समाचार में क्यों?
10 जून 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने Zojila tunnel की सफलता की घोषणा की, जिसका अर्थ है कि दोनों छोर से काम कर रहे उत्खनन दल अंततः मिल गए हैं। कश्मीर और लद्दाख के बीच सभी मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए लगभग 3,530 मीटर की ऊंचाई पर श्रीनगर-सोनमर्ग-कारगिल (Srinagar–Sonamarg–Kargil) सड़क परियोजना के हिस्से के रूप में 13.15 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जा रही है।
पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय राजमार्ग 1 (National Highway 1) पर जोजिला (Zojila) दर्रा कश्मीर घाटी को लद्दाख के पठार से जोड़ता है। 3,528 मीटर की ऊंचाई पर, भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के कारण दर्रा हर सर्दियों में कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख भारत के बाकी हिस्सों से कट जाता है। इस रणनीतिक और आर्थिक अड़चन (bottleneck) को दूर करने के लिए, सरकार ने 2018 में Zojila tunnel परियोजना को मंजूरी दी थी और मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Megha Engineering and Infrastructure Limited - MEIL) को निर्माण का काम सौंपा था। इस परियोजना में 13.15 किमी लंबी मुख्य सुरंग और 17 किमी की एप्रोच (approach) सड़कें शामिल हैं।
विशेषताएं और अपेक्षित लाभ
- सभी मौसम में कनेक्टिविटी: एक बार पूरा हो जाने पर, यह सुरंग वाहनों को पूरे वर्ष कश्मीर के सोनमर्ग और लद्दाख के मिनामर्ग (Minamarg) के बीच यात्रा करने की अनुमति देगी, जिससे बर्फीले तूफानों और भूस्खलन के कारण होने वाले सड़क बंद होने में कमी आएगी।
- यात्रा के समय में कमी: यह सुरंग दोनों शहरों के बीच की यात्रा को लगभग 90 मिनट से घटाकर लगभग 15 मिनट कर देगी। इससे नागरिकों और सेना के लिए रसद (logistics) में सुधार होगा।
- सुरक्षा उपाय: अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, आग का पता लगाने और दमन प्रणाली, सीसीटीवी (CCTV) निगरानी और भागने के रास्ते की योजना शामिल है। सुरंग की ओर जाने वाले रास्तों पर हिमस्खलन से बचाव की संरचनाएं बनाई जा रही हैं।
- आर्थिक और रणनीतिक महत्व: सुरंग लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देगी, आवश्यक वस्तुओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी और चीन के साथ सीमा पर रक्षा तैयारियों को मजबूत करेगी। यह जम्मू-कश्मीर में ₹1.35 लाख करोड़ से अधिक की राजमार्ग परियोजनाओं के व्यापक पैकेज का हिस्सा है।
- प्रोजेक्ट टाइमलाइन: यद्यपि उत्खनन कार्य मिल गया है, लेकिन लाइनिंग, वेंटिलेशन और सड़क की सतह लगाने जैसे परिष्करण (finishing) कार्य जारी रहेंगे। अधिकारियों का लक्ष्य 2028 तक सुरंग को यातायात के लिए खोलना है।
निष्कर्ष
Zojila tunnel दूरस्थ हिमालयी क्षेत्रों को जोड़ने के भारत के बुनियादी ढांचे के अभियान में एक मील का पत्थर है। कश्मीर और लद्दाख के बीच साल भर विश्वसनीय पहुंच सुनिश्चित करके, यह परियोजना आर्थिक विकास, पर्यटन और राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देगी। सुरंग को समय पर और बजट के भीतर पूरा करने के लिए निर्माण के दौरान निरंतर सतर्कता और सख्त सुरक्षा निगरानी की आवश्यकता होगी।