चर्चा में क्यों?
मिशन कर्मयोगी सरकारी कर्मियों के कौशल, ज्ञान और कार्य संबंधी दृष्टिकोण को विकसित करने के लिए भारत का कार्यक्रम है। इस विषय से जुड़ा पिछला कार्यशाला विवरण इसके डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म पर सर्वेक्षण, मूल्यांकन और डैशबोर्ड सुविधाओं की शुरुआत का वर्णन करता है। वह कार्यक्रम 2 मई 2023 को हुआ था; यह कार्यक्रम की पृष्ठभूमि है, न कि अक्टूबर 2026 की कोई नई शुरुआत। सितंबर 2020 में शुरू किए गए इस बड़े सुधार का उद्देश्य प्रशिक्षण को विशेष लोक-सेवा भूमिकाओं की आवश्यकताओं से जोड़ना है। इसका महत्व शिक्षण को केवल भर्ती के बाद किए जाने वाले पाठ्यक्रम के बजाय सरकारी कार्य का एक निरंतर हिस्सा बनाने में निहित है। व्यावहारिक प्रश्न यह है कि क्या प्रासंगिक शिक्षण से अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के पालन और नागरिकों की सेवा करने के तरीके में सुधार होता है।
प्रशिक्षण की शुरुआत भूमिका से होना क्यों आवश्यक है
किसी अधिकारी की जिम्मेदारियां उसे सौंपे गए कार्य पर निर्भर करती हैं, न कि केवल उसके पदनाम या सेवा के वर्षों पर। एक भूमिका के लिए तकनीकी ज्ञान, संवाद, निर्णय क्षमता और अन्य संस्थाओं के साथ समन्वय की आवश्यकता हो सकती है। इन आवश्यकताओं की अनदेखी करने वाला प्रशिक्षण वास्तविक कमी को दूर किए बिना केवल प्रमाणपत्र जोड़ सकता है। मिशन कर्मयोगी जिम्मेदारियों और शिक्षण के बीच के संबंध को अधिक स्पष्ट बनाने का प्रयास करता है।
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग इसे नियम-आधारित से भूमिका-आधारित क्षमता निर्माण की ओर बदलाव के रूप में वर्णित करता है। यह कानूनों या सेवा नियमों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं है। यह बदलाव इस बात से संबंधित है कि प्रशिक्षण आवश्यकताओं और कर्मियों की क्षमताओं को कैसे समझा जाता है। शुरुआती प्रश्न यह बन जाता है कि किसी विशेष पद को नियंत्रित करने वाले नियमों के साथ-साथ व्यक्ति को उस कार्य में क्या करने में सक्षम होना चाहिए।
एक दक्षता (competency) वह ज्ञान, कौशल, व्यवहार या अन्य क्षमता है जो प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए आवश्यक होती है। किसी प्रक्रिया को जानना, उसे सही ढंग से लागू करना और उसे स्पष्ट रूप से समझाना आपस में जुड़ी हुई लेकिन अलग-अलग क्षमताएं हैं। एक उपयोगी शिक्षण योजना को यह पहचानना चाहिए कि किस क्षमता के विकास की आवश्यकता है। सभी को एक ही सामग्री प्रदान करना अलग-अलग जिम्मेदारियों को पूरा करने का स्वतः सबसे अच्छा तरीका नहीं है।
यह कार्यक्रम अपनी वेबसाइट से कहीं बड़ा है
इसका औपचारिक नाम सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसकी रूपरेखा में नीति, संस्थागत व्यवस्थाएं, दक्षताएं, डिजिटल शिक्षण, इलेक्ट्रॉनिक कार्मिक प्रबंधन और मूल्यांकन शामिल हैं। ये तत्व स्पष्ट करते हैं कि इस मिशन को केवल पाठ्यक्रमों की एक सूची तक सीमित क्यों नहीं किया जा सकता है। सामग्री, मानकों और सीखे गए ज्ञान को लागू करने के अवसरों को विभागों के कार्य संगठित करने के तरीके से जुड़ना होगा।
क्षमता निर्माण आयोग, या CBC, मिशन की रूपरेखा और मानकों को विकसित करता है तथा संस्थागत क्षमता निर्माण का समर्थन करता है। इसकी जिम्मेदारियों में मंत्रालयों और विभागों को योजनाएं तैयार करने में मदद करना, सामग्री के सत्यापन को बढ़ावा देना और परिणामों की जांच करना शामिल है। सरकार के स्वामित्व वाली इकाई कर्मयोगी भारत ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म का संचालन करती है। इसलिए आयोग और प्लेटफॉर्म संचालक एक ही मिशन के भीतर अलग-अलग कार्य करते हैं।
कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग व्यापक प्रशासनिक परिवेश प्रदान करता है। केंद्रीय मंत्रालय और विभाग कार्य से जुड़ी अपनी शिक्षण आवश्यकताओं की पहचान स्वयं करते हैं। मूल कार्यक्रम की रूपरेखा इच्छुक राज्यों को भी इस दृष्टिकोण के साथ क्षमता-निर्माण योजनाओं को संरेखित करने में सक्षम बनाती है। यह इस दावे से भिन्न है कि प्रत्येक राज्य, कर्मचारी या संस्था ने पहले ही एक समान प्रणाली लागू कर ली है।
डिजिटल शिक्षण इस रूपरेखा में कैसे फिट बैठता है
इस प्लेटफॉर्म को इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग कर्मयोगी कहा जाता है, जिसे आमतौर पर iGOT कर्मयोगी लिखा जाता है। यह ऐसे शिक्षण संसाधन प्रदान करता है जिन तक अधिकारी हमेशा किसी आवासीय प्रशिक्षण केंद्र की यात्रा किए बिना पहुंच सकते हैं। मई 2023 की कार्यशाला का विवरण चर्चा, कार्यक्रम और नेटवर्किंग सुविधाओं का भी वर्णन करता है। ये व्यक्तिगत अध्ययन के साथ-साथ विचारों के आदान-प्रदान और संवाद का समर्थन कर सकती हैं।
डिजिटल पहुंच एक साधन है, अंतिम उद्देश्य नहीं। एक शिक्षार्थी को अभी भी उपयुक्त सामग्री, अध्ययन के लिए समय और कौशल का उपयोग करने के अवसर की आवश्यकता होती है। यह कार्यक्रम निरंतर शिक्षण को सार्वजनिक रोजगार के व्यावहारिक परिवेश के साथ जोड़ता है। इसलिए एक ऑनलाइन मॉड्यूल को हर कार्य के लिए पूर्ण तैयारी मान लेने के बजाय प्रासंगिक कार्यस्थल अनुभव के पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए।
पूर्व घोषणा में वर्णित मूल्यांकन और डैशबोर्ड सुविधाएं शिक्षण के अधिक स्पष्ट रिकॉर्ड का समर्थन करती हैं। मूल्यांकन यह बताने में मदद कर सकते हैं कि सामग्री को समझा गया है या नहीं; डैशबोर्ड जानकारी को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं। इनमें से कोई भी स्वतः यह साबित नहीं करता कि किसी विभाग की सेवाओं में सुधार हुआ है। उसके लिए कार्य वातावरण में प्रदर्शन से जुड़े साक्ष्यों की आवश्यकता होती है।
एक साझा दक्षता भाषा
CBC का कर्मयोगी दक्षता मॉडल लोक सेवा से संबंधित क्षमताओं का वर्णन करने का एक साझा तरीका प्रदान करता है। आयोग अक्टूबर 2024 में राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह के दौरान इसके शुभारंभ को दर्ज करता है। यह शिक्षण सामग्री को भूमिकाओं के लिए आवश्यक दक्षताओं से जोड़ता है। इससे किसी कार्य, शिक्षण अंतराल और उपयुक्त पाठ्यक्रम के बीच के संबंध को पहचानना आसान हो सकता है।
साझा ढांचा संस्थाओं को प्रत्येक पाठ्यक्रम को एक अलग-थलग उत्पाद मानने से बचने में भी मदद करता है। यदि विभिन्न प्रदाता क्षमताओं का एक समान रूप से वर्णन करते हैं, तो विभाग शिक्षण अवसरों की अधिक सार्थक तुलना कर सकते हैं। हालांकि, मैप किए गए पाठ्यक्रम को अभी भी सटीक सामग्री और उपयुक्त मूल्यांकन की आवश्यकता होती है। केवल दक्षता का लेबल लगा देना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि पाठ्यक्रम उसे अच्छी तरह विकसित करता है।
भागीदारी से उपयोगी प्रदर्शन तक
पंजीकरण, उपस्थिति और पाठ्यक्रम पूरा करना शिक्षण में भागीदारी को दर्शाते हैं। एक परीक्षा ज्ञान के किसी विशेष क्षेत्र में सुधार दिखा सकती है। कार्यस्थल पर उस सीख को विश्वसनीय रूप से लागू करना एक अलग चरण है। बेहतर लोक सेवा एक और आगे का परिणाम है जो कर्मचारियों की संख्या, प्रक्रियाओं, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन पर भी निर्भर कर सकता है। इन चरणों को सफलता के किसी एक ही आंकड़े में समेटा नहीं जाना चाहिए।
आयोग का प्रदर्शन-मापन दृष्टिकोण व्यक्तिगत क्षमता, संगठनात्मक प्रदर्शन और सरकार के नागरिक-केंद्रित उद्देश्य को जोड़ने पर जोर देता है। इसलिए मूल्यांकन को केवल बढ़ती हुई सूची या बड़ी संख्या में प्रमाणपत्रों से कहीं अधिक की आवश्यकता है। इसे यह जांचना चाहिए कि क्या प्रासंगिक क्षमता अंतरालों को संबोधित किया गया और क्या अधिकारी अपनी सौंपी गई जिम्मेदारियों में उस सीख का उपयोग कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए, कार्यक्रम के किसी रिपोर्ट किए गए परिणाम के बजाय एक दृष्टांत के रूप में, प्रशिक्षण किसी शिकायत निवारण प्रक्रिया के बारे में अधिकारी की समझ को बेहतर बना सकता है। सेवा में सुधार के लिए आवश्यक होगा कि वह समझ वास्तविक शिकायतों के बेहतर निपटान में परिवर्तित हो। स्पष्ट जिम्मेदारियां, उपयोग करने योग्य प्रणालियां और फीडबैक तब भी मायने रखेंगे। यही कारण है कि शिक्षण सुधार और कार्यस्थल सुधार को एक-दूसरे को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
मिशन कर्मयोगी का केंद्रीय विचार निरंतर शिक्षण को सार्वजनिक कार्य के लिए आवश्यक क्षमताओं से जोड़ना है। डिजिटल पहुंच, साझा ढांचे और विभागीय योजनाएं उस संबंध को बनाने में मदद कर सकती हैं। अधिक कठिन परीक्षा यह है कि क्या अधिकारी जो सीखते हैं उसे लागू करते हैं और क्या सेवाओं में सुधार होता है। पाठ्यक्रम और प्रमाणपत्र उपयोगी इनपुट हैं, लेकिन कार्यक्रम का सार्वजनिक उद्देश्य सक्षम और उत्तरदायी प्रशासन बना रहता है।