन टेकन नोट्स का बैकलॉग (Backlog of Action Taken Notes): कई मंत्रालयों ने PAC टिप्पणियों का तुरंत जवाब नहीं दिया है। देरी से CAG निष्कर्षों (findings) पर समय पर चर्चा और अनुवर्ती कार्रवाई (follow‑up) में बाधा आती है।
  • स्वप्रेरणा परीक्षा (Suo motu examinations): विशिष्ट CAG रिपोर्ट के बिना मुद्दों की जांच करने के अध्यक्ष के प्रस्ताव ने बहस छेड़ दी। सदस्यों ने तर्क दिया कि समिति को स्पीकर द्वारा संदर्भित (referred) मामलों या ओवररीच (overreach) से बचने के लिए ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर मामलों पर टिके रहना चाहिए।
  • निगरानी को मजबूत करना (Strengthening oversight): दक्षता (efficiency) में सुधार के लिए, सदस्यों ने ऑडिट पैराग्राफ (audit paras) की बेहतर डिजिटल ट्रैकिंग, नियमित बैठकों और लंबित प्रतिक्रियाओं (pending responses) को साफ करने के लिए मंत्रालयों के साथ निकट समन्वय (closer coordination) का सुझाव दिया।

निष्कर्ष

PAC मंत्रालयों को उनके खर्च के लिए जवाबदेह ठहराकर सार्वजनिक वित्त की सुरक्षा (safeguarding public finances) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऑडिट टिप्पणियों पर समय पर प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना और समिति की प्रक्रियाओं का सम्मान करना संसद के निरीक्षण कार्य (oversight function) को बनाए रखने में मदद करेगा। नवीनतम बैठक समिति के महत्व और वित्तीय अनुशासन (financial discipline) को लागू करने में आने वाली चुनौतियों दोनों को उजागर करती है।

स्रोत

The Hindu

Sign in Today’s news
Current affairs Daily news Daily quiz News Blitz Shorts Economic Survey 2025-26 Subjects
Polity Economy Geography Environment History Science & Tech Intl. Relations Internal Security Art & Culture Social Issues
All subjects Exam info UPSC Syllabus Prelims syllabus Mains syllabus Exam pattern Eligibility & attempts OBC & EWS checker Resources How to prepare for UPSC Prepare with a job Free downloads Books & NCERTs Previous year papers Video notes YouTube channel