समाचार में क्यों?
26 March 2026 को CSIR-Central Road Research Institute (CRRI) ने भारत के सड़क निर्माण कार्यक्रम में waste foundry sand को शामिल करने के लिए Institute of Indian Foundrymen और एक निजी भागीदार के साथ एक सहयोग पर हस्ताक्षर किए। यह पहल छोड़ी गई कास्टिंग रेत को टिकाऊ राजमार्ग सब-बेस सामग्री में बदलकर steel-slag सड़कों की सफलता को दोहराने का प्रयास करती है। इस साझेदारी का उद्देश्य ऐसे प्रोटोकॉल, प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रायोगिक परियोजनाएं विकसित करना है जो औद्योगिक कचरे को बुनियादी ढांचे में एक मूल्यवान संसाधन बना सकें。
पृष्ठभूमि
Foundries रेत से बने सांचों में पिघली हुई धातुओं को डालकर धातु के पुर्जे बनाती हैं। धातु के ठोस होने के बाद रेत के सांचे टूट जाते हैं और अधिकांश रेत अपशिष्ट उत्पाद बन जाती है। दो मुख्य प्रकार की foundry sand का उपयोग किया जाता है:
- Green sand: कास्टिंग की फिनिश को बेहतर बनाने के लिए इसमें उच्च गुणवत्ता वाली सिलिका को 5-10 प्रतिशत बेंटोनाइट क्ले, 2-5 प्रतिशत पानी और लगभग 5 प्रतिशत सी-कोल के साथ मिलाया जाता है। चूंकि green sand का केवल सीमित बार ही पुन: उपयोग किया जा सकता है, इसलिए अंततः बड़ी मात्रा में इसे फेंक दिया जाता है।
- Chemically bonded sand: यह सटीक कास्टिंग के लिए सांचे बनाने हेतु रेजिन या अन्य बाइंडर्स का उपयोग करती है। इन रेतों को रीसायकल करना मुश्किल होता है और आमतौर पर एक बार उपयोग के बाद इनका निपटान कर दिया जाता है।
Waste foundry sand (WFS) का निपटान एक चुनौती है क्योंकि यह भूमि घेरता है, यदि इसे ठीक से प्रबंधित नहीं किया गया तो रसायन रिस सकते हैं और अक्सर यह लैंडफिल में समाप्त हो जाता है। विश्व स्तर पर, शोधकर्ताओं ने एक चक्रीय अर्थव्यवस्था (circular economy) को बढ़ावा देने के लिए निर्माण सामग्री, कंक्रीट और मिट्टी में WFS का उपयोग करने का प्रयोग किया है।
कार्यक्रम कैसे काम करेगा?
- अपशिष्ट रेत की विशेषताएं (Characterising waste sand): CRRI के वैज्ञानिक अनाज के आकार, रासायनिक संरचना और लीचेबिलिटी (leachability) को समझने के लिए विभिन्न foundries से नमूनों का विश्लेषण करेंगे ताकि भारतीय परिस्थितियों के लिए दिशा-निर्देशों को अनुकूलित किया जा सके।
- सड़क निर्माण प्रोटोकॉल विकसित करना: प्रयोगशाला परीक्षणों के आधार पर भागीदार सब-बेस परतों में प्राकृतिक एग्रीगेट्स (aggregates) के साथ WFS को मिलाने के लिए मानक प्रक्रियाएं तैयार करेंगे। इसका उद्देश्य लागत कम रखते हुए पर्याप्त संघनन (compaction), मजबूती और जल निकासी (drainage) सुनिश्चित करना है।
- प्रशिक्षण और प्रायोगिक परियोजनाएं: नए प्रोटोकॉल लागू करने के लिए इंजीनियरों, ठेकेदारों और लोक निर्माण विभागों को प्रशिक्षित किया जाएगा। सड़क के प्रदर्शन खंड यह प्रदर्शित करेंगे कि वास्तविक यातायात भार के तहत WFS कैसे काम करता है।
- चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular economy) के लाभ: WFS के उपयोग से नई रेत और बजरी की आवश्यकता कम होती है, औद्योगिक कचरे को लैंडफिल से दूर किया जाता है और उत्खनन (quarrying) से जुड़े ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जन में कमी आती है। यह foundries के लिए नए राजस्व स्रोत भी खोलता है।
महत्व
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण: भारत का सड़क क्षेत्र बड़ी मात्रा में एग्रीगेट्स का उपभोग करता है। Foundry sand को शामिल करने से नदियों और पहाड़ियों पर दबाव कम हो सकता है जहां रेत का खनन होता है।
- प्रदूषण कम करना: ठीक से एनकैप्सुलेटेड WFS धातुओं और रसायनों के रिसाव को रोक सकता है, साथ ही foundry साइटों के आसपास वायु और मिट्टी के प्रदूषण को भी कम कर सकता है।
- नवाचार को बढ़ावा देना: यह पहल steel-slag सड़कों की सफलता पर आधारित है और औद्योगिक उपोत्पादों (by-products) को बुनियादी ढांचे के इनपुट में परिवर्तित करके "waste-to-wealth" मिशन को मजबूत करती है।
निष्कर्ष
Waste foundry sand को लंबे समय से निपटान की समस्या के रूप में देखा जाता था, लेकिन अनुसंधान और प्रायोगिक परियोजनाएं इसे एक अवसर में बदल रही हैं। स्पष्ट मानक स्थापित करके और उद्योग तथा सरकार दोनों को शामिल करके, नया कार्यक्रम हरियाली वाली सड़कों और अधिक टिकाऊ विनिर्माण क्षेत्र का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
स्रोत: Press Information Bureau