पर्यावरण

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण: आक्रामक विदेशी प्रजातियों पर पैनल

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समाचार में क्यों?

National Biodiversity Authority ने आक्रामक विदेशी प्रजातियों (Invasive alien species) पर एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया। न्यायाधिकरण की कार्यवाही (Tribunal proceedings) के बाद March 2026 में इस पैनल का गठन किया गया था। यह एक राष्ट्रीय सूची तैयार करेगा और प्रबंधन उपायों की सिफारिश करेगा। 28 July के आर्काइव (Archive) ने इस पहले के निर्णय पर फिर से विचार किया।

पृष्ठभूमि

जैव विविधता (Biodiversity) का अर्थ है जीवन की विविधता और उसके पारिस्थितिक संबंध।

इसमें जीनों (Genes) के भीतर, प्रजातियों के बीच और पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystems) में विविधता शामिल है।

लोग भोजन, चिकित्सा, पानी और आजीविका के लिए जैव विविधता पर निर्भर हैं, जबकि इसकी गिरावट पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता को कमजोर कर सकती है।

भारत का जैव विविधता ढांचा कैसे विकसित हुआ

वर्ष विकास
1992 Convention on Biological Diversity रियो (Rio) में हस्ताक्षर के लिए खुला।
2002 भारत ने Biological Diversity Act लागू किया।
2003 National Biodiversity Authority की स्थापना की गई।
2004 नियमों ने अधिनियम (Act) के कार्यान्वयन (Implementation) का समर्थन किया।
2023 Parliament ने कई पहुंच और अनुपालन (Compliance) प्रावधानों में संशोधन किया।
2024 नए Biological Diversity Rules ने पुराने नियमों का स्थान लिया।
2026 एक विशेषज्ञ समिति ने आक्रामक विदेशी प्रजातियों पर काम शुरू किया।

National Biodiversity Authority क्या है?

National Biodiversity Authority (NBA) केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय (Union Environment Ministry) के तहत एक स्वायत्त वैधानिक निकाय (Autonomous statutory body) है।

इसका मुख्यालय चेन्नई, तमिलनाडु में है, और Biological Diversity Act इसकी कानूनी नींव (Legal foundation) प्रदान करता है।

कानून के तीन मुख्य उद्देश्य

  • जैविक विविधता का संरक्षण (Conserve) करना, और जैविक संसाधनों का स्थायी उपयोग करना।
  • उनके उपयोग से होने वाले लाभों को निष्पक्ष और समान रूप से साझा करना।

तीसरे उद्देश्य को आम तौर पर पहुंच और लाभ-साझाकरण (Access and benefit-sharing) कहा जाता है।

Access and benefit-sharing क्या है?

कोई कंपनी व्यावसायिक उत्पाद के लिए जैविक संसाधन का उपयोग कर सकती है।

स्थानीय ज्ञान किसी संसाधन के मूल्य की पहचान कर सकता है, जबकि लाभ-साझाकरण वैध प्रदाताओं और संरक्षकों (Conservers) के लिए उचित रिटर्न चाहता है।

लाभ मौद्रिक या गैर-मौद्रिक हो सकते हैं, जिसमें रॉयल्टी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology transfer) या सामुदायिक विकास शामिल हैं।

भारत की त्रि-स्तरीय संस्थागत संरचना (Three-tier institutional structure)

स्तर संस्थान मुख्य भूमिका
राष्ट्रीय National Biodiversity Authority विनियमन (Regulation), सलाह और राष्ट्रीय समन्वय
राज्य State Biodiversity Board राज्य-स्तरीय विनियमन और सलाह
स्थानीय Biodiversity Management Committee स्थानीय संरक्षण, दस्तावेजीकरण और परामर्श

स्थानीय निकाय Biodiversity Management Committees बनाते हैं, जो अपने अधिकार क्षेत्र में People’s Biodiversity Registers तैयार करने में मदद करते हैं।

ऐसे रजिस्टर (Registers) स्थानीय संसाधनों और संबंधित ज्ञान का दस्तावेजीकरण करते हैं।

राष्ट्रीय प्राधिकरण की संरचना (Composition)

केंद्र सरकार (Central Government) प्राधिकरण के सदस्यों की नियुक्ति करती है।

  • एक अनुभवी जैव विविधता विशेषज्ञ अध्यक्ष (Chairperson) के रूप में कार्य करता है, और 16 पदेन सदस्य (Ex officio members) प्रासंगिक केंद्रीय मंत्रालयों और संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • State Biodiversity Board के चार प्रतिनिधि रोटेशन (Rotation) द्वारा काम करते हैं, और पांच गैर-आधिकारिक सदस्य विशेष विशेषज्ञता (Expertise) प्रदान करते हैं।
  • एक सदस्य-सचिव (Member-Secretary) जैव विविधता संरक्षण में अनुभव लाता है।

इस प्रकार संशोधित प्राधिकरण में कुल 27 सदस्य हैं।

संशोधन चेतावनी: पुराने सारांश (Summaries) दस पदेन सदस्यों को दर्शाते हैं। संशोधित रचना 1 April 2024 को प्रभावी हुई।

एक पदेन सदस्य (Ex officio member) किसी अन्य आधिकारिक पद के कारण कार्य करता है।

प्राधिकरण के मुख्य कार्य

  • यह भारतीय जैविक संसाधनों तक निर्दिष्ट पहुंच को नियंत्रित करता है, और यह लागू प्रावधानों के तहत लाभ-साझाकरण की शर्तें निर्धारित करता है।
  • यह सरकारों को जैव विविधता संरक्षण पर सलाह देता है, और यह राज्य बोर्डों और स्थानीय समितियों का समर्थन करता है।
  • यह कुछ विदेशी बौद्धिक संपदा दावों (Intellectual property claims) का विरोध कर सकता है, और यह जैव विविधता विरासत स्थलों की पहचान और प्रबंधन का मार्गदर्शन करता है।
कानूनी चेतावनी: 2023 के संशोधन ने कई प्रक्रियाओं को बदल दिया। अनुमोदनों के पुराने सारांश अब पुराने हो सकते हैं।

सटीक अनुमति आवश्यकताएं आवेदक और प्रस्तावित गतिविधि पर निर्भर करती हैं।

संशोधित अधिनियम (Act) और वर्तमान नियमों को ऐसे प्रश्नों का निर्णय करना चाहिए।

Alien species क्या है?

एक विदेशी प्रजाति (Alien species) जानबूझकर या आकस्मिक मानव परिचय (Human introduction) के बाद अपनी प्राकृतिक सीमा से परे पाई जाती है।

एक विदेशी प्रजाति स्वचालित रूप से हानिकारक नहीं होती है।

यह आक्रामक (Invasive) कब बन जाती है?

एक आक्रामक विदेशी प्रजाति (Invasive alien species) स्थापित होती है और फैलती है, जिससे पारिस्थितिक, आर्थिक, सामाजिक या स्वास्थ्य संबंधी नुकसान होता है।

मुख्य अंतर: "विदेशी (Alien)" उत्पत्ति का वर्णन करता है। "आक्रामक (Invasive)" फैलाव और हानिकारक प्रभावों का वर्णन करता है।

विदेशी प्रजातियाँ कैसे पहुँचती हैं?

  • जहाज गिट्टी के पानी (Ballast water) में जीवों को ले जा सकते हैं, और आयातित पौधे बगीचों या खेतों से बच (Escape) सकते हैं।
  • पालतू जानवर और एक्वैरियम प्रजातियों को छोड़ा जा सकता है, और कीट (Pests) व्यापारिक वस्तुओं और पैकेजिंग (Packaging) के अंदर छिप सकते हैं।
  • परिवहन गलियारे (Transport corridors) नए आवासों में बीजों को ले जा सकते हैं।

आक्रामक प्रजातियां गंभीर नुकसान क्यों पहुंचा सकती हैं?

  • वे जगह और भोजन के लिए मूल प्रजातियों (Native species) को पछाड़ सकते हैं, और नए शिकारी (Predators) बिना तैयारी वाले मूल जानवरों पर हमला कर सकते हैं।
  • वे अपरिचित बीमारियों और परजीवियों (Parasites) को पेश कर सकते हैं, और घनी वृद्धि आग और जल चक्र (Water cycles) को बदल सकती है।
  • कृषि आक्रमण पैदावार को कम कर सकते हैं और लागत बढ़ा सकते हैं, और कुछ प्रजातियां मत्स्य पालन (Fisheries) और जल बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाती हैं।

भारत में परिचित उदाहरण

प्रजाति आम चिंता
Lantana camara जंगलों और चरागाहों में घनी झाड़ियाँ (Thickets) बनाती है
Water hyacinth (जलकुंभी) जल निकायों को अवरुद्ध करती है और ऑक्सीजन के स्तर को कम करती है
Prosopis juliflora कई शुष्क परिदृश्यों (Dry landscapes) में तेजी से फैलती है

प्रभाव पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु और प्रबंधन के अनुसार अलग-अलग होते हैं, क्योंकि एक उपयोगी प्रजाति कहीं और नुकसान का कारण बन सकती है।

समिति का गठन क्यों किया गया था?

National Green Tribunal ने स्वत: संज्ञान कार्यवाही (Suo motu proceedings) के माध्यम से आक्रामक विदेशी प्रजातियों की जांच की।

Suo motu का अर्थ है न्यायाधिकरण (Tribunal) द्वारा अपनी पहल पर की गई कार्रवाई।

इस कार्यवाही ने जैव विविधता, खेती और स्वास्थ्य के जोखिमों को उजागर किया।

NBA ने फिर समन्वित राष्ट्रीय कार्य के लिए एक समिति बनाई।

समिति का जनादेश (Mandate)

  • राज्य के इनपुट का उपयोग करके एक समेकित (Consolidated) राष्ट्रीय सूची तैयार करना, और सबसे अधिक जोखिम वाली प्रजातियों की पहचान करना और उन्हें प्राथमिकता देना।
  • विज्ञान-आधारित प्रबंधन और बहाली उपायों (Restoration measures) की सिफारिश करना, और राष्ट्रीय रोकथाम (Prevention), नियंत्रण और उन्मूलन (Eradication) मार्गदर्शन का मसौदा तैयार करना।
  • व्यापक उपयोग के लिए सफल प्रथाओं का दस्तावेजीकरण करना, और ज्ञान अंतराल (Knowledge gaps) तथा आवश्यक शोध की पहचान करना।
  • दीर्घकालिक डेटा निर्माण और नीतिगत प्रतिक्रियाओं (Policy responses) में सुधार करना।

समिति की कार्य अवधि दो वर्ष की है।

राष्ट्रीय सूची में सावधानी की आवश्यकता क्यों है?

केवल उपस्थिति पारिस्थितिक प्रभाव को नहीं दिखाती है, क्योंकि विशेषज्ञों को फैलाव, क्षति और प्रभावित आवासों के सबूत की आवश्यकता होती है।

विभिन्न राज्य अलग-अलग नामों का उपयोग कर सकते हैं, जबकि टैक्सोनोमिक (Taxonomic) संशोधन एक प्रजाति के वैज्ञानिक नाम को बदल सकते हैं।

इसलिए एक विश्वसनीय सूची (Credible list) को सबूत और नियमित अपडेट (Updates) की आवश्यकता होती है।

प्रबंधन के लिए सर्वोत्तम क्रम (Order)

  1. रोकथाम (Prevention): प्रवेश से पहले उच्च जोखिम वाली प्रजातियों को रोकें।
  2. शीघ्र पहचान (Early detection): नई आबादी को जल्दी खोजें।
  3. त्वरित प्रतिक्रिया (Rapid response): व्यापक प्रसार (Wider spread) से पहले उन्हें हटा दें।
  4. उन्मूलन (Eradication): संभव स्थानीय आबादी को पूरी तरह से समाप्त करें।
  5. नियंत्रण (Control): जब उन्मूलन असंभव हो तो क्षति को सीमित करें।
  6. बहाली (Restoration): बाद में मूल पारिस्थितिक तंत्र (Native ecosystems) को उबरने में मदद करें।

एक व्यापक आक्रमण (Widespread invasion) को नियंत्रित करने की तुलना में रोकथाम में आमतौर पर कम लागत आती है।

वैश्विक महत्व

वैश्विक मूल्यांकन (Global assessment) ने 37,000 से अधिक स्थापित विदेशी प्रजातियों को दर्ज किया है।

उनमें से 3,500 से अधिक में प्रलेखित (Documented) हानिकारक प्रभाव हैं।

आक्रामक विदेशी प्रजातियों ने दर्ज विलुप्त होने (Extinctions) में 60 प्रतिशत का योगदान दिया।

वे 16 प्रतिशत में एकमात्र चालक (Driver) थे, लेकिन ये भारत-विशिष्ट निष्कर्षों के बजाय वैश्विक बने हुए हैं।

कुनमिंग-मॉन्ट्रियल (Kunming-Montreal) जैव विविधता लक्ष्य

लक्ष्य 6 (Target 6) वैश्विक जैव विविधता ढांचे के तहत आक्रामक विदेशी प्रजातियों को संबोधित करता है।

देशों को 2030 तक परिचय और स्थापना (Establishment) दरों को कम से कम आधा करना चाहिए।

देशों को उच्च जोखिम वाले मार्गों, प्रजातियों और साइटों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जबकि भारत की समिति इस वैश्विक प्रतिबद्धता (Global commitment) का समर्थन कर सकती है।

प्रारंभिक परीक्षा फोकस: NBA वैधानिक है और इसका मुख्यालय चेन्नई में है। स्थानीय Biodiversity Management Committees, People’s Biodiversity Registers तैयार करती हैं।

निष्कर्ष

एक विश्वसनीय राष्ट्रीय सूची भारत को बिखरे हुए नियंत्रण से समन्वित रोकथाम की ओर ले जा सकती है।

स्रोत

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