अर्थव्यवस्था

Kashmir Saffron: निर्यात मांग, GI टैग और कृषि महत्व

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चर्चा में क्यों?

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ईरान के केसर उत्पादन में गिरावट ने 2026 में कश्मीरी केसर (Kashmir saffron) की मांग को बढ़ा दिया है। कीमतें बढ़कर लगभग ₹350 प्रति ग्राम हो गई हैं, और यूएई, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में निर्यात बढ़ गया है। अनियमित बारिश के कारण घरेलू उत्पादन में हालिया गिरावट के बावजूद किसानों को बेहतर बाजार की उम्मीद है。

पृष्ठभूमि

केसर, जिसे अक्सर "लाल सोना" (red gold) कहा जाता है, क्रोकस सैटिवस (Crocus sativus) के सूखे स्टिग्मा (stigmas) से आता है। कश्मीर का पंपोर क्षेत्र (Pampore region) और पुलवामा (Pulwama) में आसपास के खेत दुनिया भर में उन कुछ स्थानों में से हैं जहां केसर लगभग 1,600 मीटर की ऊंचाई पर उगता है। उत्पाद को मई 2020 में एक भौगोलिक संकेत (Geographical Indication - GI) टैग मिला, जो इसके अनूठे रंग, सुगंध और स्वाद को मान्यता देता है। जम्मू और कश्मीर में लगभग 3,700 हेक्टेयर में केसर की खेती होती है। बारिश के कम दौर के कारण उत्पादन 2023-24 में 23.5 मीट्रिक टन से गिरकर 2024-25 में लगभग 19.6 टन हो गया。

कश्मीरी केसर के प्रकार

  • मोंगरा/मोगरा (Mongra/Mogra): स्टिग्मा का ऊपरी लाल भाग। यह सबसे महंगी और सुगंधित किस्म है।
  • लाचा (Lacha): इसमें लाल और पीले दोनों भागों सहित पूरा स्टिग्मा होता है। यह मोंगरा से थोड़ा कम खर्चीला है।
  • जर्दा/गुच्ची (Zarda/Gucci): स्टिग्मा का निचला पीला भाग। यह सस्ता है और मुख्य रूप से रंगने के लिए उपयोग किया जाता है।

हाल के रुझान

  • कीमत में वृद्धि: व्यापारियों की रिपोर्ट है कि खुदरा कीमतें (retail prices) 2025 की शुरुआत में लगभग ₹250 प्रति ग्राम से बढ़कर 2026 के मध्य में लगभग ₹350 प्रति ग्राम हो गई हैं।
  • निर्यात बाजार: ईरानी आपूर्ति कम होने से खाड़ी देशों, अमेरिका और यूरोप में मांग बढ़ी है।
  • मौसम की चुनौतियां: किसानों का ध्यान है कि केसर को अगस्त और नवंबर के बीच बारिश के कई दौरों की आवश्यकता होती है। जलवायु परिवर्तनशीलता ने फूल आने और पैदावार को कम कर दिया है।
  • मूल्य संवर्धन (Value addition): GI टैग असली कश्मीरी केसर को प्रमाणित करने में मदद करता है और किसानों को मिलावट से बचाता है। 'एक जिला एक उत्पाद' (One District One Product) पहल के तहत सरकारी कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रसंस्करण और विपणन में सुधार करना है।

निष्कर्ष

कश्मीरी केसर अपने गहरे रंग और सुगंध के लिए बेशकीमती बना हुआ है। वर्तमान वैश्विक कमी उत्पादकों के लिए एक अवसर प्रदान करती है, लेकिन लाभ को अधिकतम और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सिंचाई, भंडारण और बाजार तक पहुंच में निरंतर निवेश की आवश्यकता है。

स्रोत: NIE
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