समाचारों में क्यों?
भारतीय नौसेना 22 जुलाई 2026 को मालवन (Malvan) को चालू (commission) करेगी। यह माहे (Mahe) श्रेणी का दूसरा जहाज है। यह पोत तटीय जल में पनडुब्बी रोधी कार्य के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका चालू होना भारत की स्थानीय रूप से निर्मित उथले जल युद्ध क्षमता को मजबूत करता है।
पृष्ठभूमि
मालवन एक पनडुब्बी रोधी युद्धक शैलो वाटर क्राफ्ट (Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft) है जिसे भारतीय नौसेना के लिए बनाया गया है।
पनडुब्बी रोधी युद्ध में शत्रु पनडुब्बियों का पता लगाना, ट्रैकिंग और संभावित विनाश शामिल है।
शैलो-वाटर (उथले-पानी के) शिल्प तटों, बंदरगाहों और महत्वपूर्ण समुद्री दृष्टिकोणों के करीब काम करते हैं।
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited) ने कोच्चि में मालवन का निर्माण किया; यह सार्वजनिक क्षेत्र के जहाज निर्माता से मंगाए गए आठ जहाजों में से एक है।
नौसेना ने 30 अप्रैल 2019 को निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
नए माहे श्रेणी के जहाज पुराने अभय श्रेणी (Abhay-class) के पनडुब्बी रोधी कार्वेट की जगह लेंगे, जो छोटे युद्धपोत हैं।
मालवन कमिशनिंग (चालू होने के) चरण तक कैसे पहुंचा?
- नौसेना ने अप्रैल 2019 में आठ उथले-पानी के पनडुब्बी रोधी जहाजों का आदेश दिया।
- माहे (Mahe), मालवन (Malvan) और मांगरोल (Mangrol) को 30 नवंबर 2023 को एक साथ लॉन्च किया गया था।
- कोचीन शिपयार्ड ने 31 मार्च 2026 को नौसेना को मालवन सौंपा।
- नौसेना ने इसे 22 जुलाई 2026 को चालू करने का कार्यक्रम तय किया है।
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता करेंगे।
पश्चिमी नौसेना कमान (Western Naval Command) के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन भी इसमें शामिल होंगे।
तीन अलग-अलग चरण: लॉन्चिंग (Launching) एक जहाज को पानी में डालती है; डिलीवरी (delivery) इसे नौसेना को स्थानांतरित करती है। कमिशनिंग (Commissioning) इसे सक्रिय सेवा में रखती है।
जहाज का नाम मालवन क्यों रखा गया है?
मालवन महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में एक ऐतिहासिक तटीय शहर है।
इस क्षेत्र की एक लंबी समुद्री परंपरा है; सिंधुदुर्ग किला (Sindhudurg Fort) सत्रहवीं शताब्दी के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज के अधीन बनाया गया था।
जहाज का नाम एक आधुनिक नौसैनिक मंच को भारत के तटीय इतिहास से जोड़ता है।
पोत की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
- मालवन लगभग 78 मीटर लंबा और 11.36 मीटर चौड़ा है।
- इसका उथला ड्राफ्ट (shallow draught) लगभग 2.7 मीटर है।
- इसकी अधिकतम गति लगभग 25 नॉट (knots) है।
- एक नॉट प्रति घंटे एक समुद्री मील (nautical mile) के बराबर होता है।
- पच्चीस नॉट लगभग 46 किलोमीटर प्रति घंटे है।
- इसकी सहनशक्ति (endurance) लगभग 1,800 समुद्री मील है।
- मानक रूपांतरण के तहत यह दूरी लगभग 3,334 किलोमीटर है।
उथला ड्राफ्ट पोत को तट के करीब काम करने में मदद करता है।
कोचीन शिपयार्ड इस वर्ग को डीजल इंजन और वॉटरजेट (waterjets) का उपयोग करने वाले नौसेना के सबसे बड़े युद्धपोतों के रूप में वर्णित करता है।
एक वॉटरजेट पानी खींचता है और उसे पीछे की ओर धकेलता है; प्रतिक्रिया पोत को आगे बढ़ाती है।
वॉटरजेट त्वरित पैंतरेबाज़ी का समर्थन करते हैं और एक खुले बाहरी प्रोपेलर (propeller) से बचते हैं; ये गुण भीड़भाड़ वाले और उथले पानी के अनुकूल हैं।
इसमें क्या उपकरण होते हैं?
आधिकारिक विज्ञप्तियां हल्के टॉरपीडो (torpedoes) और स्थानीय रूप से विकसित पनडुब्बी रोधी रॉकेट की पहचान करती हैं।
शिल्प में उथले पानी की स्थिति के लिए डिज़ाइन किए गए उन्नत सोनार सिस्टम भी होते हैं।
सोनार पानी के माध्यम से ध्वनि भेजता है और लौटने वाली गूँज का अध्ययन करता है; ये गूँज एक पानी के नीचे की वस्तु को प्रकट कर सकती हैं।
जहाज समन्वित तटीय संचालन के लिए हथियारों और आधुनिक संचार प्रणालियों के साथ इन सेंसरों को जोड़ता है।
तट के पास पनडुब्बी का पता लगाना मुश्किल क्यों है?
उथले समुद्र समुद्र तल, सतह, चट्टानों और बंदरगाह संरचनाओं से भ्रमित करने वाले ध्वनि प्रतिबिंब बनाते हैं।
मछली पकड़ने वाले जहाज, व्यापारी जहाज और तटीय गतिविधियां पृष्ठभूमि शोर को जोड़ती हैं।
तापमान, लवणता और धाराएँ भी पानी के नीचे ध्वनि के मार्ग को बदल सकती हैं।
एक छोटी पनडुब्बी इन संकेतों के बीच छिप सकती है; इसलिए विशेष सोनार और प्रशिक्षित ऑपरेटर आवश्यक हैं।
मालवन कौन से मिशन कर सकता है?
- यह पनडुब्बियों की खोज कर सकता है और बंदरगाहों और समुद्री मार्गों के पास पानी के नीचे की गतिविधियों की निगरानी कर सकता है।
- यह खोज और बचाव कार्यों (search and rescue operations) का समर्थन कर सकता है और कम तीव्रता वाले (low-intensity) समुद्री सुरक्षा कार्य कर सकता है।
- यह सीमित माइन-लेइंग (mine-laying) संचालन कर सकता है।
कम-तीव्रता वाले ऑपरेशन पूर्ण पैमाने पर नौसैनिक युद्ध से नीचे के सुरक्षा मिशन हैं।
माइन-लेइंग उन जगहों पर विस्फोटक उपकरण रखती है जहां से शत्रुतापूर्ण जहाज गुजर सकते हैं।
ये भूमिकाएं नौसैनिक ठिकानों, वाणिज्यिक बंदरगाहों और तटीय शिपिंग मार्गों की रक्षा करती हैं।
पोत कितना स्वदेशी है?
नौसेना की कमीशनिंग रिलीज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री की रिपोर्ट दी गई है।
भारतीय फर्मों ने कई प्रणालियों और घटकों की आपूर्ति की; यह एक व्यापक घरेलू नेटवर्क में नौसैनिक निर्माण को फैलाता है।
स्थानीय निर्माण जहाज के सेवा जीवन के दौरान रखरखाव, उन्नयन और आपूर्ति सुरक्षा का भी समर्थन करता है।
प्रारंभिक परीक्षा का बिंदु (Prelims point): मालवन दूसरा माहे श्रेणी का पोत है; कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड इस श्रेणी के आठ जहाजों का निर्माण कर रहा है।
निष्कर्ष
मालवन नौसेना में एक विशेष तटीय रक्षा मंच जोड़ता है; इसका स्थानीय निर्माण भारत की समुद्री औद्योगिक क्षमता को भी मजबूत करता है।